कोई भी कारूणिक (दुखांतक) अभिनेता मूर्ख नहीं है। कुछ हास्य अभिनेता मूर्ख नहीं है। इसलिए कुछ हास्य अभिनेता दुखांतक अभिनेता नहीं है। उपरोक्त युक्ति में व्यावर्तक आंधार दोष या व्यावर्तक परिसर हेत्वाभास है। व्यावर्तक आधार दोष एक औपचारिक त्रुटि है जो एक स्पष्ट न्यायशास्त्र में होती है और भ्रामक होती है
• अस्तित्वपरक तर्कदोष (Existential Fallacy) एक तार्किक भूल है जहाँ दो सार्वभौमिक आधार वाक्यों (universal premises) से एक विशिष्ट निष्कर्ष (particular conclusion) निकाला जाता है, यह मानते हुए कि जिन चीज़ों के बारे में बात की जा रही है, वे वास्तव में मौजूद हैं, जबकि आधार वाक्यों में ऐसा कोई अस्तित्व साबित नहीं होता; जैसे "सभी यूनिकॉर्न जादुई होते हैं। कोई यूनिकॉर्न नहीं हैं। इसलिए, कुछ यूनिकॉर्न जादुई नहीं हैं।" - यह गलत है क्योंकि यह मान लेता है कि 'यूनिकॉर्न' मौजूद हैं, जो आधार वाक्यों से सिद्ध नहीं होता।
• 'हेतु वाक्य निषेध दोष' का अर्थ है किसी कार्य के होने का कारण (हेतु) बताते हुए ही उसे न होने (निषेध) का बोध कराना, जो कि एक तार्किक दोष (Logical Fallacy) है, जैसे "वह इसलिए नहीं पढ़ रहा है क्योंकि वह पढ़ना ही नहीं चाहता" (यानी पढ़ने की इच्छा न होना ही न पढ़ने का कारण है), जो एक तरह से 'कारण का निषेध' है।
• फलवाक्य विधान दोष (Fallacy of Affirming the Consequent) एक तार्किक भ्रम (logical fallacy) है, जो तब होता है जब कोई व्यक्ति यह गलत धारणा बना लेता है कि यदि किसी सशर्त कथन (यदि P, तो Q) का परिणाम (Q) सत्य है, तो उसका कारण (P) भी निश्चित रूप से सत्य होगा, जबकि ऐसा होना ज़रूरी नहीं है, क्योंकि Q के सत्य होने के कई और कारण हो सकते हैं।