Solution:पूर्ववृत्त या हेतुवाक्य को नकारना, जिसे कभी-कभी व्युतक्रम त्रुटि या व्युतक्रम की भ्रांति भी कहा जाता है। यह मूल कथन से व्युतक्रम का अनुमान लगाने की एक औपचारिक भ्रांति है। उपरोक्त कथन में हेतुवाक्य निषेध दोष है।
• हेतु वाक्य निषेध (निषेधवाचक वाक्य) वे वाक्य होते हैं जो किसी कार्य के न होने, करने से मना करने या किसी बात के निषेध (रोक) का बोध कराते हैं, जिनमें 'नहीं', 'न', 'मत', 'कभी नहीं' जैसे शब्दों का प्रयोग होता है, जैसे 'वह नहीं आएगा' या 'धूम्रपान करना निषेध है'
• अस्तित्वपरक तर्कदोष (Existential Fallacy) एक आकारिक तर्कदोष (Formal Fallacy) है, जिसमें एक ऐसे निष्कर्ष पर पहुँचा जाता है जो अस्तित्व (existence) की पुष्टि करता है, जबकि उसके आधारवाक्य (premises) अस्तित्वगत नहीं होते; यह तब होता है जब सार्वभौमिक (universal) आधारवाक्यों से एक विशिष्ट (particular) निष्कर्ष निकाला जाता है, जैसे "सभी X, Y हैं" से "कुछ X, Y हैं" निकालना, जबकि X के अस्तित्व की पुष्टि नहीं होती, जिससे यह मान लिया जाता है कि वे वस्तुएँ मौजूद हैं जिनके बारे में बात की जा रही है (जैसे 'एकश्रृंगी')
• व्यावर्तक आधारवाक्य (Differentiating Premise) तर्कशास्त्र और भाषाविज्ञान में एक ऐसी अवधारणा है जो 'व्यावर्तक' (अलग करने वाला/भेदक) लक्षणों के आधार पर स्वनिमों (ध्वनियों) या वाक्यों के बीच अंतर करने वाले आधारवाक्य को दर्शाता है
• फलवाक्य-विधान दोष (Affirming the Consequent)यह दोष तब होता है जब हम किसी "यदि-तो" (If-Then) वाले कथन में 'फल' (Consequent) के सच होने से उसके 'कारण' (Antecedent) को सच मान लेते हैं।
• उदाहरण:
→ कथन: "यदि बारिश होगी, तो जमीन गीली होगी।
→ "तथ्य: "जमीन गीली है।
→ "गलत निष्कर्ष: "अतः, निश्चित रूप से बारिश हुई है।
→ "दोष क्यों है? क्योंकि जमीन गीली होने के अन्य कारण भी हो सकते हैं (जैसे किसी ने पानी छिड़का हो)। केवल फल (जमीन का गीला होना) को देखकर कारण (बारिश) को अनिवार्य मान लेना ही 'फलवाक्य-विधान दोष' है।