निचले शोभमण्डल में कतिपय प्रक्रियाएं ऊंचाई के साथ तापमान में वास्तविक वृद्धि करती है, वह है, तापमान का व्युत्क्रमण । तापमान व्युत्क्रमण पाँच तरीको से उत्पन्न हो सकते हैं।
जब पृथ्वी की सतह ऊर्जा स्थानान्तरण के किन्ही प्रक्रमों द्वारा प्राप्त ऊष्मा की तुलना में विकिरण द्वारा ऊष्मा की हानि अधिक करती है, जैसे एक स्वच्छ रात में या शीत ऋतु में उच्च अक्षाशों पर, यह ठण्डी होती है
तथा परिणामस्वरूप संलग्न वायु की परत का तापमान कम करती हैं। विकिरणात्मक शीतलन के कारण व्युत्क्रमण (विकिरण व्युत्क्रमण) शांत वायु, स्वच्छ आकाश की दशा में समतल भूभाग पर सर्वोत्तम विकसित होते हैं।
(2) ठण्डी तथा सघन वायु गिरि शिखरों तथा ढालों से ढाल के साथ नीचे की ओर प्रवाहित होकर घाटी तलहटियों में एकत्रित होती है, यह घाटी तल के ऊपर मुक्त वायु में व्युत्क्रमण ह्रास दर उत्पन्न करती है।
वायु अपवाह व्युत्क्रमण प्रायः मध्य अक्षाशों में बसन्त ऋतु के पालों से संबंधित होते हैं, एवं इसी कारण फल उत्पादक फलोधान स्थल हेतु घाटी तलहटियों की बजाय मन्द ढालों को वरीयता देते हैं।
(3) जब भिन्न तापमान विशेषताओं वाली दो वायुराशियाँ आपस में मिलती है तब ठण्डी वायु अधिक घनत्व के कारण गर्म वायु को नीचे से धकेलते हुए उसे प्रतिस्थापित करती है। दो वायु राशियों के मिलन सीमा क्षेत्रों को वाताग्र कहते हैं,
तथा व्युत्क्रमित ह्रास दर फलस्वरूप वाताग्र व्युत्क्रमण होता है। वाताग्र व्युत्क्रमण क्षोभमण्डल की निचली परतों तक सीमित नहीं होते हैं। वे ऊपरी स्तरों में जब भी ठण्डी वायु गर्म वायु के नीचे प्रवेश या गर्म वायु का ठंडी वायु के ऊपर आगे बढ़ने से निर्मित हो सकते हैं।
(4) गर्म वायु के ठण्डे धरातल पर अभिवहन से वायु राशि की निचली परतों में व्युत्क्रमण निर्मित होता है क्योंकि गर्म वायु संचालन द्वारा ठण्डी होती है।
(5) जब एक विस्तृत वायु अवतलित होती है एवं नीचे को परत पर फैल जाती है तब एक वायु राशि में अवतलन व्युत्क्रमण विकसित होता है। इस प्रक्रिया में वायु आधार की तुलना में ऊपरी भाग में गतिशीलता प्रभाव से अधिक गर्म हो जाती है। इस प्रकार के व्युत्क्रमणों का विकास काफी ऊंचाईयों पर होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी एक विकिरण व्युत्क्रमण के लिए आदर्श दशा नहीं हैं?
Correct Answer: (a) छोटी रातें
Solution:विकिरण व्युत्क्रमण के लिए आदर्श दशओं में स्वच्छ आकाश तथा बादल रहित आकाश, समतल धरातल, वायुमण्डल शान्त तथा स्थिर होना, धरातल के पास शुष्क हवा होना आवश्यक है ताकि पार्थिव विकिरण का आधिक अवशोषण न हो सके।
इसके अलावा जाड़े की रातें लम्बी होनी चाहिए ना कि छोटी क्योंकि बहिर्गामी पार्थिव विकिरण आधिक सक्रिय हो सके, जिस कारण प्राप्त ऊष्मा से नष्ट ऊष्मा अधिक हो जाये और धरातल का तापमान ऊपर से कम हो जाये।