Solution:गैर-शाब्दिक संचार में संदेश शब्दों के बिना प्रसारित होता है। यह सभी वक्ता के शारीरिक हाव-भाव के बारे में है और शब्दों का उपयोग नहीं करता है। इसकी कोई संरचना, योजना, डिजाइन या स्वरूप नहीं होता है यह यांत्रिक के बजाय स्वतः स्फूत होता है। शारीरिक मुद्रा, आँखों के संपर्क, मनःस्थिति, चाल, पोशाक, हाव-भाव, अवस्था आदि इसके उदाहरण है।