Solution:पार्थासारथी द्वारा 'ट्राइंग टू सोल्व द मानसून रिडल' नामक निबंध में मानसून प्रक्रिया के सम्बंध में लिखा। हालाँकि मानसून का उल्लेख हमारे पुराने ग्रंथों जैसे ऋग्वेद और कई ग्रीक और बौद्ध विद्वानों के लेखन में किया गया है,
लेकिन मानसूनी हवाओं के पहले वैज्ञानिक अध्ययन का श्रेय अरबों को जाता है। 1686 में प्रसिद्ध अंग्रेज सर एडमंड हैली ने मानसून को महाद्वीपों और महासागरों के बीच उनके अलग-अलग ताप के कारण थर्मल विरोधाभासों के परिणामस्वरूप बताया।
तदनुसार हैली ने मौसम के आधार पर गर्मी और सर्दी के मानसून की कल्पना की। के.एन. राव., सी.जे. जार्ज एवं के. एस. रामाशास्त्री ने थार्नथ्वेट की नवीनतम तकनीक के आधार पर भारत की जलवायु के विभाजन का प्रयास किया।
इसमे पेनमन के सूत्र द्वारा परिकलित वाष्पन-वाष्पोत्सर्जन मानों और मृदा प्रकार एवं शस्य विविधता के अनुसार उपलब्ध जल क्षमता को वर्गीकरण का आधार बनाया।