Solution:प्राकृतिक 'प्रकोप पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित करने के लिए पृथ्वी की नैसर्गिक प्रणाली के त्पाद हैं। ये प्राकृतिक प्रक्रियाओं के भाग हैं, जब इनकी आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि से तबाही. होने लगती उदै भूकंप, सुनामी, बाढ़, चक्रवात, सूखा, भूस्खलन आदि।
नदी, झील था सागर तल के उत्थान के कारण भूमि के अस्थाई' तौर पर अप्लावन को बोल. कहते हैं। राष्ट्रीय बाढ़ कमीशन में भारत में 40 मिलियन हेक्टेवर क्षेत्र को बाढ़ की आशंका वाला चिह्नित किया है।
भूस्खलन, गुरुत्व के कारण ढाल के सहारे शैल, मिट्टी और वनस्पति का 'तेजी से होने वाला प्रवाह है। भूस्खलन तथा हिमस्खलन बड़े हाइड्रो जियोलॉजिकल खतरों में आते हैं. जी हिमालय पर्वतों की पूर्वोत्तर श्रेणी, पश्चिमी घाट, नीलगिरि, पूर्वी घाट तथा विध्याचल जो भारतीय भू-भार्ग के 15% हिस्सा हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान ने भारतें को 5 भूकंपीय क्षेत्रों में बाँटा था। वर्तमान में भारत के भूकंपी जोन एवं II को एक में समाहित कर अब जोन-II में विभक्त कर दिया है। इस प्रकार अब देश को 4 भूकंपीय क्षेत्रों में विभक्त कर दिया गया है।
मुंबई और कोलकाता की अपेक्षा.तूतीकोरिन कम, संवेदनशील जोन में स्थित है। तूतीकोरिन न्यूनतम प्रभाव का क्षेत्र (Zone-II) में स्थित है। 26 दिसंबर, 2004 का सुनामी ओडिशा में जान और माल की बहुत अधिक हानि में परिणीत हुआ। अतः स्पष्ट है कि कथन (A) सत्य है तथा अन्य कथन असत्य हैं।