पारम्परिक प्राकृतिक कानून को संरक्षण प्रदान करने वाले समकालीन संरक्षकों को एविनवास की धारणा, जो कि कानून का उद्देश्य सामान्य शुभ का प्रोत्साहन होता है, को दृष्टिगत रखते हुए सामाजिक संरक्षण की इच्छा रखना चाहिए। वे रेखांकित कर सकते हैं कि जिसे हम दमन एवं शोषण समझते हैं, उसे न्यायपूर्ण और उचित समझा गया।
जिन्होंने दास नियम अधिनियमित किया, उनकी दृष्टि इसे सापेक्षतावादी अवधारणा की पुष्टि नहीं करती है यह कि जिसे लोग सही समझते हैं, इसलिए वे सही है। पारम्परिक प्राकृतिक कानून के दृष्टिकोण से इस तरह के सापेक्षतावादी दृष्टिकोण को स्पष्टतया अस्वीकार करते है, इस पक्ष में कि वस्तुनिष्ठ नैतिक सत्य होता है।
बल्कि वे यह सुझाव देते है कि कानूनों के अधिनियम से लोग वही करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि सही है भले ही उनकी अवधारणा गलत और त्रुटिपूर्ण हो सकती है। यदि यह वही है, जिसे लोग करने का प्रयास कर रहे हैं, तब हम फिर भी कह सकते हैं कि विधि का उद्देश्य नैतिकता एवं न्याय को प्रोत्साहन देना है। यहाँ कानून का मानवीय उद्देश्य है, भले ही यहीं ईश्वर का उद्देश्य हो।
उपर्युक्त गद्यांश में कौन से मुख्य बिंदु पर चर्चा की गई है-