Solution:विश्व में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों में सौर ऊर्जा के लिए वर्ष में तेज सूर्य प्रकाश वाले अधिक दिनों की आवश्यकता होती है और जीवाश्म ईधनों के निक्षेप केवल सीमित स्थानों पर पाये जाते हैं को शामिल किया जाता है। जीवाश्म ईंधन जैसे- कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस परंपरागत ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैंऔर इन खनिजों के भंडार सीमित हैं और जीवाश्म ईंधनों के बढ़ते उपयोग से ऊर्जा के गैर-परंपरागत स्रोत का महत्व बढ़ रहा है। ऐसा अनुमान किया जा रहा है कि यदि वर्तमान दर से इनका उपभोग लगातार होता रहा तो इन ईंधनों के भण्डार समाप्त हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त इनका उपयोग पर्यावरणीय प्रदूषण भी पैदा करता है।
इसलिए गैर-परंपरागत स्रोत जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा जो कि नवीकरणीय हैं, के उपयोग की आवश्यकता है। सौर ऊर्जा धूप की प्रचुरता वाले उष्ण कटिबंधीय देशों के लिए सौर ऊर्जा के उपयोग की प्रौद्योगिकी बहुत लाभदायक है। ज्वार से उत्पन्न ऊर्जा को ज्वारीय ऊर्जा कहते हैं।
इस ऊर्जा का विदोहन समुद्र के संकरे मुहाने में बाँध के निर्माण से किया जाता है। उच्च ज्वार के समय इसका उपयोग बाँध में स्थापित टरबाइन को घुमाने के लिए किया जाता है।