Solution:एक ज्ञान मीमांसीय स्थिति जो सामाजिक वास्तविकता और उसके परे के अध्ययन के लिए प्राकृतिक विज्ञान के तरीकों के आवेदन की वकालत करती है, प्रत्यक्षवाद को संदर्भित करती है। प्रत्यक्षवादी कान्ट के चिन्तन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है जिसके द्वारा वो समाजशास्त्रीय अध्ययन को एक वैज्ञानिक रूप देने का प्रयत्न किया। साधारण शब्दों में प्रत्यक्षवाद, समाज एवं सामाजिक जीवन को प्रत्यक्ष प्रमाणों के आधार पर देखने और समझने का सिद्धान्त है।
• व्याख्यावाद (Interpretivism) समाजशास्त्र और अनुसंधान का एक दृष्टिकोण है जो मानता है कि सामाजिक वास्तविकता को समझने के लिए व्यक्तियों के व्यक्तिपरक अर्थों, अनुभवों और इरादों को समझना महत्वपूर्ण है, जो इसे प्रत्यक्षवाद (Positivism) से अलग करता है, जो सामाजिक घटनाओं को वस्तुनिष्ठ रूप से मापना चाहता है।
• वस्तुनिष्ठवाद (Objectivism) एक दार्शनिक सिद्धांत है जो बाहरी दुनिया की वास्तविकता और वस्तुनिष्ठ ज्ञान के महत्व पर जोर देता है, जिसमें व्यक्तिपरक भावनाओं या विश्वासों के बजाय तर्क और तथ्य केंद्रीय होते हैं।
• सकारात्मकतावाद (Positivism) एक दार्शनिक सिद्धांत है जो मानता है कि केवल अनुभवजन्य (empirical) साक्ष्य और वैज्ञानिक पद्धति से प्राप्त ज्ञान ही विश्वसनीय है, जो अवलोकन और प्रयोगों पर आधारित होता है।