NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ (निरस्त) परीक्षा, जून 2024 संस्कृत

Total Questions: 100

31. तत्त्वमसीति वाक्यं सम्बन्धत्रयेणाखण्डार्थबोधकं भवति। तत्र सम्बन्धत्रये परिगण्यन्ते-

A. स्वरूपसम्बन्धः
B. कालिकसम्बन्धः
C. सामानाधिकरण्यसम्बन्धः
D. विशेषणविशेष्यभावसम्बन्धः
E. लक्ष्यलक्षणभावसम्बन्धः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (d) C, D, E केवलम्
Solution:समानाधिकरण सम्बन्धः विशेषणविशेष्यता । लक्ष्य लक्षण सम्बन्धः पदार्थप्रत्यगात्मनाम् इति । इस वेदान्तसार के सूत्र से सम्बन्धित यह पदार्थों से तीन सम्बन्ध होते हैं।

समानाधिकरण सम्बन्ध, विशेषणविशेष्यता सम्बन्ध और लक्ष्य लक्षण सम्बन्ध है तत्वमसि के भेद से तत् त्वम् असि इस प्रकार से सामवेदीय महावाक्य के तीन पद होते हैं।

जो कि इस प्रकार से होते हैं-

तत् - वह
त्वम् - तुम
असि  - हो

अर्थात् वह ब्रह्म तुम ही हो जिसे सभी बाह्य जगत में खोजते हैं। इस महावाक्य का सामवेद में 9 बार आगमन हुआ है। अतः विकल्प (d) सही है।

32. शौशिरिशाखा केन वेदेन सम्बद्धा ?

Correct Answer: (a) ऋग्वेदेन
Solution:शौशिरिशाखा ऋग्वेदेन सम्बन्धः अस्ति। अर्थात् ऋग्वेद के शाकल शाखा की शाखा (उपशाखा) शौशिरीय शाखा से सम्बन्धित शिक्षा ग्रन्थ प्राप्त होती है। अतः शौशिरीय शिक्षा ऋग्वेद से प्राप्त होती है। पतञ्जलि के अनुसार ऋग्वेद की 21 शाखाएँ हैं, लेकिन वर्तमान में ऋग्वेद की 5 शाखाएँ ही प्राप्त होती हैं। शाकल, वाष्कल, आश्वलायन,, शांखायन और माण्डूकायन यह पाँच शाखाएँ प्राप्त हैं।

अतः विकल्प (a)सही है।

33. नियमसारग्रन्थस्य कर्ता कः ?

Correct Answer: (d) कुन्दकुन्दः
Solution:नियमसार ग्रन्थस्य कर्ता कुन्दकुन्दः अस्ति । अर्थात् नियमसार ग्रन्थ के रचयिता कुन्दकुन्दाचार्य हैं। अतः विकल्प (d) सही है।

34. महाभाष्यस्य इमाः टीका यथाकालं व्यवस्थापयत -

A. शब्दकौस्तुभः
B. उद्योतः
C. दीपिका
D. प्रदीपः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) C, D, А, В
Solution:महाभाष्यस्य इमाः टीकाः यथाकालं अस्ति।

दीपिका टीका - भर्तृहरि
प्रदीप टीका - कैय्यट
शब्दकौस्तुभ - भट्टोजिदिक्षित
उद्योत टीका - नागेशभट्ट की है।

अतः विकल्प (a) सही है।

35. "ब्रह्म वै मन्त्रः " इति वाक्यं कस्य ब्राह्मणस्य अस्ति?

Correct Answer: (c) शतपथब्राह्मणस्य
Solution:"ब्रह्म वै मन्त्रः” इति वाक्यं शतपथ ब्राह्मणस्य अस्ति। अर्थात् यह वाक्य शतपथ ब्राह्मण से सम्बन्धित है। इसे साथ ही ब्रह्म यज्ञः, प्रजापतिर्यज्ञः, यज्ञों वै विष्णुः, वाग्वै यज्ञः आदि वाक्य भी शतपथ ब्राह्मण में वर्णित है। अतः विकल्प (c) सही है।

36. जैनमते त्रसः कतिविधः ?

Correct Answer: (c) चतुर्विधः
Solution:जैनमते त्रसः चतुर्विधः अस्ति

जैनाचार्यों के मत में वस चार प्रकार के होते हैं-
1. द्विविध, 2. त्रिविध, 3. चतुर्विध, 4. पञ्चविध त्रस होते हैं।

अतः विकल्प (c) सही है। जीव दो प्रकार के होते हैं-

1. समनस्क, 2. अमनस्क

संज्ञायुक्त जीव समनस्क है, शिक्षा, क्रिया,अलाप ग्रहण करना संज्ञा है। समनस्क-गन्धर्व मनुष्य आदि आते हैं, जो गुण दोषों को पहचानते हैं। संज्ञारहित जीव अमनस्क होते हैं। यह दो प्रकार के होते हैं। स और स्थावर उनमें इन्द्रिय वाले जीव त्रस हैं, यह चार प्रकार के होते हैं। जैसे- शंख गण्डोलक। स्थावर पृथ्वी जल तेज वायु वनस्पति स्थावर है।

37. प्रत्यभियोगं कुत्र कुर्यात् ?

Correct Answer: (c) कलहे
Solution:प्रत्यभियोगं कलहे कुर्यात्।
कुर्यात् प्रत्यभियोगं च कलहे साहसेषु च।
अर्थात् प्रत्यभियोग (उल्टा अभियोग) कलह (वाक्पारुष्य) और साहस (विषशस्त्रादि से प्राण हरणादि) में लगाया जा सकता है ऐसा याज्ञवल्क्य जी कहते हैं। अतः विकल्प (c) सही है।

38. कण्टकादिजन्यं दुःखमेव नरको भवति इति कस्य मतम्?

Correct Answer: (a) चा कस्य
Solution:कण्टकादिजन्यं दुःखमेव नरको भवति इति मतं चार्वाकस्य अस्ति। अतएव कण्टकादिजन्यं दुःखमेव नरकः । लोक प्रसिद्धो राजा परमेश्वरः । देहच्छेदो मोक्षः । देहात्मवादे च स्थूलोऽहं, कृशोहं, कृष्णोऽहम् इत्यादि समानाधिकरण्योपपत्ति । इसीलिए सकण्टकादि (भौतिक कारणों से उत्पन्न) दुःख ही नरक है।

पुराणों में वर्णित कुम्भीपाक आदि नरक नाम की कोई जगह ही नहीं है। संसार में स्वीकार राजा ही परमेश्वर है। शरीर का अंत ही मोक्ष है।

देह को आत्मा मानने पर ही 'मैं मोटा हूँ', 'मैं पतला हूं', 'मैं काला हूँ', इत्यादि वाक्यों को सरल हो सकता है, क्योंकि उद्देश्य और विधेय दोनों का आधार एक ही हो जाता है। अतः विकल्प (a) सही है।

39. प्रकरणे यथाक्रमं प्रत्ययाः व्यवस्थापनीयाः-

A. यत्
B. ण्यत्
C. क्यप्
D. अनीयर्
E. तव्य

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (a) E, D, A, C, B
Solution:प्रकरणे यथाक्रमं प्रत्ययाः व्यवस्थापनीयाः- तव्य, अनीयर, यत्, क्यप्, ण्यत्, उचितं क्रमं अस्ति। अर्थात् तव्य - अनीयर् यत् क्यप् - ण्यत् उचित क्रम है। कृत्य प्रत्यय सात हैं- तव्यत्, तव्य, अनीयर, केलिमर्, यत्, क्यप्, और ण्यत्। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (a) है।

40. विषयानुसारेण अभिलेखाः कति प्रकारकाः ?

Correct Answer: (c) 9
Solution:विषयानुसारेण अभिलेखाः नव प्रकारकाः । अर्थात् विषयानुसार अभिलेख नौ प्रकार के होते हैं।