Solution:वह अनुसंधान अभिकल्प जिसमें या तो अनुसाधानकर्ता को या प्रतिभागी को प्रतिभागी के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में जानकारी नहीं होती है, वह सिंगल ब्लांइड स्टडी कहलाता है।
• इसमें एक या अधिक श्रेणी के लोगों को यह नहीं पता होता है कि प्रयोग का विषय क्या है।
• वह अनुसंधान जिसमें अनुसंधानकर्ता और प्रतिभागी दोनों इस बात से अनजान होते हैं कि कौन स्वतंत्र चर प्राप्त कर रहा है और कौन नहीं, वह डबल ब्लाइंडस्टडी कहलाता है।
• हॉफ ब्लाइंड स्टडी (Blind Study) एक शोध विधि है जिसमें शोध के परिणाम में आने वाले मानवीय पूर्वाग्रह (bias) को खत्म करने के लिए प्रतिभागियों, शोधकर्ताओं या दोनों को यह जानकारी नहीं दी जाती कि उन्हें कौन सा उपचार (treatment) या समूह (group) मिला है।
• डबल ब्लाइंड स्टडी (Double-Blind Study) एक शोध विधि है जिसमें न तो अध्ययन में भाग लेने वाले व्यक्ति (प्रतिभागी) और न ही शोधकर्ता को यह पता होता है कि किसे असली उपचार (treatment) मिल रहा है और किसे प्लेसीबो (placebo) या कोई और हस्तक्षेप मिल रहा है, जब तक कि अध्ययन समाप्त न हो जाए।