NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

1. निम्नलिखित में से कौन-सा एमानुएल कांट द्वारा नैतिक नियोग आदेश के रूप में स्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) निरपेक्ष नियोग आदेश
Solution:

निरपेक्ष नियोग आदेश एमानुएल कांट द्वारा नैतिक नियोग आदेश के रूप में स्वीकार्य है। पश्चिमी दर्शन में निरपेक्षवादी या कर्तव्यवाद नीतिमीमांसा का चरम विकास कांट के दर्शन में हुआ है। उनके नैतिक सिद्धान्त को निरपेक्ष आदेश का सिद्धान्त कहा जाता है। इस सिद्धान्त का सार यह है कि नैतिकता न तो मनुष्य की इच्छाओं व भावनाओं से सम्बन्धित होती है और न ही कार्यों के परिणामों से। नैतिकता का एकमात्र संबंध कर्तव्य की चेतना से होता है।

2. कांट का मत है नैतिक विधि प्रत्येक व्यक्ति को निम्नलिखित के द्वारा प्रदत्त है:

Correct Answer: (c) किसी व्यक्ति का स्वयं का संकल्प
Solution:

कांट का मत है कि नैतिक विधि प्रत्येक व्यक्ति को उसके स्वयं के संकल्प द्वारा प्रदत है। कांट के अनुसार, सभी व्यवहारिक बौद्धिक प्राणियों के नैतिक नियम केवल अभिकर्ता की स्वायता स्वतंत्रता में निहित है। नैतिकता के स्रोत बौद्धिक प्राणी को बिना किसी वाह्य कारक से प्रभावित हुए स्वयं के लिए विधानों को बनाने की स्वतंत्रता की क्षमता में पाये जाते हैं।

3. कांट की ज्ञानमीमांसा में वस्तुनिजरूप (थिंग इन इटसेल्फ) की अवधारणा, जो इंद्रियों द्वारा अज्ञेय है, परन्तु कम से कम विचार योग्य है

Correct Answer: (a) सीमित करने वाली अवधारणा
Solution:

कांट की सीमित करने वाली अवधारणा ज्ञानमीमांसा में वस्तुनिज़रूप (थिंग इन इटसेल्फ) की अवधारणा जो इंद्रियों द्वारा अज्ञेय है, परन्तु कम से कम विचार योग्य है।

4. प्लेटों के अनुसार गणितीय ज्ञान का विषय क्या है?

Correct Answer: (c) बुद्धिगम्य विशिष्ट
Solution:

प्लेटों के अनुसार गणितीय ज्ञान का विषय बुद्धिगम्य है। प्लेटो ग्रीस के एक ऐसे महान दार्शनिक हुए है, जिनके विचारों की झलक उनके बाद आए लगभग सभी दार्शनिकों के विचारों में देखने को मिलता है। प्लेटों ने बुद्धिवाद और ज्ञान की वस्तुनिष्ठा को स्वीकार किया।

5. निम्नलिखित कथनों में कौन-सा कथन विवेकानंद के दर्शन के अनुसार सत्य नहीं है?

Correct Answer: (c) जगत पूरी तरह से ईश्वर से भिन्न है।
Solution:

जगत पूरी तरह से ईश्वर से भिन्न है, यह कथन विवेकानन्द के दर्शन के अनुसार सत्य नहीं है। उनके दर्शन के अनुसार आत्मा एवं ईश्वर में अभेद संबंध है। उनके दर्शन को नव्य वेदान्त कहा जाता है। उनके अनुसार संसार की उत्पत्ति का आधार माया है। विवेकानंद ने आन्तरिक शुद्धता एवं आत्मा की एकता के सिद्धान्त पर आधारित नैतिकता की नवीन अवधारणा प्रस्तुत की। विवेकानन्द की शिक्षाओं पर उपनिषद, गीता के दर्शन, बुद्ध एवं ईसा मसीह के उपदेशों का प्रभाव है।

6. शंकर की 'माया' सम्बन्धी अवधारणा के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सत्य नहीं है?

Correct Answer: (b) यह आध्यात्मिक और आत्म-चेतन है।
Solution:

शंकर की 'माया' सम्बन्धी अवधारणा के सम्बन्ध में यह आध्यात्मिक और आत्म-चेतन है' कथन सत्य नहीं है। शंकर के अनुसार माया ब्रह्म की अन्तनिर्हित शक्ति है। यह अनादि है। यह अवर्णनीय और अपरिभाष्य है।

7. सत वह है जो वह नहीं है और जो वह नहीं हैं वह वो है" यह वाक्य सम्बंधित है किसके दर्शन से-

Correct Answer: (c) सार्त्र
Solution:

'संत वह है जो वह नहीं है और जो वह नहीं है वह वो है' वह वाक्य संबंधित है सार्त्र के दर्शन से ज्यां पाल सार्त्र एकल व्यक्तिवादी, प्रकृति और मानव अस्तित्व में क्रमों की क्षणिक निश्चितता, असम्बद्धता और अपूर्णता की एक सैद्धांतिकी निर्मित करने वाले दार्शनिक है।

8. अपनी सबसे प्रारम्भिक शुरुआत के समय से ही दर्शनशास्त्र को एक कठोर विज्ञान के रूप में मानने के दावे को अस्वीकार करते है?

Correct Answer: (b) हुर्सत
Solution:

आस्ट्रियाई जर्मन दार्शनिक एवं गणितज्ञ एडमंड हुर्सत अपने प्रारम्भिक समय से ही दर्शनशास्त्र को एक कठोर विज्ञान के रूप में मानने के दावे को अस्वीकार करते हैं।

9. सात्र के अनुसार मनुष्य स्वतंत्र है क्योंकि उनका सत होना निम्न पर आधारित है?

Correct Answer: (b) स्वयं में सत का निषेध (इनहेलेशन)
Solution:

ज्यां-पाल सार्त्र आस्तित्ववाद के पहले विचारकों में से माने जाते है। उनके अनुसार मनुष्य स्वतंत्र है क्योंकि उनका सत् होना स्वयं में सत के निषेध (इनहेलेशन) पर आधारित है।

10. भारतीय दर्शन के निम्नलिखित मतों में से कौन परिणामवाद का समर्थन नहीं करता?

Correct Answer: (d) न्याय
Solution:

भारतीय दर्शन के न्यायमत परिणामवाद का समर्थन नहीं करता। न्याय दर्शन के प्रवर्तक ऋषि गौतम है। न्याय का शाब्दिक अर्थ तर्क या निर्णय है। यह भारतीय दर्शन में ज्ञानमीमांसा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण दर्शन है।