Solution:जैन धर्म के अनुसार अपरिग्रह का अर्थ विचार, शब्द (वाणी) और कर्म से त्याग है। जैन दर्शन में विशयामशक्ति का परित्याग अपरिग्रह है। जैन दर्शन के अनुसार मुमुक्ष का शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध इन विषयों को परित्याग करना चाहिए। जैन सन्यासी से पूर्ण अपरिग्रह की अपेक्षा की गयी है।