Solution:1992 में रियो द जनेरियो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण व विकास सम्मेलन पृथ्वी शिखर सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है। रियो सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए। इसमें एजेंडा-21 के रूप में विकास के तौर तरीके सुझाए गए। इससे सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि का तरीका ऐसा होना चाहिए कि इसके पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे जिसे 'टिकाऊ विकास' कहा गया।
• ओजोन शिखर सम्मेलन (Ozone Summit) का तात्पर्य मुख्य रूप से ओजोन परत के संरक्षण के लिए 1985 के वियना सम्मेलन (Venna Convention) और उसके बाद 1987 में हुए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (Montreal Protocol) से है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों (ODS) को खत्म करने के लिए वैश्विक रूपरेखा तैयार करते हैं; इन सम्मेलनों का उद्देश्य ओजोन परत के क्षरण को रोकना और इसके प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है, जिसे विश्व ओजोन दिवस (World Ozone Day) 16 सितंबर को मनाया जाता है।
• मानव पर्यावरण पर सम्मेलन (UN Conference on the Human Environment) 1972 में स्टॉकहोम, स्वीडन में आयोजित हुआ था, जो पर्यावरण को वैश्विक चिंता का विषय बनाने वाला पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की स्थापना हुई और 'सिर्फ एक पृथ्वी' (Only One Earth) के नारे के साथ सतत विकास की नींव रखी गई. इस सम्मेलन ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए सिद्धांतों और कार्य योजना को अपनाया और 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में स्थापित किया।
• आर्द्रभूमि पर सम्मेलन का तात्पर्य आमतौर पर रामसर कन्वेंशनसे है , जो आर्द्रभूमि संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक अंतर-सरकारी संधि है। इसकी स्थापना ईरान के रामसर में (1971) हुई थी और नीति निर्धारण के लिए इसे हर तीन साल में संविदाकारी पक्षों के सम्मेलन (सीओपी) के रूप में आयोजित किया जाता है । इसका सबसे हालिया सम्मेलन (सीओपी 15) जुलाई 2025 में विक्टोरिया फॉल्स में हुआ था।