NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ (निरस्त) परीक्षा, जून 2024 संस्कृत

Total Questions: 100

81. सूचीद्वयमाश्रित्य यथायोग्यं मेलयत -

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. सुधां क्षीरनिधिं मध्नातिI. षष्ठी गोणे
B. भजे शम्भोश्चरणयोःII. कर्मणि द्वितीया
C. हरि भजतिIII. अकथितं च
D. दैत्येभ्यो हरिः अलम्IV. मःस्वस्तिस्वाहाः ......त्यादिसूत्रम्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) A-III, B-I, C-II, D-IV
Solution:सूचीद्वयमाश्रित्य यथायोग्यं मेलनमस्ति-
स्तम्भः १स्तम्भः २
A. सुधा क्षीरेणनिर्मिता मन्नताअकर्तरि च
B. भजे श्यामसुन्दरचरणयोःषष्ठी शेषे
C. हरि भजतिकर्मणि द्वितीया
D. देवयोः हरिः अलम्नमः-स्वस्ति-स्वाहा …… इत्यादिसूत्रम्

पर्युक्तेषु समुचित्तमुत्तरं A-III,B-I, C-II, D-IV अस्ति । 'सुधां क्षीरनिधिं मथ्नाति' वाक्य में अकथितं च सूत्र से सुधां में कर्मसंज्ञा होकर द्वितीया, भजे शम्भोश्चरणयोः में षष्ठी शेषे सूत्र से चरणयोः में षष्ठी विभक्ति, हरि भजति में कर्मणि द्वितीया से द्वितीया विभक्ति तथा दैत्येभ्यो हरिः अलम् में अलम् के कारण नमः स्वस्ति- स्वाहा. ..इत्यादि सूत्र से दैत्येभ्यो में चतुर्थी विभक्ति का विधान हुआ है।

82. सूचीद्वयमाश्रित्य यथायोग्यं मेलयत -

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. जैनेन्द्रव्याकरणम्I. हेमचन्द्रसूरिः
B. शाकटायनव्याकरणम्II. देवनन्दी
C. सिद्धहेमशब्दानुशासनम्III. पाल्यकीर्तिः
D. सारस्वतव्याकरणम्IV. अनुभूतिस्वरूपाचार्यः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A-II, B-III, C-I, D-IV
Solution:
स्तम्भः १स्तम्भः २
A. जैनेन्द्रव्याकरणम्देवनन्दी
B. शाकटायनव्याकरणम्पाल्यकीर्तिः
C. सिद्धहेमशब्दानुशासनम्हेमचन्द्रसूरिः
D. सारस्वतव्याकरणम्अनुभूतिस्वरूपाचार्यः

उपर्युक्तेषु समुचित विकल्पं (b) अस्ति ।

जैनेन्द्र व्याकरण जैन धर्म का व्याकरण है। इसके आचार्य देवनन्दी हैं। यह छठी शताब्दी की रचना है। शाकटायन व्याकरण जैन धर्म का व्याकरण है। इसके आचार्य पाल्यकीर्ति हैं।

ये नौवीं शताब्दी में राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष के शासनकाल में रहते थे। सिद्धहेमशब्दानुशासनम् यह जैन आचार्य हेमचन्द्रसूर या हेमचन्द्र का व्याकरण ग्रन्थ है। ये सभी जैन वैयाकरण हैं। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (b) है।

83. रामायणाश्रितौ ग्रन्थौ इमौ-

A. कुन्दमाला
B. पञ्चरात्रम्
C. प्रतिमानाटकम्
D. दूतवाक्यम्
E. वेणीसंहारः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (c) A, C केवलम्
Solution:रामायणाश्रितौ ग्रन्थौ इमौ कुन्दमाला प्रतिमानाटकम् दौ स्तः । अर्थात् रामायण आश्रित ग्रन्थ कुन्दमाला और प्रतिमानाटक ये दो हैं।

कुन्दमाला-रामायण उत्तरकाण्ड पर आश्रित दिङ्ग द्वारा रचित छः अड्चों का नाटक है।
प्रतिमानाटक रामायण पर आश्रित भास द्वारा प्रणीत सात अड्डों का नाटक है।
पञ्चरात्रम्-तीन अड्डों में निबद्ध महाभारताश्रित भास का नाटक है।
दूतवाक्यम्- महाभारताश्रित भास का एकाङ्की नाटक है।
वेणीसंहार - महाभारताश्रित भट्टनारायण का छः अङ्कीय नाटक है। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (c) है।

84. ब्रह्मणो जिज्ञासा ब्रह्मजिज्ञासा इत्यत्र षष्ठी भवति-

Correct Answer: (d) कर्मणि
Solution:ब्रह्मणा जिज्ञासा ब्रह्मजिज्ञासा इत्यत्र षष्ठी कर्मणि अर्थ भवति। अर्थात् ब्राह्मणः जिज्ञासा ब्रह्मजिज्ञासा यहाँ पर षष्ठी कर्म अर्थ में होता है।

ब्रह्मजिज्ञासा में षष्ठी तत्पुरुष समास है। ब्रह्मणः इति कर्मणि षष्ठी न शेषे, अर्थात् ब्रह्मणः में कर्म अर्थ में कर्तृकर्मणोः कृतिः सूत्र से षष्ठी का विधान हुआ है शेषे षष्ठी सूत्र से नहीं। अतः ब्रह्म को जानने की जिज्ञासा ही ब्रह्मविज्ञासा होती है।

अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (d) है।

85. विश्वपाशब्दस्य द्वितीयाबहुवचने किं रूपम्?

Correct Answer: (b) विश्वपः
Solution:विश्वपाशब्दस्य द्वितीयाबहुवचने विश्वपः रूपं भवति । अर्थात् विश्वपाशब्द का द्वितीया बहुवचन में 'विश्वपः'रूप होता है।
स्तम्भः १स्तम्भः २स्तम्भः ३
विषयःविषयौविषयाः
विषयम्विषयौविषयान्
विषयेणविषयाभ्याम्विषयैः
विषयायविषयाभ्याम्विषयभ्यः
विषयात्विषयाभ्याम्विषयभ्यः
विषयस्यविषययोःविषयानाम्
विषयेविषययोःविषयेषु
हे विषय!हे विषयौ!हे विषयाः!

86. वर्णावरोहक्रमेण छन्दसां क्रमं चिनुत-

A. द्रुतविलम्बितम्
B. वसन्ततिलका
C. मन्दाक्रान्ता
D. मालिनी
E. अनुष्टुप्

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (d) C, D, B, A, E
Solution:वर्णावरोहक्रमेण छन्दसां क्रमं अस्ति-

मन्दाक्रान्ता - मालिनी - वसन्ततिलका - द्रुतविलम्बितम् - अनुष्टुप् अवरोह क्रम अर्थात् घटता हुआ क्रम ।

वर्णछन्दलक्षण
8अनुष्टुप्श्लोके षष्ठं गुरु ज्ञेयं सर्वत्र लघु पञ्चमम्। द्विचतुः पदयोः ह्रस्वं सप्तमं दीर्घमन्ययोः ।।
15मालिनीननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकैः ।
14वसन्ततिलकाउक्ता वसन्ततिलका तभजा जगौ गः ।
17मन्दाक्रान्तामन्दाक्रान्ताम्बुधिरसनगैर्मी भनौ तौ गयुग्मम्।
12द्रुतविलम्बितद्रुतविलम्बितमाह नभौ भरौ।

87. सूचीद्वयमाश्रित्य समुचितं मेलयत

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. प्रियेषु सौभाग्यफला हि चारुताI. वसन्ततिलकम्
B. क्लेशः फलेन हि पुनर्नवतां विधत्तेII. वंशस्थम्
C. किमपि किमपि मन्दं मन्दमासत्तियोगात्III. इन्द्रवज्रा
D. विश्लेषदुःखादिव बद्धमौनम्IV. मालिनी

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (b) A-II, B-I, C- IV, D-III
Solution:सूचीद्वयमाश्रित्य समुचितं मेलनमस्ति-
स्तम्भः १स्तम्भः २
A. प्रियेषु सौभाग्यफला हि चारुतावंशस्थम्
B. क्लेशः फलेन हि पुनर्नवतां विधत्तेवसन्ततिलकम्
C. किमपि किमपि मन्दं मन्दमासत्तियोगात्मालिनी
D. विश्लेषदुःखादिव बद्धमौनम्इन्द्रवज्रा

उपर्युक्तेषु विकल्पेषु समुचित विकल्पं (b) A-II, B-I, C-IV, D-III
वंशस्थ जतौ तु वंशस्थमुदीरितं तु जरौ। जगण, तगण, जगण, रगण।
वसन्ततिलका उक्ता वसन्ततिलका तभजा जगौ गः- तगण, भगण, दो जगण तथा दो गुरु वर्ण।
मालिनी-ननमयययुतेयम् मालिनी भोगिलोकैः। नगण, नगण, मगण, मगण, यगण वर्ण हैं।
इन्द्रवज्रा-स्यात् इन्द्रवज्रा यदि तो जगौ गः ।
दो तगण एक जगण और दो गुरु वर्ण हैं।
गणसूत्र-यमाताराजभानसलगा।

88. अधोलिखितविकृतीनां क्रमं चिनुत

A. माला
B. ध्वजः
C. रेखा
D. जटा
E. शिखा

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (a) D, A, E, C, B
Solution:उपर्युक्तेषु समुचित क्रममस्ति-

जटा माला शिखा रेखा ध्वजः ।
वेदों की अक्षुणता को बनाये रखने के लिए महर्षियों ने आठ विकृतियों का उल्लेख किया है, जो क्रम से इस प्रकार है-

जटा माला शिखा रेखा ध्वजो दण्डो रथो घनाः ।
अष्टी विकृतयः प्रोक्नाः क्रमपूर्वा महर्षिभिः ।।
अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (a) सही है।

89. सूचीद्वयमाश्रित्य समुचितं मेलयत-

स्तम्भः १स्तम्भः २
A. व्यवसायेनैव ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृहते इतिI. नैयायिकः
B. अनुव्यवसायेनैव ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इतिII. कुमारिलभट्टः
C. ज्ञाततालिङ्‌ कानुमित्या ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इतिIII. मुरारिमिश्रः
D. सफलप्रवृत्तिजनकत्वहेतुना ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इतिIV. प्राभाकरः

अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत- 

Correct Answer: (c) A-IV, B-III, C-II, D-I
Solution:सूची द्वयमाश्रित्य समुचितं मेलमस्ति -

A. व्यवसायेनैव ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इति - (IV) प्रभाकराः
B. अनुव्यवसायेनैव जानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इति - III.मुरारिमिश्राः
C.ज्ञाततालिङ्कानुमित्या ज्ञानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इति II. कुमारिलभट्टाः
D.सफल प्रवृत्तिजनकत्वहेतुना जानस्य प्रामाण्यं गृह्यते इति नैयायिकः

अतः उपर्युक्तेषु विकल्पेषु समुचितविकल्पम् (c) A-IV, B-III, C-II, D-I अस्ति

90. पररूपसन्धेः एतदुदाहरणद्वयम-

A. प्रार्च्छति
B. शिवेहि
C. हरेऽव
D. प्रेजते
E. गवेन्द्रः

 अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (b) B, D केवलम्
Solution:पररूपसन्धेः एतदुदाहरणद्वयम् - 'शिवेहि, प्रेजते' स्तः ।

अर्थात् पररूपसन्धि के ये दो उदाहरण शिवेहि और प्रेजते हैं।

'शिव + एहि' ओमाङोश्च सूत्र से पररूप सन्धि का विधान होकर शिवेहि रूप बना।
प्रेजते - प्र + एजते एङि पररूपम् सूत्र से पररूप का विधान होकर प्रेजते रूप बनता है।
हरे + अव - पूर्वरूप आदेश होकर 'हरेऽव' बना।
प्रार्च्छति = प्रा + ऋच्छति उपसर्गादृति धातौ सूत्र से वृद्धि सन्धि होकर प्रार्च्छति रूप बना है।
गवेन्द्रः = गो इन्द्रः 'इन्द्रे च' सूत्र से अव आदेश होकर गवेन्द्रः बना है। अतः प्रश्नानुसार समुचित विकल्प (b)है।