NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ (निरस्त) परीक्षा, जून 2024 संस्कृत

Total Questions: 100

11. अश्वघोषप्रणीतः कथासङ्ग्रहग्रन्थः कः ?

Correct Answer: (e) *
Solution:अश्वघोषप्रणीतः ग्रन्थ -

शारिपुत्रप्रकरण - प्रकरण ग्रन्थ है।
राष्ट्रपालम् - नाट्यग्रन्थ है।
कल्पनामण्डितिका - कुमारलात का ग्रन्थ है।
बुद्धविजयम - शान्तिभिक्षु शास्त्री की कविता संग्रह है।

12. 'सिद्धे शब्दार्थसम्बन्धे" इति कस्य वचनम्?

Correct Answer: (b) वार्तिककारस्य
Solution:"सिद्धे शब्दार्थसम्बन्धे” इति वार्तिककारस्य वचनम्। अर्थात् "सिद्धे शब्दार्थसम्बन्धे” यह वार्तिककार का वचन है। पतञ्जलि के महाभाष्य में यह प्रथम वार्तिक वर्णित है। इसका अर्थ है 'शब्द और अर्थ' का सम्बन्ध स्वभावसिद्ध है।

13. सामवेदीयब्राह्मणेषु परिगण्यन्ते-

A. कौषीतकी
B. मैत्रायणी
C. आर्षेयः
D. छान्दोग्यम्
E. वंशः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) C, D, E केवलम्
Solution:सामवेदीयब्राह्मणेषु आर्षेयः, छान्दोग्यम्, वंशः गण्यन्ते ।

कोषीतकी - ऋग्वेद का ब्राह्मण है।
औरमैत्रायणी - कृष्ण यजुर्वेद का ब्राह्मण है।

सामवेद के 8 ब्राह्मण हैं।

अतः विकल्प (d) सही है।

14. मन्त्रस्य पञ्चाङ्गानि यथाक्रम व्यवस्थापनीयानि -

A. पुरुषद्रव्यसंपद्
B. देशकालविभागः
C. कार्यसिद्धिः
D. विनिपातप्रतीकारः
E. कर्मणामारम्भोपायः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) E, A, B, D, C
Solution:मन्त्रस्य पञ्चाङ्गानि कर्मणारमाम्भोपायः पुरुषद्रव्यसंपद् देशकालविभागः, विनिपातप्रतीकार, कार्यसिद्धिः सन्ति ।

अर्थात् यह कौटिल्य की पुस्तक अर्थशास्त्र के मंत्राधिकार प्रकरण में वर्णित है।

15. शांखायन-आरण्यकं केन वेदेन सम्बद्धम् अस्ति ?

Correct Answer: (c) ऋग्वेदेन
Solution:शांखायन आरण्यकं ऋग्वेदेन सम्बन्धम् अस्ति। अर्थात् ऋग्वेद से सम्बद्ध आरण्यक शांखायन है। यह ऋग्वेद के शांख्यायन शाखा से सम्बद्ध आरण्यक है। यह 15 अध्यायों में विभक्त है। इसके अध्याय 3 से 6 तक को 'कौषीतकी उपनिषद् कहते हैं। 7 से 8 को 'संहितोपनिषद् कहते हैं। इसको कौषीतकी आरण्यक भी कहा जाता है।

ऋग्वेद  - ऐतरेय और शांखायन आरण्यक ।
शुक्लयजुर्वेद - बृहदारण्यक ।
कृष्णयजुर्वेद - तैत्तिरीय, मैत्रायणी आरण्यक।
सामवेद - तवलकार आरण्यक
अथर्ववेद - नहीं प्राप्त होता है।

अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।

16. भर्तृहरेः गुरोः नाम किम्?

Correct Answer: (c) वसुरातः
Solution:भर्तृहरेः गुरोः वसुरातः नाम अग्नि । अर्थात् भर्तृहरि के गुरु का नाम वसुरात है। इन्होंने शतकत्रय, वाक्यपदीयम् तथा महाभाष्य पर दीपिका नामक टीका भी किये हैं।

पतञ्जलि - महाभाष्यकार है।
चन्द्राचार्य - जैन वैयाकरण है।
व्याडि - वैयाकरण आचार्य है।

17. पञ्चमहायज्ञानं क्रमं चिनुत -

A. बलिवैश्वदेवयज्ञः
B.देवयज्ञः
C. अतिथियज्ञः
D. ब्रह्मयज्ञः
E. पितृयज्ञः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) D, B, E, A, C
Solution:पञ्चमहायज्ञानं क्रमं ब्रह्मयज्ञः, देवयज्ञः, पितृयज्ञः, बलिवैश्वदेवयज्ञः अतिथियज्ञः अस्ति। अर्थात् पञ्चमहायज्ञों का क्रम ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, बलिवैश्वदेवयज्ञः तथा अतिथियज्ञ है। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।

18. अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधूः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्॥ इति अयं कस्य सूक्तस्य मन्त्रः ?

Correct Answer: (b) वाक्सूक्तस्य
Solution:अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधूः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्।। इति अयं वाक्सूक्तस्य मन्त्रः । अर्थात् यह वाक्सूक्त का मन्त्र है। यह ऋग्वेद के 10वें मंडल का 125वाँ सूक्त है। ऋषि-आम् णी वाक् । देवता - परमात्मा हैं।

ज्ञानसूक्त-10/71 ऋषि - बृहस्पति, देवता - ज्ञान ।
नासदीयसूक्त-10/129, ऋषि परमेष्ठी प्रजापति, देवत हिरण्यगर्भ।
राष्ट्राभिवर्धनसूक्त-अथर्ववेद, ऋषि वसिष्ठ,देवता अभिवर्तमणि हैं।

19. भाषायाः आकृतिमूलकवर्गीकरणे एतान् व्यवस्थापयत

A. पूर्वान्तयोगात्मकः
B. मध्ययोगात्मकः
C. अन्तयोगात्मकः
D. पूर्वयोगात्मकः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (c) D, B, C, А
Solution:भाषायाः आकृतिमूलकवर्गीकरणे एतान् यथाक्रमं - पूर्वयोगात्मकः, मध्ययोगात्मकः,अन्तयोगात्मकः, पूर्वान्तयोगात्मकः अस्ति। अर्थात् भाषा का आकृतिमूलक वर्गीकरण में इनका यथाक्रम - पूर्वयोगात्मक, मध्ययोगात्मक, अन्तयोगात्मक, पूर्वान्तयोगात्मक है। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।

20. मनुस्मृत्यनुसारेण धर्मलक्षणानि यथाक्रमं व्यवस्थापनीयानि-

A. सदाचारः
B. वेदः
C. स्मृतिः
D. आत्मनः

प्रियम् अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (d) B, C, A, D
Solution:मनुस्मृत्यनुसारेण धर्मलक्षणानि यथाक्रमं वेदः, स्मृतिः, सदाचारः, आत्मनः प्रियम् अस्ति। अर्थात् मनुस्मृति अनुसार धर्मों का लक्षण यथाक्रम - वेद, स्मृति, सदाचार, जो स्वयं को अच्छा लगे।
वेदः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियमात्मनः ।
एतच्चतुर्विधमाहुः साक्षाद्धर्मस्य लक्षणम् 2/121