NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे (91-95) प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

'वे कहते हैं 'साधन आखिरकार साधन है, में कहता हूँ" साधन आखिकर सब कुछ है।' जैसा साधन वैसा साध्य साधन और साध्य में कोई पृथकता की दीवार नहीं है। वास्तव में, सृजनकर्ता में हमें साधन पर तो नियंत्रण दिया है (वह भी बहुत सीमित) परंतु साध्य पर नहीं। साध्य पर नहीं। साध्य की सिद्धि साधन ठीक अनुपात में होती है। इस अनुपात का कोई अपवाद नहीं।
उपरोक्त गद्यांश महात्मा गाँधी के निम्नलिखित में से किस पुस्तक से ली गई है?

Correct Answer: (a) यंग इंडिया
Solution:

उपरोक्त गद्यांश महात्मा गाँधी के पुस्तक यंग इंडिया से लिया गया है।

92. दिया गया गद्यांश निम्नलिखित में से किस विशेष नीति शास्त्र प्रारूप की पैरोकारी करता प्रतीत होता है?

Correct Answer: (c) परिणाम निरपेक्ष नीतिशास्त्र
Solution:

दिये गये गद्यांश में परिणाम निरपेक्ष नीतिशास्त्र प्रारूप की पैरोकारी करता प्रतीत होता है।

93. गांधीवाद दर्शन में 'साध्य के रूप में सत्य' की प्राप्ति निर्भर करती है :

Correct Answer: (c) साधन के रूप में अहिंसा
Solution:

गाँधीवादी दर्शन में साध्य के रूप में सत्य की प्राप्ति साधन के रूप में अहिंसा पर निर्भर करती है।

94. गाँधीवाद नीतिशास्त्र में निष्काम कर्म का प्रभाव निम्नलिखित पर स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।

Correct Answer: (b) साधन की शुद्धता
Solution:

गाँधीवादी नीतिशास्त्र में निष्काम कर्म का प्रभाव साधन की शुद्धता पर स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।

95. गांधीजी दृढ़ता से अनुशंसा करते है "हम ज्यों हि नैतिक आधार खाते है हम_____नहीं रह पाते।"

Correct Answer: (b) धार्मिक
Solution:

गाँधी जी दृढ़ता से अनुशंसा करते हैं 'हम ज्यों ही नैतिक आधार खोते हैं धार्मिक नहीं रहते हैं।

96. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर नीचे दिए गए (96-100) प्रश्नों के उत्तर दीजिए

पारम्परिक प्राकृतिक कानून को संरक्षण प्रदान करने वाले समकालीन संरक्षकों को एविनवास की धारणा, जो कि कानून का उद्देश्य सामान्य शुभ का प्रोत्साहन होता है, को दृष्टिगत रखते हुए सामाजिक संरक्षण की इच्छा रखना चाहिए। वे रेखांकित कर सकते हैं कि जिसे हम दमन एवं शोषण समझते हैं, उसे न्यायपूर्ण और उचित समझा गया।
जिन्होंने दास नियम अधिनियमित किया, उनकी दृष्टि इसे सापेक्षतावादी अवधारणा की पुष्टि नहीं करती है यह कि जिसे लोग सही समझते हैं, इसलिए वे सही है। पारम्परिक प्राकृतिक कानून के दृष्टिकोण से इस तरह के सापेक्षतावादी दृष्टिकोण को स्पष्टतया अस्वीकार करते है, इस पक्ष में कि वस्तुनिष्ठ नैतिक सत्य होता है।
बल्कि वे यह सुझाव देते है कि कानूनों के अधिनियम से लोग वही करने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि सही है भले ही उनकी अवधारणा गलत और त्रुटिपूर्ण हो सकती है। यदि यह वही है, जिसे लोग करने का प्रयास कर रहे हैं, तब हम फिर भी कह सकते हैं कि विधि का उद्देश्य नैतिकता एवं न्याय को प्रोत्साहन देना है। यहाँ कानून का मानवीय उद्देश्य है, भले ही यहीं ईश्वर का उद्देश्य हो।
उपर्युक्त गद्यांश में कौन से मुख्य बिंदु पर चर्चा की गई है-

Correct Answer: (a) पारम्परिक प्राकृतिक विधि कानून
Solution:

उपर्युक्त गद्यांश में पारम्परिक प्राकृतिक विधि कानून पर चर्चा की गई है।

97. एक्विनास के अनुसार, विधि कानून का उद्देश्य है:

Correct Answer: (a) सामान्य शुभ कल्याण का प्रोत्साहन
Solution:

एक्विनास के अनुसार विधि कानून का उद्देश्य सामान्य शुभ कल्याण का प्रोत्साहन है।

98. निम्न में से कौन पारम्परिक प्राकृतिक विधि कानून के समर्थक हैं?

Correct Answer: (c) जे.एल. आस्टिन
Solution:

जे.एल. आस्टिन पारम्परिक प्राकृतिक विधि कानून के समर्थक है।

99. विधि में नैतिकता और न्याय के बीच क्या सम्बन्ध है?

Correct Answer: (a) विधि के निर्मात्री संघटक
Solution:

विधि में नैतिकता और न्याय के बीच विधि के निर्मात्री संघटक का संबंध है।

100. पारम्परिक नैसर्गिक कानून सापेक्षतावाद को इस अवधारणा के पक्ष में स्पष्टतः खारिज करता है कि-

Correct Answer: (b) वस्तुनिष्ठ नैतिक सत्य है।
Solution:

पारंपरिक नैसर्गिक कानून सापेक्षतावाद को इस अवधारणा के पक्ष में स्पष्टतः खारिज करता है कि वस्तुनिष्ठ नैतिक सत्य है।