Solution:जब वायु की ह्रास दर, शीतलन की शुष्क रुद्धोष्म दर से अधिक होती है, तो यह स्थिति निरपेक्ष अस्थायित्व कहलाती है। जब गर्म हल्की वायु धरातल से ऊपर उठती है और सामान्य ताप पतन दर, शुष्क एडियाबेटिक दर से अधिक होती है
तो वायु आस-पास की अपेक्षा गर्म होने के कारण स्वतः ऊपर उठती रहती है तथा अस्थिर होती है एवं उसका अस्थिर संतुलन होता है। वायु के संतृप्त होने पर उठती वायु के ठंडा होने की दर कम हो जाती है जिस कारण उठती वायु समीप वायु से गर्म होने के कारण ऊपर उठती रहती हैं
तथा वायु में स्थायी अस्थिरता आ जाती हैं। वायुमंडलीय अस्थिरता उस समय उत्पन्न होती है जब ऊपर उठती वायु के ठंडा होने की दर (अर्थात् शुष्क एडियाबेटिक ताप पतन दर) सामान्य ताप पतन दर से कम है,
तो आस-पास की वायु की तुलना में ऊपर उठती वायु गर्म होने के कारण ऊपर उठना जारी रखती है। परिणामस्वरूप वायुमंडलीय अस्थिरता बनी रहती है। निश्चित ऊँचाई पर संघनन होने के बाद यदि ऊपर उठती वायु आस-पास की वायु से अब भी गर्म है,
अर्थात् यदि संघनन के बाद भी ऊपर उठती वायु की आर्द्र एडियाबेटिक ताप पतन दर आस-पास की वायु के सामान्य ताप पतन दर से कम है तो हवा का और ऊपर उठना जारी रहता है। इस तरह उत्पन्न वायुमंडलीय अस्थिरता को निरपेक्ष अस्थिरता कहते हैं।