शहरीकरण वैश्विक घटना है । विश्वव्यापी जनसंख्या की आधी से अधिक अब शहरी क्षेत्रों में रहती है और संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) की प्रस्तुति के अनुसार 2050 तक विकासशील विश्व की 64% जनसंख्या और विकसित विश्व की 86% शहरी हो जाएगी। यह वृद्धि एशिया और अफ्रीका में बहुत होगी और इन महाद्वीपों में अधिक शहर व नगर होंगे। भारत पर यूएन प्रस्तुति का कथन है को 2030 तक भारत की 40% जनसंख्या शहरी हो जाएगी और 2050 तक 51% से अधिक ।
मेकिन्सी की प्रस्तुतियों के अनुसार 2030 तक भारत की पाँच राज्यों, अर्थात तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पंजाब, की जनसंख्या 50% से अधिक शहरी होगी। 2011 की जनगणना के अनुसार भी एक चौथाई जिलों में शहरीकरण राष्ट्रीय औसत से अधिक है। एक वंशक्रम, घनिष्ठ संबंध और समुदायिक आचरण ग्रामीण संस्कृति के अभिलक्षण है जबकि विभिन्न वंशक्रम, अपरिचित संबंध और प्रतियोगी आचरण शहरी संस्कृति के अभिलक्षण हैं ।
वर्तमान समय में शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में लोगों के प्रवसन का प्रारंभ औद्योगिक क्रांति से हुआ और विश्वव्यापी स्तर पर हो रहा है. इसके चलते शहरों का आकार कल्पनातीत हो जाता है। शहरी क्षेत्रों में उद्योगों का विकास, बढ़ती हुई, जनसंख्या को समझ पाने में ग्रामीण क्षेत्रों का असमर्थ होना, रोजगार के बेहतर तथा अधिक अवसर, बेहतर जीवनस्तर की इच्छा, सामाजिक गतिशीलता व सौभाग्य, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि और बेहतर नागरिक सेवाओं को शहरीकरण के मूल कारणों के रूप में देखना चाहिए। ये कारण है और शहरी विकास की वृद्धि के मूल में हैं । प्रवसन को केवल ग्रामीण से शहरी के रूप में नहीं बल्कि शहरी से शहरी के रूप में भी देखना चाहिए ।
भारत में जनगणना में शहरी क्षेत्रों के लक्षणों को परिभाषित किया जाता है। 1971 में बनाई गई जनगणना की परिभाषा को बाद की सभी जनगणनाओं में भी अपनाया गया है । इसके अनुसार शहरी की परिभाषा है (a) न्यूनतम 5000 जनसंख्या होना चाहिए; (b) श्रमजीवी जनसंख्या का कम से कम 75 गैर-कृषि कार्यों में संलग्न होना चाहिए; और (c)कम से कम 400 प्रति वर्ग किसी का जनसंख्या घनत्व होना चाहिए ।
जनसंख्या, भूमि का उपयोग, घनत्व, रोजगार इत्यादि मोटे तौर पर शहरी की परिभाषा के घटक हैं और इसमें के देश से दूसरे देश में थोड़े परिवर्तन होते हैं। अधिकतर देशों में 5000 की जनसंख्या को शहरी कहा जाता है पर डेनमार्क में यह संख्या 200 ही है जबकिजापान और जीन में यो सीमाएँ बहुत ऊपर हैं, क्रमशः 50,000 और 1.00,000 जनसंख्या ।
शहरी क्षेत्र को परिभाषित करने के मानदंड के रूप में कुछ देश आधारभूत संरचना और सेवा प्रदान करने की व्यवस्था का भी प्रयोग करते हैं, इसलिए यह अंतराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक तुलना की समस्या है। शहरीकरण की बढ़ती हुई गति के लिए शहरों-कस्बों का बेहतर अभिशासन आवश्यक हुई है।
बेहतर अभिशासन के लिए विभिन्न सुधार जाहिए, जैसे संपत्ति कर, ई-गवर्नेस, सार्वजनिक निजी भागीदारी, निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व, नागरिक अधिकारपत्र, सेवा स्तर के पैमाने, स्थानीय निकाय ऑम्बड्समैन, वित्त आयोगों का सशक्तीकरण इत्यादि। इन सुधारों से उत्तम शहरी अभिशासन मिलेगा। हरित योजना बजट, प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता में सुधार भी आवश्यक हैं।
15 वें वित्त आयोग ने अपनी रिपोर्ट में चर्चा की कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को विशेषकर दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में, विशिष्ट बद्ध अनुदान दिया जाना चाहिए।
निम्नलिखित में से कौन तत्व शहरी संस्कृति के अभिलक्षण हैं?
(A) घनिष्ठ संबंध
(B) विभिन्न वंशक्रम
(C) प्रतियोगी आचरण
(D) सामुदायिक आचरण