NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा (निरस्त), जून-2024 भूगोल

Total Questions: 100

31. मिर्डल के मॉडल के संबंध में सही कथनों की पहचान करें:

A. उसने संचयी कार्योत्पादन सिद्धांत दिया।
B. कुछ वृद्धि केन्द्र तीव्रगति से विकसित होते है तथा शोषण पम्पों के रूप में कार्य करते हैं।
C. वृद्धि केन्द्र के आस पास के क्षेत्र में विकास के प्रसार को पश्चधावन प्रभाव कहा जाता है।
D. वृद्धि केन्द्र के आस पास के क्षेत्रों से सभी सक्रिय तत्वों को खींचने को उपरितरण अवस्था कहा जाता है |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A और B
Solution:

संचयी कार्यात्पादन सिद्धान्त का विकास कार्ल गुन्नार मिडल ने 1957 में किया था। यह सिद्धांत विभिन्न देशों के मध्य और एक ही देश के विभिन्न प्रदेशों के मध्य पाये जाने वाले आर्थिक विकास में क्षेत्रीय भिन्नताओं का निर्धारण करने का प्रयत्न करता है।

कुछ वृद्धि केन्द्र तीव्रगति से विकसित होते है तथा शोषण पम्पों के रूप में कार्य करते है। मिल के अनुसार बाजार शक्तियाँ अंतप्रदेशिक भिन्नताओं को और अधिक गहरा कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप सम्पन्न प्रदेश और अधिक सम्पन्न (धनी) होते जाते हैं और विपन्न या निर्धन प्रदेश और अधिक निर्धन होते जाते हैं।

पृष्ठ प्रक्षालन प्रभाव का आशय सम्पन्न प्रदेशों से उत्पन्न होने वाली उन शक्तियों से है जो अभावग्रस्त पिछड़े क्षेत्रों में विकास को हतोत्साहित करती है। पृष्ठ प्रक्षालन की उत्पत्ति तब होती है जब प्रतिकूल प्रभावों का प्रभुत्व होता है और परिधीय समुदायों में आर्थिक क्रियाओं के स्तर में गिरावट आती है।

संचयी कार्यात्पादन सिद्धांत में मिल ने उल्लेख किया कि निम्नलिखित दो प्रभावों द्वारा प्रगतिशील प्रदेशों में होने वाला विकास पिछड़े प्रदेशों में विकास को प्रभावित करता हैं
(1) प्रसारी या फैलाव प्रभाव (Spread effect)
(2) पृष्ठ प्रक्षालन/ धोवन प्रभाव (Back wash effect)।
अतः विकल्प (a) सही है।

32. अक्षीय तल की स्थिति (के स्थान) के आधार पर निम्नांकित वलनों (फोल्ड) को क्षैतिज से उधर क्रम में व्यवस्थित कीजिए:

A. असममित वलन B. प्रतिवलन C. परिवलन वलन D.सममित वलन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) C, B, A, D
Solution:

अक्षीय तल की स्थिति के आधार पर वलनों का क्षैतिज से ऊर्ध्वाधर क्रम निम्नलिखित है- परिवलन वलन प्रतिवलन → असममित वलन सममित वलन । सममित वलन में दोनों भुजाओं का झुकाव बराबर होता है। यह खुला हुआ वलन होता है।

असममित वलन में दोनों भुजाओं में असमानता पायी जाती है। एक भुजा साधारण झुकाव वाली होती है, जिसका ढाल क्रमशः होता है, जबकि दूसरी भुजा छोटी होती है और इसका झुकाव अधिक होता है। परिवलन परिवलित (श्यान) वलन में जब क्षैतिज संचलन अत्यधिक तीव्र होता है,

तो अत्यधिक संपीडन के कारण इतना अधिक वलन हो जाता है जिससे वलन की दोनों भुजाएँ परस्पर समानान्तर होती हुई क्षैतिज दिशा में मुड़ जाती है।

प्रतिवक्षन में अत्यधिक सम्पीडन के कारण, जब वलन की एक भुजा दूसरे पर उलट जाती है तो उसे प्रतिवलन कहते है। इस प्रकार के वलन की भुजाएँ क्षैतिज अवस्था में नहीं, होती हैं। अतः विकल्प (c) सही है।

33. प्रायद्वीपीय भारत की निम्नांकित पर्वतीय श्रेणियों में सबसे ऊँची चोटी किसकी है?

Correct Answer: (a) पश्चिमी घाट
Solution:

प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी पश्चिमी घाट के अन्नामलाई पर्वत का सर्वोच्च शिखर अनाईमुड़ी (2695 मी.) है। पश्चिमी घाट की लम्बाई लगभग 1600 किमी. है, जो उत्तर में ताप्ती नदी से दक्षिण में कुमारी अंतरीप तक पाया जाता है।

विध्यन श्रेणी उत्तर के विशाल मैदान को शेष प्रायद्वीपीय भारत से अलग करता है। इसका विस्तार लगभग 1050 किमी. में गुजरात के जोबात से बिहार के सासाराम तक है। अरावली श्रेणी की लम्बाई लगभग 800 किमी. है, जो दिल्ली और पालनपुर (गुजरात) के मध्य उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैला हुआ है।

इस श्रेणी की सर्वोच्च शिखर चोटी माउण्ट आबू पर अवस्थित गुरु शिखर (1722 मी.) है। सतपुड़ा श्रेणी का विस्तार पश्चिम में रतनपुर से पूरब में अमरकंटक तक लगभग 900 किमी. है। इस पर्वत श्रेणी की सर्वोच्च श्रेणी महादेव पहाड़ी पर अवस्थित धूपगढ़ 1350 मी. है।

34. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के संदर्भ में सही कथनों की पहचान करें:

A. हरिकेन स्तर के चक्रवातों में हवा की गति कम से कम 119 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।
B. भूमंडलीय तापन की प्रवृत्ति के साथ उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता में कमी आई है।
C. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता अधिक होती है।
D. ये भूमध्यरेखा के नजदीक विकसित नहीं होते और उसे पार नहीं करते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A और D
Solution:

उष्णकटिबन्धीय चक्रवात उत्तरी तथा दक्षिणी गोलार्द्धा में लगभग 5° से 30° अक्षांशों के बीच उत्पन्न होते हैं। भूमध्य रेखा के ऊपर कोरिऑलिस बल का प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए यहाँ वायुदाब कम होते हुए भी पवनें वृत्ताकार रूप में नहीं चलती तथा चक्रवात नहीं बनते और यहाँ चक्रवात विषुवतरेखा को पार नहीं करते हैं। विश्व के विभिन्न भागों में उष्णकटिबन्धीय चक्रवातों को अलगअलग नामों से जाना जाता है।

जैसे उत्तरी अटलांटिक महासागर खासकर कैरेबियन, सागर में तथा दक्षिण-पूर्वी अमेरिका में इन्हें हरिकेन कहते हैं। हरिकेन प्रतिघण्टे 120 किमी. की गति से चलते है।

उत्तरी आंध्र महासागर के दक्षिण तथा दक्षिण-पश्चिम भाग में लगभग 30° उत्तरी अक्षांश के आस-पास उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता अधिक होती है न कि दक्षिणी आंध्र महासागर में। ध्यातव्य है कि भूमंडलीय तापन में वृद्धि के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की बारंबारता में वृद्धि हुई है न कि कमी आई है।

35. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

कोडसूची-I (देश)सूची-II (विशेषता)
Aफ्रांसI. अतिनिम्न शिशु मृत्यु दर
BनाइजरII. उच्च से निम्न जनन क्षमता का पहला अनुभव
Cसियरा लियोनIII. सर्वाधिक कुल प्रजनन दर
DफिनलैंडIV. बहुत उच्च शिशु मृत्यु दर

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) A-II, B-III, C-IV, D-I
Solution:

सही सुमेलित युग्म इस प्रकार है-

सूची-I (देश)सूची-II (विशेषताएँ)
फ्रांसउच्च से निम्न जनन क्षमता अनुभव करने वाला पहला देश
नाइजर सर्वाधिक कुल प्रजनन दर वाला देश
 सियरा लियोनबहुत उच्च शिशु मर्त्यता दर वाला देश
फिनलैंडअतिनिम्न शिशु मर्त्यता दर वाला देश

अतः विकल्प (b) सही सुमेलित है।

36. ज्वार-भाटाओं के उद्‌गम संबंधी निम्नलिखित सिद्धान्तों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए।

A. एयरी का कैनाल सिद्धान्त
B. लाप्लास का गतिक सिद्धान्त
C. हैरिस का स्थैतिक तरंग सिद्धान्त
D. व्हीवेल का प्रगामी तरंग सिद्धान्त
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) B, D, A, C
Solution:

ज्वार भाटा के उद्गम संबंधी सिद्धांतो का सही कालानुक्रम निम्नलिखित है लाप्लास का गतिक सिद्धांत 1755 ई. → हेवेल का प्रगामी तरंग सिद्धांत 1833 ई. एयरी का कैनाल सिद्धांत 1842 ई. हैरिस का स्थैतिक तरंग सिद्धांत 1911 ई.।

ज्वार-भाटा की उत्पत्ति से संबंधित प्रतिपादित परिकल्पनाओं में प्रथम प्रयास सर आइजक न्यूटन द्वारा 1687 ई. में गुरुत्वाकर्षण बल को अपने सिद्धान्त का आधार बना कर किया गया था। अतः विकल्प (a) सही है।

37. हृदय स्थल (हार्टलैंड) के संबंध में सही कथनों की पहचान करें

A. आन्तरिक अर्द्धचंद्राकार में जापान शामिल है।
B. ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण अमेरिका बाह्य अर्द्धचंद्राकार में शामिल किए गए।
C. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात्, मैकिंडर ने विश्व में दो महत्वपूर्ण शक्ति केंद्रों के अस्तित्व को देखा।
D. द्वितीय विश्व युद्ध का परिणाम शक्ति केन्द्र से शक्ति शून्यता की ओर परितर्वन था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल B और C
Solution:

हाफोर्ड जान मैकिण्डर एक ब्रिटिश भूगोलवेत्ता तथा राजनयिक थे। मैकिण्डर ने विश्व के मानचित्र पर सम्पूर्ण भूमंडल को तीन कटिबंधों में वर्गीकृत किया (1) धुरी क्षेत्र (2) आंतरिक या उपांतीय अर्द्ध चन्द्राकार क्षेत्र (3) बहिर्वतीं या द्वीपीय अर्द्ध चन्द्राकार क्षेत्र। धुरीक्षेत्र धुरी क्षेत्र के अन्तर्गत विश्व द्वीप का वह वृहत् स्थलीय क्षेत्र सम्मिलित है जिसका जल प्रवाह आन्तरिक है या आर्कटिक सागरोन्मुख है।

इसका विस्तार पश्चिम में वोल्गा नदी से पूर्व में पूर्वी साइबेरिया तक तथा दक्षिण में हिमालय पर्वत से लेकर आर्कटिक सागर तक फैला हुआ था। धुरी क्षेत्र के पश्चिम, दक्षिण तथा पूर्व में आंतरिक या उपांतीय अर्द्धचन्द्राकार क्षेत्र का विस्तार है

जिससे धुरी क्षेत्र घिरा हुआ है। इसके अन्तर्गत पश्चिम यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, मध्य-पूर्व (द. प. एशिया), दक्षिण तथा दक्षिणी पूर्वी एशिया एवं एशिया का सुदूर पूर्व क्षेत्र शामिल हैं। आन्तरिक या उपांतीय क्षेत्र के बाहर बहिर्वत या द्वीपीय अर्द्ध चन्द्राकार क्षेत्र पाया जाता है

जिसके अन्तर्गत उत्तरी एवं दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सहारा मरुस्थल के दक्षिण स्थित अफ्रीकी भाग, ब्रिटिश द्वीप एवं जापान द्वीप समूह आदि सम्मिलित हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् मैकिंडर ने विश्व में दो महत्वपूर्ण शक्ति केन्द्रों के अस्तित्व को देखा जिनमें उत्तरी अमेरिका एवं पश्चिमी यूरोपीय देश शामिल थे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व के भूराजनीतिक परिदृश्य में काफी परिवर्तन हुए। द्वितीय विश्व युद्ध का परिणाम शक्ति केन्द्र से शक्ति शुन्यता की ओर न होकर प्रदेशन तथा धूरी पर आधिपत्य को लेकर था। अतः कथन (B) और (C) सही है, जबकि कथन (A) और (D) गलत है, इसलिए विकल्प (d) सही है।

38. उच्चावच लक्षणों को उनके उद्‌गम कालक्रम के आधार पर व्यवस्थित कीजिए:

A. बॉस्जेस पर्वत
B. स्कैंडेनेवियाई उच्च भूमि
C. साइबेरियन शील्ड
D. एटलस पर्वत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) C, B, A, D
Solution:

दिए गए उच्चावच के उद्‌गम क्षेत्रों का सही कालानुक्रम निम्नलिखित है- साइबेरियन शील्ड स्कैंडेनेवियाई उच्चभूमि वॉस्जेस पर्वत एटलस पर्वत ।

साइबेरियन शील्ड की उत्पत्ति आद्य महाकल्प (Azoic) में हुआ। स्कैंडेनेवियाई उच्च भूमि का उद्‌गम पैल्योजोइक कल्प में हुआ था। वॉस्जेस पर्वत हर्सीनियन काल का पर्वत है। जबकि एटलस पर्वत की उत्पत्ति सेनोजोइक काल में हुआ था। अतः विकल्प (a) सही है।

39. वैकल्पिक बिन्दु विधि के बारे में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (d) स्टैन डी गीर की विधि में, नगरीय जनसंख्या को दर्शाने हेतु गोलाभ और ग्रामीण जनसंख्या को दर्शान हेतु समरूपी बिन्दुओं का प्रयोग किया जाता है।
Solution:

स्टिलजेनबोअर विधि में ग्रामीण जनसंख्या को समान आकार वाले बिन्दुओं के द्वारा तथा नगरीय जनसंख्या को वृत्तों (circle) के द्वारा प्रदर्शित करते हैं। स्टेन डी गीर विधि स्टिलजेनबोअर की विधि से मिलती जुलती हैं, केवल इतना अन्तर है कि

इसमें नगरीय जनसंख्या को वृत्तों (circle) के बजाय गोलों गोलाभ (Spheres) के द्वारा प्रदर्शित करते है और ग्रामीण जनसंख्या को दर्शाने हेतु समरूपी बिन्दुओं का प्रयोग किया जाता है। अतः स्पष्ट है कि वैकल्पिक बिन्दु विधि के बारे में कथन (d) सत्य है।

40. निम्नांकित शहरों में,_______सर्वाधिक भूकंप संवेदी क्षेत्र में स्थित है।

Correct Answer: (a) दिल्ली
Solution:

दिल्ली सर्वाधिक भूकम्प संवेदी क्षेत्र जोन (iv) में स्थित है। इसके अतिरिक्त कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कुछ भाग, उत्तरी पंजाब, हरियाणा का पूर्वी भाग, पश्चिम उत्तर प्रदेश तथा उत्तर बिहार इस क्षेत्र में आते है

जबकि अत्याधिक संवेदी क्षेत्र (सर्वाधिक भूकम्प संवेदी क्षेत्र) जोन (v) के अन्तर्गत उत्तरी-पूर्वी प्रांत, दरभंगा से उत्तर में स्थित क्षेत्र तथा अररिया (बिहार में भारत-नेपाल सीमा के साथ), उत्तराखण्ड, पश्चिमी हिमाचल प्रदेश (धर्मशाला के चारों ओर), कश्मीर घाटी और कच्छ (गुजरात) इसमें शामिल है।

जोन (iii) सामान्य क्षति जोखिम को दर्शाता है जिसमें प्रायद्वीप के शेष भाग एवं गंगा मैदान को समाहित किया जाता है। जोन (ii) न्यून क्षति जोखिम को प्रदर्शित करता है, इसमें राजस्थान का बागड़, जयपुर, अरावली श्रेणी, बुंदेलखण्ड, छोटा नागपुर पठार आदि क्षेत्र शामिल हैं।