NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ (निरस्त) परीक्षा, जून 2024 संस्कृत

Total Questions: 100

61. याज्ञवल्क्यस्मृतौ प्रथमाध्याये कति प्रकरणानि सन्ति?

Correct Answer: (b) 13
Solution:याज्ञवल्क्यस्मृतौ प्रथमाध्याये त्रयोदश प्रकरणानि सन्ति । याज्ञवल्क्य स्मृति के प्रथमकाण्ड (प्रथम अध्याय) में 13 प्रकरण हैं। 1. उपोद्वात प्रकरणम्, 2. ब्रह्मचारि प्रकरणम्, 3. विवाह प्रकरणम्, 4. वर्णजाति विवेक प्रकरणम्, 5. गृहस्थ प्रकरणम्, 6. स्नातवह प्रकरणम्, 7. भक्ष्याभक्ष्यप्रकरणम्, 8. द्रव्य शुद्धिप्रकरणम्, 9. दान प्रकरणम्, 10. श्राद्ध प्रकरणम्, 11. गणपति कल्प प्रकरणम्, 12. ग्रहशान्ति प्रकरणम्, 13. राजधर्म प्रकरणम्।

62. उच्चावचाः पदार्थाः भवन्तीति कस्य मतम्?

Correct Answer: (d) गास्य
Solution:उच्चावचाः पदार्थाः भवन्ति इति मतम् गार्यस्य अस्ति। इन उपसर्गों के अर्थ अनेक प्रकार के हुआ करते हैं यह मत गार्ग्य का है। इनके मत में उपसर्ग द्योतक नहीं अपितु वाचक होते हैं।

63. गणानुसारेण यथाक्रमं धातवः सम्पादनीयाः

A. अद्
B. हु
C. एध्
D. तुद्
E. तन्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) C, A, B, D, E
Solution:गणानुसारेण यथा क्रमं धातवः अस्ति-

एध वृद्धौ, भ्वादिगणस्थ धातुः अस्ति।
अद्भक्षणे, अदादिगणस्थ धातुः अस्ति।
हु दानादानयोः, जुहोत्यादिगणस्थ धातुः अस्ति ।
तुद् व्यथने, तुदादिगणस्थ धातुः अस्ति।
तनु विस्तारे, तनादिगणस्थ धातुः अस्ति।
गण का क्रम -भ्वादि, अदादि, जुहोत्यादि, दिवादि, स्वादि, तुदादि, रुधादि, तनदि, क्रयादि, चुरादि । अतः उपर्युक्तेषु विकल्पेषु समुचितं विकलं (d) अस्ति।

64. इतमस्ति भासप्रणीतं महाभारताश्रितं रूपकम्-

Correct Answer: (d) मध्यमव्यायोगः
Solution:मध्यम व्यायोगः भास प्रणीतम् महाभारताश्रितं रूपकं अस्ति ।

मध्यम व्यायोग भास प्रणीत महाभारताश्रित रूपक है।
महाकवि भास ने 13 रूपकों की रचना की है।
रामकथाश्रित- प्रतिमानाटक, अभिषेक नाटक, महाभारताश्रित - पञ्चरात्रम्, मध्यमव्यायोग, दूतघटोत्कच, कर्णभम्, दूतवाक्म्, उरुभंगम् पुराणकथाश्रित-बालचरितम् उदयनकथाश्रित- प्रतिज्ञायौगन्धरायण, स्वप्नवासवदत्तम् कविकल्पितरूपक अविमारकम्, चारुदत्तम्। अतः विकल्प (a) सही है।

65. अभिलेखशास्त्रविदां नामानि यथाक्रमं व्यवस्थापयत

A. जॉर्ज ब्यूलर
B. जेम्स प्रिंसेप
C. सर एलेग्जेंडर कनिंघम
D. रायबहादुर गौरीशङ्कर हीराचन्द ओझा
E. जॉन फेथफुल फ्लीट

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत

Correct Answer: (b) B, C, A, E, D
Solution:अभिलेखशास्त्रविदां नामानि यथाक्रमं भवति-

B. जेम्स प्रिंसेप
C. सर एलेग्जेंडर कनिंघम
A. जॉर्ज ब्यूलर
E. जॉन फेथफुल फ्लीट
D. रायबहादुर गौरीशङ्कर हीराचन्द ओझा
अतः विकल्प (b) सही है।

66. संस्कृतभाषायां कति ध्वनयः सन्ति?

Correct Answer: (d) 48
Solution:संस्कृतभाषायां 48 ध्वनयः भवन्ति । संस्कृतभाषा में भाषा विज्ञान के अनुसार 48 ध्वनियाँ होती है। 13 स्वर ध्वनि, 25 स्पर्श ध्वनि, 4 अन्तःस्थ, 4 ऊष्म, अनुस्वार और विसर्ग । वैदिक ध्वनिया 52 हैं। अतः विकल्प (d) सही है।

67. पुरुषबहुत्वसिद्धौ हेतवो भवन्ति -

A. जन्ममरणकरणानां प्रतिनियमः
B. अयुगपत्प्रवृत्तिः
C. युगपत्प्रवृत्तिः
D. त्रैगुण्यविपर्ययः
E. उपादानग्रहणम्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) A, B, D केवलम्
Solution:पुरुषबहुत्वसिद्धौ
A. जन्ममरणकरणानां प्रतिनियमः
B. अयुगपत्प्रवृत्तिः D. त्रैगुण्यविपर्ययः हेतवो भवन्ति । सांख्य के अनुसार पुरुष बहुत्व की सिद्धि, जन्म-मरणरूपी करणों के प्रतिनियम से, एक साथ प्रवृत्ति न होने से, तीनों गुणों का विपर्यय होने से, पुरुष बहुत्व की सिद्धि होती है। अतः विकल्प (b) सही है।

68. सामवेदीसप्तस्वराणां क्रमं चिनुत-

A. निषादः
B. षड्ज:
C. ऋषभः
D. गान्धारः
E. मध्यमः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत - 

Correct Answer: (c) E, B, C, D, A
Solution:सामवेदीस्वराणां समुचितं क्रमं मध्यमः, षड्जः, ऋषभः, गान्धारः, निषादः अस्ति ।

अतः सामवेद में मध्यम, गान्धार, ऋषभ, षड्ज, निषाद्, धैवत, पञ्चम्, के क्रम से रहता है अतः सामवेद के स्वर उदात्त से अवरोह की तरफ चलते हैं। अतः विकल्प (c) सही है। सूत्र सा-रे-गा-म-पध-नी।

69. पर्वतः काञ्चनमयवह्निमान् धूमादित्यत्र को हेत्वाभासः ?

Correct Answer: (a) पक्षाप्रसिद्धिः
Solution:र्वतः काञ्चनमयवह्निमान् धूमात् इत्यत्र पक्षाप्रसिद्धिः हेत्वा भासः अस्ति। “स्वर्ण पर्वत अग्निमय है क्योंकि यह धूममय है" इस अनुमान में धूम हेतु है, पक्ष स्वर्णमय पर्वत पक्ष है। यहाँ पक्ष स्वयं असिद्ध है इसलिए यहाँ आश्रयासिद्ध हेत्वाभास है। अतः विकल्प (a) सही है।

70. कौटिलीय अर्थशास्त्रे सप्तमाधिकरणस्य नाम किम्?

Correct Answer: (d) षाड्गुण्याधिकरणम्
Solution:कौटिलीय अर्थशास्त्रे सप्तमाधिकरणस्य नाम षाड्गुण्याधिकरणम् अस्ति। कौटिलीय अर्थशास्त्र के सप्तम् अधिकरण का नाम षाड्गुण्य है। अर्थशास्त्र में 15 अधिकरण 180 अध्याय हैं।
स्तम्भः १स्तम्भः २
प्रथम अधिकरणविनयाधिकरण
द्वितीय अधिकरणअध्यक्ष प्रचार
तृतीय अधिकरणधर्मस्थीयाधिकरण
चतुर्थ अधिकरणकंटकशोधन
पंचम अधिकरणवृत्ताधिकरण
षष्ठ अधिकरणयोगवृत्ति निरूपण
सप्तम अधिकरणषाङ्गुण्य अधिकरण
अष्टम अधिकरणव्यसनाधिकरण
नवम अधिकरणअभियास्यत् कर्माधिकरण
दशम अधिकरणसंग्रामाधिकरण
एकादश अधिकरणसंघवृत्ताधिकरण
द्वादश अधिकरणआबलीयसाधिकरण
त्रयोदश अधिकरणदुर्गलम्भोपायाधिकरण
चतुर्दश अधिकरणऔपनिषदिकाधिकरण
पञ्चदश अधिकरणतंत्रयुक्त्याधिकरण