Solution:रैले प्रकीर्णन के कारण ही आकाश का रंग नीला प्रतीत होता है। रैले प्रकाश के इस प्रकीर्णन को पहली बार 19वीं सदी के लार्ड रैले नामक ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी ने वर्ष 1871 में देखा था। यह प्रकीर्णन गुणांक तरंग दैर्ध्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
दृश्य प्रकाश में नीले रंग की तरंग दैर्ध्य का मान सबसे कम तथा लाल रंग का सबसे अधिक होता है। माई प्रकीर्णन, जब विकिरण तरंग दै का मान प्रकीर्णन करने वाले कणों के आकार के बराबर होता है तब भी प्रकीर्णन प्रतीत होता है। वायुमण्डल में विद्यमान जल-वाष्प तथा धूलिकण इस प्रकीर्णन के मुख्य कारण हैं।
गैर चयनात्मक प्रकीर्णन अवरणात्मक प्रकीर्णन, जब प्रकीर्णन करने वाले कणों का आकार, विकिरण तरंग दैर्ध्य करने वाले कणों से बहुत अधिक होता है तब अवरणात्मक या अचुनिन्दा प्रकीर्णन सम्भव होता है।
इस प्रकार का प्रकीर्णन तरंग दैर्ध्य पर निर्भर नहीं करता है। उदाहरण के लिए जल बूँदें तथा धूलकण जिनका आकार सामान्यतः 5 से 10um तक होता है, विकिरण का अवरणात्मक प्रकीर्णन करती हैं
क्योंकि इनमें दृश्य प्रदेश से अवरक्त प्रदेश के परावर्तित अवरक्त बैंड तक के सभी तरंग दैर्ध्य पर समान प्रतीत होता है। अतः विकल्प (a) सही है।