NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2024 भूगोल

Total Questions: 100

91. निर्देश (91-95) लम्बी अवधि तक लगातार वर्षा होने से मुख्यतः नदियों में बाढ़ आना जबकि अल्प प्रचंड मूसलाधार वर्षा से जलीय बाढ़ आ सकती है। बदलते तापमान के कारण, विश्व के अनेक बंदरगाह पहले से ही बारम्बार विभक्त हो रहे हैं और दीर्घकालिक अनावृष्टि का सामना कर रहे हैं। अनावृष्टियों के कभी-कभी परिणामी प्रभाव होते हैं

उदाहरणार्थ कृषि, वानिकी, जल-नीतों एवं जैव विविधता में वे नदियों एवं भूमिजल के स्तर वृक्षां के विकास एवं फसलों की वृद्धि को कम कर देते हैं। पुनः बदलते तापमान से मानव, पशु एवं पौधों के स्वास्थ्य/स्थिति को जोखिम होता है। जबकि बदलते तापमान से कोई नया स्वास्थ्य खतरा नहीं होगा बल्कि इससे वर्तमान स्थिति को बदतर एवं विस्तार दे देगा।

 भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का क्या प्रभाव है? 

Correct Answer: (a) कम फसल पैदावार और खाद्य उत्पादन
Solution:

भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम फसल पैदावार और खाद्य उत्पादन है।

92. भारत में आपदा प्रबंधन का सर्वोच्च निकाय कौन सा है?

Correct Answer: (c) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
Solution:

भारत में आपदा प्रबंधन का सर्वोच्च निकाय 'राष्ट्रीयआपदा प्रबंधन प्राधिकरण' है। यह भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष निकाय है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना और राज्य और जिलास्तरों पर संस्थागत तंत्र के लिए एक सक्षम वातावरण का निर्माण अनिवार्य किया गया है।

93. 2013 में "हिमालयन सुनामी के लोक प्रचलित नाम से उत्तराखंड में मध्य दिवस बादल फटने की घटना हुई,जिसके कारण विध्वंसक बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस आपदा का अधिकेन्द्र था_______|

Correct Answer: (b) केदारनाथ
Solution:

2013 में "हिमालयन सुनामी के लोक प्रचलित नाम से उत्तराखण्ड में मध्य दिवस बादल फटने की घटना हुई, जिसके कारण विध्वंसक बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस आपदा का अधिकेन्द्र केदारनाथ था।

94. निम्नलिखित में से कौन बदलते तापमान का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रभाव है?

Correct Answer: (d) बीमारियों के प्रभावों में परिवर्तन जैसे रोगवाहक कृतक पानी अथवा खाद्य जनित बीमारियाँ
Solution:

बीमारियों के प्रभावों में परिवर्तन जैसे रोगवाहक कृतक- पानी अथवा खाद्य जनित बीमारियाँ बदलते तापमान का सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रभाव हैं।

95. एल-लीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) की आवृत्ति में हालिया अभिवृद्धि का उत्तरदायी कारण किसे ठहराया जा सकता है:

Correct Answer: (d) वैश्विक तापन
Solution:

एल-लीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) की आवृत्ति में हालिया अभिवृद्धि का उत्तरदायी कारण वैश्विक तापन को ठहराया जा सकता है। एल-निनो धारा को विपरीत धारा भी कहते हैं, जो दक्षिणी अमेरिका के पेरू तट के पश्चिम में तट से 180 किमी. की दूरी पर उत्तर से दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है।

इसका विस्तार 3° दक्षिण से 18° दक्षिण अक्षांश तक रहता है। एल निनो गर्म जलधारा है। जिसके आगमन पर सागरीय जल तापमान सामान्य से 30-40 सेन्टीग्रेट बढ़ जाता है।

96. निर्देश (96-100) प्राचीन क्लासिकी आदर्श काल में अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में शैक्षिक विधाओं में काफी प्रगति देखी गई । प्राचीन विद्वान जैसे प्लेटो, अरस्तू, थेल्स, एनैक्सीमेंडर, टॉलेमी और इरेटोस्थेनीज का पश्चिमी विचारधारा पर इतना अधिक प्रभाव हुआ था कि अनेक सहस्राब्दियों तक उनके विचारों सिद्धांतों से परे सोचना वास्तव में कठिन था।

इस काल में हुई यात्राओं और खोजों से पूर्व में अज्ञात जगत जगह की बेहतर समझ विकसित हुई। यूनानियों (ग्रीक वासियों) ने मानव के ज्ञान के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हें विभिन्न प्राचीन सभ्यताओं से जानकारी एकत्रित की और सिद्धांतों तथा अवलोकनों प्रेक्षणों के द्वारा उनको विस्तारित किया। यूनानी विद्वानों ने लगभग संभव विषय पर विचार किया।

उनके शोध कार्यों ने वस्तुतः लगभग उन सभी क्षेत्रों/विधाओं के लिए आधार स्थापित किया जिनका आज हम अध्ययन करते हैं। उनके प्रभावी योगदानों ने भूगोल को वास्तव में एक ठोस विषय, विशेष रूप से गणितीय, भौतिक, ऐतिहासिक और क्षेत्रीय भूगोल के क्षेत्रों में स्थापित किया।

आज की वैज्ञानिक उन्नति पर उन प्राचीन विद्वानों द्वारा किए गए आधारी कार्य को ध्यान में रखे बिना विचार करना कठिन है।

अरस्तू की जलवायु क्षेत्रों की संकल्पनाओं को किसने गणितीय सीमाओं के विषय में जानकारी प्रदान करके बेहतर किया था?

Correct Answer: (b) इरेटोस्थेनीज
Solution:

अरस्तू की जलवायु क्षेत्रों की संकल्पनाओं को इरेटोस्थेनीज गणितीय सीमाओं के विषय में जानकारी प्रदान करके बेहतर किया था। अरस्तू एक यूनानी (ग्रीक) भूगोलवेत्ता थे,

इन्होंने गणितीय भूगोल के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया था। अरस्तु ने पृथ्वी की आकृति तथा पृथ्वी के कटिबंधों का तथ्यपूर्ण और सोदाहरण वर्णन किया। इरेटोस्थनीज ग्रीक भूगोलवेत्ता थे, जिन्होंने 'ज्योग्राफिका' नामक पुस्तक लिखी, जो प्रथम शास्त्रीय पुस्तक मानी जाती है।

97. निम्नलिखित में से किनको एनैक्सीमेण्डर का शिष्य माना जाता है, जिन्होंने आयोनियम (आयोनियावासियों) के ब्रह्मांडीय सरोकारों को समाहित किया?

Correct Answer: (a) पाइथागोरस
Solution:

पाइथागोरस को एनैक्सीमेण्डर का शिष्य माना जाता है, जिन्होंने आयोनियन (आयोनियावासियों) के ब्रहांडीय सरोकारों को समाहित किया।

98. किसने ये माना कि भूमध्यरेखा के आस-पास के स्थल बसावट योग्य नहीं हैं और केवल समशीतोष्ण क्षेत्र ने ही विश्व के बसे हुए भागों को निर्मित किया?

Correct Answer: (d) अरस्तू
Solution:

अरस्तू ने ये माना कि भूमध्यरेखा के आस-पास के स्थल बसावट योग्य नहीं हैं और केवल समशीतोष्ण क्षेत्र ने ही विश्व के बसे हुए भागों को निर्मित किया है।

99. विद्वानों द्वारा प्राचीन भूगोल के बारे में ज्ञात जानकारी का बड़ा भाग_______के कार्य से पता चला है।

Correct Answer: (c) स्ट्रेबो
Solution:

विद्वानों द्वारा प्राचीन भूगोल के बारे में ज्ञात जानकारी का बड़ा भाग स्ट्रेबो के कार्य से पता चला है। स्ट्रेबो एक रोमन भूगोलवेत्ता थे, जिन्होंने 'ज्योग्राफिया' (Geographia) नामक पुस्तक लिखा।

100. 'टेरा इनकोगनिटा' की संकल्पना किसने दी थी?

Correct Answer: (a) टॉलेमी
Solution:

'टेरा इनकोगनिटा' की संकल्पना टॉलेमी ने दी थी। टॉलेमी एक रोमन भूगोलवेत्ता तथा महान खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने खगोलशास्त्र की प्रसिद्ध पुस्तक 'अल्माजेस्ट' (Almagest) की रचना की थी।
टॉलेमी की अन्य पुस्तक- 'ज्योग्राफिया'(Geographia), 'ग्रहीय परिकल्पना' (Planetary Hypothesis) और 'एनेलिमा'।