NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ (निरस्त) परीक्षा, जून 2024 संस्कृत

Total Questions: 100

1. सूचीद्वयमाश्रित्य समुचितं मेलयत -

सूची-Iसूची-II
A. सति हेतौ फलाभावःI. स्वभावोक्ति:
B. सधर्मवस्तुप्रतिबिम्बनम्II. विशेषोक्ति:
C. हेतुं विना कार्योत्पत्तिःIII. दृष्टान्तः
D. डिम्भादेःस्वक्रियारूपवर्णनम्IV.विभावना

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) A-II, B-III, C-IV, D-I
Solution:
A. सति हेतौ फलाभाव:विशेषोक्ति:
B. सत्त्ववस्तुप्रतिषेधवचनम्दृष्टान्तः
C. हेतूं बिना कार्योत्पत्ति:विभावना
D. दिखान्ते: स्वक्रियावरणम्स्वभावोक्तिः

विशेषोक्ति अलङ्कार का लक्षण- "विशेषोक्तिरखण्डेषु कारणेषु फलावचः"।

अर्थात् कारणों के एकत्र होने पर भी फल का न होना विशेषोक्ति अलङ्कार कहलाता है।

दृष्टान्त अलङ्कार- "दृष्टान्तः पुनरेतेषां सर्वेषां प्रतिबिम्बनम् अर्थात् उपमान, उपमेय उनके विशेषण और साधारण धर्म आदि सबका 'बिम्ब प्रतिबिम्बभाव होने पर 'दृष्टान्त अलङ्कार' होता है।

विभावना अलङ्कार "क्रियायाः प्रतिषेधोऽपि फलव्यक्तिर्विभावना।" अर्थात् कारण का निषेध अथवा अभाव होने पर भी फल की उत्पत्ति 'विभावना' अलङ्कार कहलाता है।

स्वभावोक्ति अलङ्कार- "स्वभावोक्तिस्तु डिम्भादेः स्वक्रियारूपवर्णनम् ।। अर्थात् बालक आदि के वर्ण एवं अवयवसंस्थान का वर्णन 'स्वभावोक्ति' अलङ्कार कहलाता है।

2. निर्वचनसिद्धान्तानुसारं पञ्चविधनिरुक्तानां क्रमं चिनुत

A. धात्वर्थातिशयः
B. वर्णनाशः
C. वर्णविकारः
E. वर्णागमः
D. वर्णविपर्ययः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) E, D, C, B, A
Solution:निर्वचनसिद्धान्तानुसारं पञ्चविधनिरुक्तानां क्रमं वर्णागमः, वर्णविपर्यय, वर्णविकारः, वर्णनाशः, धात्वर्थातिशयः । अर्थात् निर्वचन सिद्धान्त के अनुसार निरुक्त पाँच प्रकार का होता है।

1. वर्णागमः, 2. वर्णविपर्यय, 3. वर्णविकार, 4. वर्णनाश, 5. धात्वर्थातिशय । अतः समुचित विकल्प (d) है।

3. सूचीद्वयमाश्रित्य समुचितं मेलयत -

सूची-Iसूची-II
A. मन्त्रिपरिषदि द्वादशमात्याःI. औशनसाः
B. मन्त्रिपरिषदि षोडशामात्याःII.कौटिल्यः
C. मन्त्रिपरिषदि विंशतिः अमात्याःIII. मनुः
D. मन्त्रिपरिषद् यथासामर्थ्यम्IV.बार्हस्पत्याः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A-III, B-II, C-I, D-IV
Solution:सूचीद्धयमाश्रित्य समुचितं मेलनमस्ति।
सूची-Iसूची-II
A. मन्त्रिपरिषदि द्वादशामात्याःमनुः
B. मन्त्रिपरिषदि षोडशामात्याःबार्हस्पत्याः
C. मन्त्रिपरिषदि विंशतिः अमात्याःऔशनसाः
D. मन्त्रिपरिषदि यथासामर्थ्यम्कौटिल्यः

अतः समुचित विकल्प (b) A-III, B-IV, C-I, D-II सही है।

4. सूचीद्वयमाश्रित्य परस्परं समुचितं मेलयत

सूची-Iसूची-II
A. विशिष्टपदरचना रीतिःI. भरतः
B. न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनिताननम्II. वामनः
C. काव्यस्यात्मा स एवार्थःIII. भामहः
D. विभावानुभावव्यभिचारि- - संयोगाद्रसनिष्पत्तिःIV. आनन्दवर्धनः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) A-II, B-III, C-IV, D-I
Solution:सूचीद्वयमाश्रित्य परस्परं समुचितं मेलनमस्ति।

A. विशिष्टपदरचना रीतिः - वामनः
B. न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनिताननम् - भामहः
C. काव्यस्यात्मा स एवार्थः - आनन्दवर्धनः
D. विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः - भरतः

(A) वामन- रीतिसम्प्रदाय आचार्य वामन द्वारा प्रवर्तित एक काव्यसम्प्रदाय है, जो रीति को काव्य की आत्मा मानता है। "विशिष्टपदरचना रीतिः

(B) भामह - अलंकार सम्प्रदाय के प्रमुख आचार्य भामह हैं। 'न कान्तमपि निर्भूषं विभाति वनिताननम्।'

(C) आनन्दवर्धन - "काव्यस्यात्मा ध्वनिरिति बुधैर्यः समाम्नातपूर्वः "। अर्थात् काव्य की आत्मा ध्वनि है।

(D) भरतमुनि - रससम्प्रदाय के मुख्य आचार्य भरतमुनि हैं। "विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः।

5. शिशुपालवधे प्रयुक्तेन 'अनूरुसारथिः' इति पदेन को ज्ञेयः ?

Correct Answer: (c) सूर्यः
Solution:शिशुपालवधे प्रयुक्तेन 'अनूरुसारथिः:' इति पदेन सूर्यः ज्ञेयः । अर्थात् शिशुपाल वधमहाकाव्य में प्रयुक्त अनूरूसारथी शब्द का तात्पर्य सूर्य से है। शिशुपालवध महाकवि माघ द्वारा रचित महाकाव्य है।
अतः समुचित विकल्प (c) है।

6. न्यायाभिमतप्रमेयाणां क्रमं चिनुत

A. प्रेत्यभावः
B. दोषः
C. प्रवृत्तिः
D. मनः
E. बुद्धिः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) E, D, C, B, А
Solution:न्यायभिमतप्रमेयाणां क्रमं बुद्धिः, मनः, प्रवृत्तिः, दोषः, प्रेत्यभावः अस्ति। अर्थात् न्यायदर्शन में प्रमेय का क्रम-बुद्धि, मन, प्रवृत्ति, दोष, प्रेत्यभाव है। न्याय में प्रमेयों की संख्या 12 'बारह' है। आत्मा, शरीर, इन्द्रिय, अर्थ, बुद्धि, मन, प्रवृत्ति, दोष, प्रेत्यभाव, फल, दुःख और अपवर्ग ।

7. शक्तेः पदार्थान्तरत्वं कः स्वीकरोति ?

Correct Answer: (b) प्रभाकरमिश्रः
Solution:शक्तेः पदार्थान्तरत्वं प्रभाकरमिश्रः स्वीकरोति । अर्थात् सत्ता के पदार्थ का भेद प्रभाकर मिश्र स्वीकार करते हैं।

कुमारिल भट्ट - भाट्टसम्प्रदाय के संस्थापक ।
अन्नम्भट्ट तर्कसंग्रह - (रचना) ।
जयन्तभट्ट - काश्मीरी कवि, न्यायमञ्जरी पर भाष्य ।

8. का नाम वार्ता ?

Correct Answer: (d) कृषिपशुपाल्ये वाणिज्या च
Solution:कृषिपशुपाल्ये वाणिज्या च नाम वार्ता। अर्थात् कृषिपशुपालन और वाणिज्य का नाम वार्ता है। यह कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रयुक्त चार 'आन्वीक्षिकी, त्रयी, और दण्डनीति' में से एक है।

9. नागेशभट्टस्य इमे ग्रन्थाः -

A. दीपिका
B. उद्योतः
C. प्रदीपः
D. परिभाषेन्दुशेखरः
F. सिद्धान्तमञ्जूषा

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (c) B, D,E केवलम्
Solution:नागेशभट्टस्य इमे उद्योतः, परिभाषेन्दुशेखरः, सिद्धान्तमञ्जूषा ग्रन्थाः सन्ति । अर्थात् नागेशभट्ट द्वारा उद्योत, परिभाषेन्दुशेखर, सिद्धान्तमञ्जूषा रचित ग्रन्थ हैं। प्रदीप कैय्यट की टीका है, दीपिका- भर्तृहरि की। ये दोनों महाभाष्य की टीकाएँ हैं।

10. महाकवीनां पूर्वपरकालक्रमं निरूपयत-

A. श्रीहर्षः
B. कालिदासः
C. भासः
D. माघः
E. भारविः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) C, B, E, D, A
Solution:महाकवीनां पूर्वपरकालक्रमं - भास, कालिदास, भारवि, माघ, श्रीहर्ष । भास द्वितीय से प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व, कालिदासप्र. शताब्दी ई.पू.,भारवि छठी शताब्दी, माघ सातवी शताब्दी तथा श्री हर्ष बारवीं शताब्दी। प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (a) सही है।