प्रवसन एक मूलभूत जनसांख्यिकीय प्रक्रिया है जिसमें आर्थिक,सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय कारकों के फलस्वरूप व्यक्तियों या समूहों का एक भौगोलिक स्थान से दूसरे स्थान पर आवागमन, हस्तांतरण होता है। इसे स्वैच्छिक और अस्वैच्छिकप्रवसन, आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रवसन तथा अस्थायी और स्थायी प्रवसन में बाँटा जा सकता है। आर्थिक अवसर, बेहतर जीवन दशाएँ, शिक्षा और संघर्ष प्रवसन के प्राथमिक संचालनी कारक हैं। रोवेनस्टेनका प्रवसन नियम, ली का पुश-पुल सिद्धांत और विश्व प्रणाली सिद्धांत जैसे सिद्धांत प्रवसन पद्धति और अभिप्रेरणा की व्याख्या करते हैं। प्रवसन का मूल और लक्ष्यित क्षेत्रों, दोनों पर महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक प्रभाव होता है। जहाँ प्राप्तकर्ता क्षेत्र श्रम आपूर्ति और सांस्कृतिक विविधता से लाभान्वित होते हैं, वहीं अवसंरचना पर दबाव, श्रम बाजार प्रतिस्पर्द्धा और सामाजिक एकीकरण जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न होती हैं। इसके विपरीत स्रोत क्षेत्र, प्रतिभा पलायन अथवा आर्थिक हानि का अनुभव कर सकते हैं वहीं प्रवासियों द्वारा प्रेषित धन से लाभान्वित भी होते हैं। पार-राष्ट्रवाद की संकल्पना दर्शाती है, कि कैसे प्रवासी सीमाओं के पार संबंध बनाए रखते हैं। विश्वभर में प्रवासी नीतियाँ आर्थिक जरूरतों, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय सरोकारों को संतुलित करने का आशय रखती हैं तथा इस प्रक्रिया में वैश्विक प्रवसन प्रवाह और उसके दीर्घावधि परिणामों को प्रभावित करती हैं।
"प्रतिभा पलायन" का सिद्धांत निम्नलिखित में किस प्रकार के प्रवसन के साथ निकटता से संबंद्ध है?
Correct Answer: (c) कुशल प्रवसन
Solution:"प्रतिभा पलायन" का सिद्धांत कुशल प्रवसन के साथ निकटता से संबंद्ध है। भारत में सबसे ज्यादा प्रतिभा पलायन संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूरोप जैसे देशों में होता है। इसका मुख्य कारण बेहतर अवसरों, उच्च वेतन, बेहतर जीवन स्तर की तलाश, अनुसंधान की पर्याप्त और बेहतर सुविधा, उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर आदि हैं। उदाहरण के लिए कई भारतीय डॉक्टर और इंजीनियर बेहतर काम एवं उच्च वेतन के लिए प्रतिभा पलायन करते हैं।