NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2023 भूगोल

Total Questions: 100

81. परिस्थितिकी तंत्र की सीमा के आर-पार परिवर्तनशील आर-पार दशाओं को प्रदर्शित करने वाले इकोक्लाइन अध्ययन को के रूप में जाना जाता है।

Correct Answer: (c) प्रवणता विश्लेषण
Solution:

परिस्थितिकी तंत्र की. सीमा के आर-पार परिवर्तनशील दशाओं को प्रदर्शित करने वाले इकोक्लाइन अध्ययन को प्रवणता विश्लेषण के रूप में जाना जाता है। किसी भी पारिस्थितिक तंत्र या आवास में वनस्पति के एक समुदाय के दूसरे समुदाय द्वारा प्रतिस्थापन को अनुक्रमण कहते हैं।

जब किसी आवास वनस्पति प्रावस्थाओं से गुजरने के बाद स्थिर दशा को प्राप्त हो जाता है, तो क्रमक पूर्ण हो जाता है। इस दशा में पादपों का सर्वाधिक विकास हो जाता है। इसे चरम समुदाय कहते हैं।

82. 2011 में बोलने वालों की कुल संख्या के आधार पर अधिसूचित भारतीय भाषाओं में_______चतुर्थ क्रम पर थी।

Correct Answer: (d) तेलुगू
Solution:

2011 में बोलने वालों की कुल संख्या के आधार पर अधिसूचित भारतीय भाषाओं में तेलुगू चतुर्थ क्रम पर थी। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं का क्रम इस प्रकार है- (i) हिंदी (52.83 करोड़ लोग), (ii) बांग्ला (9.72 करोड़ लोग), (iii) मराठी (8.30 करोड़ लोग), (iv) तेलुगू (8.11 करोड़ लोग), (v) तमिल (6.90 करोड़ लोग)।

83. बहु नाभिक मॉडल में निम्नलिखित में से कौन-सा खण्ड नगर से सतत नहीं होता तथा बाह्या सीमांत में एकाकी रूप में विकसित होता है।

Correct Answer: (d) आवासीय उपनगर
Solution:

बहु नाभिक मॉडल में आवासीय उपनगर खंड नगर से सतत नहीं होता तथा बाह्य सीमांत में एकाकी रूप में विकसित होता है। नगरीय भूमि के उपयोग के संबंध में हैरिस और उलमैन ने अपने एक लेख द्वारा बहु नाभिक सिद्धांत का प्रतिपादन किया।

उन्होंने सुझाव दिया कि बहुत से नगरों में भूमि उपयोग प्रतिरूप किसी एक केंद्र के चारों ओर नहीं बल्कि अनेक अलग-अलग केंद्रों या नाभिकों के चतुर्दिक निर्मित होता है। हैरिस और उलमैन के अनुसार अमेरिकी नगरों के चारों ओरं कई प्रकार के भूमि उपयोग क्षेत्र विकसित होते हैं। ये कार्यात्मक क्षेत्र निम्नलिखित हैं-
1. केंद्रीय व्यापार क्षेत्र
2. थोक व्यापार एवं हल्के औद्योगिक क्षेत्र
3. निम्न वर्गीय आवासीय क्षेत्र
4. मध्यम वर्गीय आवासीय क्षेत्र
5. उच्चवर्गीय आवासीय क्षेत्र
6. भारी औद्योगिक क्षेत्र
7. बहिर्वतीं व्यापार क्षेत्र
8. आवासीय उपनगर
9. औद्योगिक उपनगर

84. निम्न उद्योग अवस्थिति सिद्धांतों को कालानुक्रमानुसार व्यवस्थित करें।

A. अल्फ्रेड वेबर का सिद्धांत
B. एलन प्रेड का सिद्धांत
C. एडगर हूवर का सिद्धांत
D. वाल्टर आईजार्ड का सिद्धांत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

Correct Answer: (b) A, C, D, B
Solution:

उद्योग अवस्थिति सिद्धांतों का कालानुक्रमानुसार इस प्रकार है-
(i) अल्फ्रेड बेबर का सिद्धांत (1909)
(ii) एडगर हुवर का सिद्धांत (1937)
(iii) वाल्टर आईजार्ड का सिद्धांत (1956)
(iv) एलन प्रेड का सिद्धांत (1967)

उद्योगों के स्थानीयकरण के संदर्भ में प्रतिपादित सिद्धांतों में अल्फ्रेड वेबर का प्रयास सर्वप्रथम है। अल्फ्रेड वेबर एक जर्मन अर्थशास्त्री थे जिन्होंने उद्योगों की अवस्थिति का सिद्धांत प्रतिपादित किया

जिसका प्रकाशन 1909 में जर्मन भाषा में लिखित पुस्तक 'अबर डेन स्टान्डोर्ट डेर इंडस्ट्रियन' में प्रकाशित हुआ। इसका अंग्रेजी अनुवाद 1929 में Theory of Location of Industries' शीर्षक से हुआ। वेबर के अनुसार किसी उद्योग के स्थानीकरण को परिवहन लागत, श्रम लागत तथा एकत्रीकरण के लाभ निर्धारित करते हैं।

उनके अनुसार सर्वप्रथम न्यूनतम परिवहन लागत बिंदु का निर्धारण किया जाता है और तत्पश्चात श्रम तथा एकत्रीकरण से प्राप्त लाभ के प्रभाव पर विचार किया जाता है। एडगर हुवर का सिद्धांत (1937 और 1948) वितरित कीमतों पर आधारित था।

किसी भी खरीददार के लिए वितरित कीमतें उत्पादन लागत प्लस परिवहन लागत होंगी।

85. निम्नलिखित दरों के युग्म में कौन-सा सिक्किम में अवस्थित है।

Correct Answer: (b) जेलेप ला तथा नाथू ला
Solution:

जेलेप-ला तथा नाथू ला दरें सिक्किम में अवस्थित हैं। भारत के कुछ प्रमुख दरें इस प्रकार हैं-

राज्यदर्रे
उत्तराखंडनीति, लिपुलेख, माना, मणिरंग, थांग ला
लद्दाखचांगला, खारदुंगला
हिमाचल प्रदेशरोहतांग, शिपकीला, बड़ालाचा
जम्मू-कश्मीरबनिहाल
अरुणाचल प्रदेशबोमडिला, दिफू, तुजु
महाराष्ट्रथालघाट, भोरघाट
केरलपालघाट

86. भौगोलिक विचारधारा में डार्विन के प्रभाव के बारे में कौन-से कथन सही हैं।

A. डेविस के अपरदन चक्र की विचारधारा प्रजातियोंकी उत्पत्ति जिसमें समयानुसार प्रजातियों मेंबदलाव आता है के केन्द्रीय विचार से प्रभावित थी।
B. सिड्डल ने मानव पर पर्यावरण प्रभाव के आकलन में शारीरिक क्रिया विज्ञान के अध्ययन पर बल दिया।
C. डेविस के भू-आकृति विज्ञान में स्थलाकृतियों के विकास में आयु क्रम के जीव विज्ञान की अनुरूपता को अपनाया गया।
D. फलूर ने प्राकृतिक चयन और पर्यावरणीय प्रभावों के विषयों को केन्द्र में रखा।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल A और C
Solution:

डेविस समय के साथ प्रजातियों के क्रमिक और संचयी विकास के बारे में चार्ल्स डार्विन के विचारों से प्रेरित थे। डार्विन से प्रेरणा लेते हुए डेविस ने क्रमिक परिवर्तन पर बल दिया और भूगोल पर विकासवादी विचारों को लागू किया।

यही कारण है कि डेविस के अपरदन चक्र की विचारधारा प्रजातियों की उत्पत्ति जिसमें समयानुसार प्रजातियों में बदलाव आता है तथा डेविस के भू-आकृति विज्ञान में स्थलाकृतियों के विकास में आयु क्रम के जीव विज्ञान की अनुरूपता को अपनाया गया। डेविस का सिद्धांत डार्विन की विचारधारा से प्रभावित थी। अतः कथन (A) और (C) सही है।

87. _______ कृष्णा नदी की सहायक नहीं है।

Correct Answer: (a) मंजरा
Solution:

मंजरा कृष्णा नदी की सहायक नदी नहीं है। मंजरा गोदावरी की सहायक नदी है। कृष्णा पूर्व दिशा में बहने वाली प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी बड़ी नदी है, जो सह्याद्रि में महाबलेश्वर के निकट से निकलती है। इसकी कुल लंबाई 1401 किलोमीटर है।

कोयना, तुंगभद्रा और भीमा इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। गोदावरी सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी तंत्र है। इसे दक्षिण गंगा के नाम से जाना जाता है। यह 1,465 किलोमीटर लंबी नदी है। इसकी मुख्य सहायक नदियों में पेनगंगा, इंद्रावती, प्राणहिता और मंजरा हैं।

88. सही कथनों को पहचानें।

A. बड़े आकार के पेड़ों की घनी जनसंख्या वाले वनों का अर्थ आवश्यक नहीं है कि वन प्राथमिक उत्पादन में भी अधिक दक्ष हैं।
B. उत्पादक का आकार प्राथमिक उत्पादन की दक्षता से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित है।
C. एक पारितंत्र में विकिरित ऊर्जा का नियतन उत्पादन की दक्षता का निर्धारण करता है।
D. शीतोष्ण वनों की कुल प्राथमिक उत्पादकता उष्णकटिबंधीय वनों से अधिक है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त का चयन कीजिए-

Correct Answer: (d) केवल A और C
Solution:

बड़े आकार के पेड़ों की घनी जनसंख्या वाले वनों का अर्थ आवश्यक नहीं है कि वन प्राथमिक उत्पादन में भी अधिक दक्ष है, क्योंकि घने वनों में सौर विकिरण की कम मात्रा प्राप्त होगी। एक पारितंत्र में विकिरण ऊर्जा नियतन उत्पादन की दक्षता का निर्धारण करता है।

जीवमंडल या पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रधान स्रोत सूर्य है। लघु तरंग प्रवेशी सौर्यिक विकिरण का मात्र 51 प्रतिशत भाग धरातल को प्राप्त होता है और इस मात्रा का स्वल्पांश ही पौधों द्वारा उपयोग किया जाता है।

हरे पौधे सौर्यिक ऊर्जा की जितनी मात्रा ग्रहण करते हैं उसका अधिकांश उष्मा ऊर्जा में रूपांतरण हो जाता है और अंततः इस ऊर्जा का पौधों तथा पारिस्थितिक तंत्र से निष्कासन हो जाता है। इस ऊर्जा का अल्पांश ही स्थितिज ऊर्जा या आहार ऊर्जा में रूपांतरित हो पाता है जो पौधों के अवयवों में संचित रहती है।

89. सूर्यातप से संबंधित कथनों पर ध्यान दें।

A. किसी वस्तु द्वारा अपने पर पड़ने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंगों को अपने में समावेशित किया जा सकता है- इस प्रक्रिया को अवशोषण कहा जाता है।
B. विकिरण किसी वस्तु द्वारा विद्युत चुम्बकीय तरंगों का वस्तु या तरंग में परिवर्तन किए बिना प्रतिकर्षण की क्षमता होती है।
C. हवा' में गैस अणु और कण पदार्थ प्रकाश तरंगों को विक्षापित और पुननिर्देशित कर सकती है, जो कि संचरण कहलाता है।
D. उष्मा ऊर्जा का एक अणु से दूसरे अणु में उनकी स्थिति में परिवर्तन किए बिना जाना चालन कहलाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए -

Correct Answer: (d) केवल / A और D
Solution:

किसी वस्तु द्वारा अपने पर पड़ने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों को अपने में समावेशित किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को अवशोषण कहा जाता है। इस तरह अवशोषण द्वारा अवशोषण करने वाले तत्व या वस्तुः का तापमान बढ़, जाता है।

फूलेशी सौर्यिक विकिरण का.अवशोषण वरणात्मक (चयनात्मक) होता है, अर्थात् कुछ विकिरण तरंगों का अवशोषण होता है तथा कुछ का नहीं होता है। अवशोषण की प्रक्रिया जलवाष्प, विभिन्न गैसों, धुंध, धुँआ तथा कतिपय धूलकणों से प्रभावित होता है।

उष्मा ऊर्जा का एक अणु से दूसरे अणु में उनकी स्थिति में परिवर्तन किए बिना स्थानांतरण एवं गमन चालन कहलाता है। चालन क्रिया के अंतर्गत एक अणु स्पर्श द्वारा दूसरे अणु को उष्मा प्रदान करता है।

परिचालन की प्रैक्रिया द्वारा उष्मा का गमन एवं स्थानांतरणं दो रूपों में होता है- (1) एक ही वस्तु के एक भाग से दूसरे भाग में, (2) किसी एक वस्तु से उसके संपर्क में स्थित दूसरी वस्तु में। पदार्थों के द्रव्यमान (Mass) के संचलन (Movement) द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान में उष्मा के स्थानांतरण की प्रक्रिया को संवहन कहते हैं

तथा बिना किसी पदार्थीय माध्यम (ठोस, तरल तथा गैस) के एक वस्तु से दूसरी वस्तु में उष्मा के स्थानांतरण की प्रक्रिया को विकिरण कहते हैं।
अतः स्पष्ट है कि कथन (A) और (D) सत्य हैं।

90. यू.एन.आर.ई.डी.डी + (UN-REDD +) से संबंधित सही कथनों की पहचानें।

A. यह एसडी जी-6 का भाग है।
B. आरईडीडी + को कोप एजेन्डा 2001 में शुरू किया गया था।
C. इसमें का अर्थ वनों से संबंधित जलवायु बचाव की अतिरिक्त गतिविधियों से है।
D. आरईडीडी का अर्थ विकासशील देशों में वनों की कटाई और वनक्षरण से उत्सर्जन कम करना है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-

Correct Answer: (b) केवल C और D
Solution:

यू.एन.आर.ई.डी.डी. + (UN-REDD+) में + का अर्थ वनों से संबंधित जलवायु बचाव की अतिरिक्त गतिविधियों से है तथा आर.ई.डी.डी. (REDD) का अर्थ विकासशील देशों में वनों की कटाई और वनरक्षण से उत्सर्जन कम करना है।

REDD + (Reducing Emission from Deforestation and Degradation +) संयुक्त राज्य मंच के अंतर्गत आरंभ किया गया एक वैश्विक प्रयास है, जिसके अंतर्गत वनों की कटाई को रोकनें, जंगलों के कार्बन स्टॉक का संरक्षण और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के साथ जंगलों का सतत् प्रबंधन करने की प्रक्रिया है।

यह जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) पार्टियों द्वारा विकसित एक तंत्र है। REDD + कार्यक्रम की शुरुआत 24 सितंबर, 2008 से की गयी थी। इसका मुख्यालय जेनेवा (स्विट्जरलैंड) में स्थित है।