Solution:सर चार्ल्स वुड ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' के अध्यक्ष थे। उन्होंने भारत की भावी शिक्षा के लिये एक विस्तृत योजना बनाई और भारत के तत्कालीन गर्वनर जनरल डलहौजी को 1854 में अपना सुझाव पत्र भेजा, जिसे 'वुड का घोषणापत्र' या 'बुड्स डिस्पैच' कहा गया। इसे भारतीय शिक्षा का महाधिकार-पत्र (मैग्नाकार्टा) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पहला इतना व्यवस्थित, संतुलित, विस्तृत व बहुआयामी शिक्षा प्रस्ताव था जिसने ब्रिटिश शासन की शिक्षा नीति को दिशा दी।
• भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम 1904 (Indian Universities Act 1904) कर्जन द्वारा भारत में विश्वविद्यालय शिक्षा पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाने और उसे पुनर्गठित करने के लिए लाया गया था, जिसने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कम की, सीनेट के आकार को छोटा किया और शिक्षण व अनुसंधान में सुधार के लिए सरकारी निरीक्षण और धन का प्रावधान किया, हालाँकि राष्ट्रवादियों ने इसे दमनकारी कदम बताया था, जैसे कि गोपाल कृष्ण गोखले ने इसे "राष्ट्रीय शिक्षा को पीछे ले जाने वाला" कहा था।
• हंटर आयोग प्रतिवेदन (Hunter Commission Report) मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण रिपोर्टों से जुड़ा है: 1882 का शिक्षा आयोग जिसने प्राथमिक शिक्षा के सुधार और विस्तार की सिफारिश की, और 1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड जांच आयोग जिसने जनरल डायर के कार्यों की आलोचना की लेकिन मार्शल लॉ को सही ठहराया, जिससे भारतीयों ने अलग अल्पसंख्यक रिपोर्ट पेश की, जो ब्रिटिश रिपोर्ट से भिन्न थी।
• सार्जेंट योजना (Sargent Scheme) भारत की स्वतंत्रता से पहले 1944 में ब्रिटिश-भारतीय सरकार द्वारा तैयार की गई एक महत्वपूर्ण शिक्षा योजना थी, जिसका मुख्य लक्ष्य भारत में शिक्षा और साक्षरता का विस्तार करना था।