NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

1. निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है?

Correct Answer: (b) यदि 'p' और 'q' असत्य हैं तो ~ (p ~ q) सत्य है।
Solution:

यदि p और q असत्य हैं, तो (p ~ q) सत्य है।
* एक वास्तविक अनुभव या अवलोकन से ज्ञात सत्यः कुछ सत्य माना जाता है।
* यह एक प्रकार का तर्क वितर्क है, जिसमें कथन का प्रयोग करके, कथन की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है। यही न्याय वाक्य है।

2. नीचे दो कथन दिए गए हैं. एक अभिकथन (Asseriton A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में बौद्धमत के दृष्टिकोण के आधार पर सही कूट चयन कीजिए :

अभिकथन A : प्रत्येक वस्तु के क्षणिक होने का दावा नहीं किया जा सकता।
कारण R: इसके प्रेक्षण के लिए कोई नहीं होगा।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
Solution:

बौद्ध दर्श तीन मूल सिद्वान्त पर आधारित माना गया है।
(1) अनीश्वरवाद (2) अनात्मवाद (3) क्षणिक वाद यह दर्शन पूरी तरह से यथार्थ में जीने की शिक्षा देता है।
* बौद्ध धर्म के अनुसार 'सम्यक दृष्टि' वह है, जिसे बुद्ध अस्तित्व को देखने का सही तरीका मानते थे।
* बौद्धमत के दृष्टि कोण के आधार पर प्रत्येक वस्तु के क्षणिक होने का दावा नहीं किया जा सकता है।
* इसके प्रेक्षण के लिए कोई नहीं होगा। यह बौद्ध मत का मानना है।
प्रेक्षण : किसी सजीव प्राणी (मानव) द्वारा अपने ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा अथवा किसी अन्य कृत्रिम उपकरण द्वारा बाह्य जगत का ज्ञान प्राप्त करना प्रेक्षण कहलाता है।

3. सत्याग्रह के संदर्भ में गाँधी द्वारा निम्नलिखित में से किसका समर्थन किया गया था?

Correct Answer: (c) सत्याग्रह में कानून के प्रति आदर एवं प्रेम की भावना सम्मिलित थी
Solution:

सत्याग्रह:  महात्मागाँधी ने अन्याय और बुराई का अहिंसक ढंग से विरोध करने तथा न्याय की मांग करने के लिए जिस नये तरीके का अविष्कार किया उसे ही उन्होने सत्याग्रह नाम दिया।
* सत्याग्रह के विचार का मतलब- 'सत्य को ही अपनी शक्ति बनाकर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।
* गाँधी जी के लिए सत्याग्रह का उद्देश्य पूर्वाग्रह, दुर्भावना, मतांधता, दंभ और स्वार्थपरता की बाधाओं को भेदना था। गाँधी ने पीड़ित प्रेम के आध्यात्मिक प्रभाव के संदर्भ में सत्याग्रह की प्रभावशीलता की व्याख्या की।
* सत्याग्रह में गाँधी जी द्वारा सत्याग्रह में कानून के प्रति आदर एवं प्रेम की भावना सम्मिलित थी।
* गाँधी जी ने सत्याग्रह के प्रभाव को कष्ट साध्य प्रेम के आध्यात्मिक प्रभाव के रूप में समझाया है।

4. निम्नलिखित पर विचार कीजिए एवं सही कूट को चिन्हित कीजिए:

"सही" और "गलत" इन पर लागू होता है:-
A. ऐच्छिक कर्मों पर
B. स्वाभाविक कर्मों पर
C. अनैच्छिक कर्मों पर
D. आकस्मिक कर्मों पर
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल A, B
Solution:

ऐच्छिक कर्म: शरीर की वे प्रतिक्रियाएँ जो सीधे ही मस्तिष्क के नियंत्रण में होती हैं। ऐच्छिक क्रियाएँ कहलाती है।
ऐच्छिक कर्म कर्म करता हो, जिसके साधन हेतु का उसे पूर्व ज्ञान हो, तब उस क्रिया को ऐच्छिक कर्म कहा जाता है। स्वभविक कर्म: स्वभाविक कर्म ही परमेश्वर पूजा है। अपने स्वाभाविक कर्म में लगा हुआ मनुष्य जिस प्रकार से कर्म करके परम् सिद्धि को प्राप्त होती है।
* सही और गलत, ऐच्छिक और स्वाभाविक कर्मों पर लागू होता है।

5. निम्नलिखित पर विचार कीजिए और सही अनुक्रम वाले कूट का चयन कीजिए:

A. ध्यान
B. प्राणायाम
C. धारणा
D. प्रत्याहार
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) B, D, C, A
Solution:

अष्टांग योग के आठ योगांग है-  यम → नियम → आसन → प्राणायाम → प्रत्याहार→ धारणा → ध्यान → समाधि है।
* प्राणायामस्तथा ध्यान प्रत्याहारोस्थ धारणा। कर्तश्चैत्र समधिश्च पडाङ्गो योग उच्यते ।
* इसमें अष्टांग योग के यम, नियम और आसन को स्थान नहीं दिया गया है |
* शरीर, मन, प्राण, बुद्धि तथा आत्मा आदि अवयवों और उस समय प्रचलित योग विधानों को दृष्टि में रख कर उन पर शोध करने के बाद महर्षि पतंजली ने योग के अष्यांगों का निर्धाराण किया।
* (b) प्राणायाम: प्राण + आयाम
प्राण ⇒ शक्ति या सांस ही प्राण है।
आयाम ⇒ बढ़ाना या विस्तार करना है।
अर्थात् प्राणशक्ति को बढ़ाना या नियंत्रित करना प्राणायाम है।
(d) प्रत्याहार : मन एवं बुद्धि दोनो को शांत कर, उन्हें निर्मल,
निश्चल एवं व्यवस्थित बनाये रखना ही प्रत्याहार कहलाता है।
(c) धारणा : किसी एक विषय पर एकाग्रता हासिल करना ही
धारणा कहलाता है।
(a) ध्यान : एक विषय पर मन और मस्तिष्क को पूर्णतः केंन्द्रित कर
उसका स्मरण करते रहना ध्यान है।

6. निम्नलिखित में से किसे बर्कले अस्वीकार करते हैं?

Correct Answer: (c) अमूर्त प्रत्यय होते हैं
Solution:

बर्कले अमूर्त प्रत्यय को अस्वीकार करते है।
बर्कले का सिद्धांत: इनके अनुसार आत्मा और उसके प्रत्ययों के अतिरिक्त कोई सत्ता नहीं। हमारे प्रत्यय ही सत्य वस्तुएँ है। इसक कथन है-"मैं वस्तुओं को प्रत्यय नहीं बनाता, मैं प्रत्ययों को वस बना रहा हूँ।"प्रत्यय ही सत्य विषय हैं और उनकी सत्ता आत्मा वे बाहर नहीं है।
* बर्कले निष्क्रिय प्रत्ययों के अतिरिक्त बर्कले एक क्रियाशील पदा अर्थात् आत्मा के अस्तित्व को भी स्वीकार करते हैं।
आत्मा के द्वारा अनुभव ग्रहण किये जाते हैं और बेदनाओं की प्रती होती है।
बर्कले स्वीकार करते हैं: मानव ज्ञान के विषय इंद्रियों वास्तविक रूप में छपे होते हैं।
* आत्मा प्रत्ययों का अनुभव करती है।
* आत्मा प्रत्ययों से पूर्णतया भिन्न है।

7. गिल्बर्ट रॉयल के अनुसार दर्शनिकों ने तार्किक व्याकरण के पदों का गलत अर्थ लगायाः

Correct Answer: (a) उन्हें व्यक्तिनिर्देशक कृत्य के रूप में मानते हुए
Solution:

गिल्बर्ट रॉयल के अनुसार दार्शनिकों ने तार्किक व्याकरण के पदों को लगाया है-
* उन्हें युक्तियुक्त अवतरण के रूप में मानते हुए। उन्हें निरुपाधिक तर्कवाक्य के रूप में मानते हुए।
* उन्हें पदव्याख्या तर्क के रूप में मानते हुए।
* राइल की प्रसिद्ध पुस्तक " Concept of mind" है तथा कोटि दोष एवं मशीन में स्थित प्रेत वाला सिद्धांत जिसे राइल काल्पनिक तथा भ्रामक कहते है।
राइल के अनुसार हम जब एक कोटि के तथ्यों को ऐसे वाक्य व्यवहारों में व्यक्त करते हैं। जो वाक्य-व्यवहार उस कोटि के अनुरूप नहीं है। बल्कि उससे सर्वथा भिन्न कोटि के अनुरूप है।

8. लॉक को क्या एक संगत इन्द्रियानुभववादी बनाता है:

Correct Answer: (c) उनका सहज प्रत्ययों के सिद्धान्त का खंडन
Solution:

इंद्रियानुभववाद : यह एक दार्शनिक सिद्धांत है। जिसमें इंद्रियों को ज्ञान का माध्यम माना जाता है। इसके अनुसार इंद्रियों से प्राप्त होने वाला अनुभव अथवा किसी भी रूप में होने वाला अनुभव ही ज्ञान का और हमारे संप्रत्ययों का एक मात्र अंतिम आधार है।
* लॉक को अनुभववाद के पिता के रूप में माना जाता है। क्योंकि सर्वप्रथम इन्होंने बुद्धिवाद की मान्यताओं का निषेध कर अनुभववाद की नई नींव रखी। अनुभववाद के अनुसार हमारा समस्त ज्ञान अनुभवजन्य है। इसके अनुसार समस्त ज्ञान प्रत्ययात्मक है तथा सभी प्रत्यय अनुभव द्वारा प्राप्त होते है।
* लॉक को उनका सहज प्रत्ययों के सिद्धांत का खण्डन एक संगत इन्द्रियानुभववादी बनाता है।
* लॉक के अनुसार यह सम्भव है कि कोई प्रत्यय मनुष्य में है और वह उससे अनभिज्ञ हो।

9. ब्रह्मवाद के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा रामानुज और मध्व दोनों को स्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) सगुणत्व मात्र
Solution:

ब्रम्हवाद : * वेद को पढ़ना पढ़ाना ।
* वह सिद्धांत जिसमें शुद्र चेतना मात्र की सत्ता स्वीकार की जाय, अनात्म की सत्ता न मानी जाय, अद्वैतवाद है।
रामानुज का सिद्धांत: विशिष्टाद्वैत (विशिष्ट + अद्वैत) आचार्य रामानुज का प्रतिपादित किया हुआ यह दार्शनिक मत है। इनके अनुसार यद्यपि जगत् और जीवात्मा दोनों कार्यतः ब्रम्ह से भिन्न हैं। फिर भी वे ब्रम्ह से ही उद्भूत हैं और ब्रम्ह से उसका उसी प्रकार का संबंध है। जैसा कि किरणों का सूर्य से है। अतः ब्रह्म एक होने पर भी अनेक हैं।
माधवाचार्य का सिद्धांत : माधवाचार्य ने प्रस्थानत्रयी ग्रंथों से अपने द्वैतवाद सिद्धांत का विकास किया। द्वैत (संस्कृतः द्वैतवाद) वेदांत में एक महत्वपूर्ण विद्यालय है, जो भारतीय दर्शन की 6 दार्शनिक प्रणालियों में से एक है। इसके संस्थापक माधव थे। जिन्हें आनंदतीर्थ भी कहा जाता है।
* ब्रम्हवाद के संदर्भ में सगुणत्व मात्र रामानुज और माधव दोनों को स्वीकार करता है।

10. देकार्त के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?

Correct Answer: (a) देकार्त द्वैतवादी था
Solution:

देकार्त  : देकार्त को द्वैतवादी कहा जाता था। देकार्त के अनुसार धर्म का सम्बन्ध आध्यात्मिक चेतना से है और विज्ञान का सम्बन्ध भौतिक बाह्य जगत से है। ये दोनों जगत पूर्णतः एक दूसरे के विरोधी हैं तथा दोनों स्वतंत्र है। दोनों के कार्यक्षेत्र नितान्त भिन्न हैं। इस प्रकार देकार्त के विज्ञान और धर्म में द्वैत है।
* देकार्त ने जन्मजात ज्ञान के सिद्धांत का तर्क दिया और कहा कि सभी मनुष्य परमेश्वर की उच्च शक्ति के माध्यम से ज्ञान के साथ पैदा हुए थे। यह देका का प्रथम सिद्धांत था।