Solution:क्षैतिजीय वायु चित्रों को पार्थविक वायु चित्र भी कहा जाता है। क्षैतिज अथवा धरातलीय (पार्थविक) वायु फोटो चित्रों को लेने के लिए कैमरे के अक्ष को सीधे क्षैतिज तल के समान लाया जाता है।इनके द्वारा केवल ऊँचाई दृश्य प्रस्तुत किया जाता है। क्षैतिज फोटो चित्र सामान्यतः अच्छे कैमरे से भी लिए जा सकते हैं। जिनका उपयोग सहायक रूप से ऊर्ध्वाधर फोटो चित्रों के विश्लेषण के लिए किया जाता है।
क्षेत्रीय अध्ययनों में इनका भी विशेष महत्त्व है। विशेष रूप से भूगर्भिक, वानिकी तथा भू-आकृतिक अध्ययनों में परिच्छेदिकाओं के लिए इनकी आवश्यकता होती है। तिर्यक फोटो चित्र खींचने के लिए वायुयान में कैमरे के अक्ष को धरातल की दिशा की ओर नत दिशा में झुका दिया जाता है।
इस प्रकार के फोटो चित्रों में धरातलीय विवरणों के पार्श्व-दृश्य दिखाई देते हैं। वायु कैमरे के अक्ष झुकाव से लिए गये फोटो चित्रों को तिर्यक फोटो चित्र कहते हैं। इस प्रकार के फोटो चित्र भूमि पर बहुत बड़े क्षेत्र को तय करते हैं,
परन्तु विवरण की शुद्धता एवं स्पष्टता केंद्र से दूर जाने पर कम हो जाती है। तिर्यक फोटोग्राफी का उपयोग सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है। अतः युद्धकाल में शत्रु के द्वारा क्षों के नीचे छिपाकर रखे गये टैंकों, वाहनों, रसद-भंडारों व शस्त्रागारों का पता लगाने के लिए ये वायु फोटो चित्र बहुत उपयोगी है। ट्राईमेट्रोजेन का अर्थ है त्रिपदीय अर्थात् तीन रूप से कार्य होना।
इसमें कैमरा इकाई में तीन कैमरे एक साथ प्रयोग किये जाते हैं। केंद्र में स्थित कैमरा धरातल के ऊर्ध्वाधर चित्रों को लेता है जबकि अगल-बगल के कैमरे क्षितिज तक के तिर्यक वायु फोटो चित्र खींचते हैं। इस प्रकार त्रिपदीय प्रणाली में दायें क्षितिज से बायें क्षितिज तक समस्त क्षेत्र अंकित हो जाता है।