NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

11. 'ईश्वर का अस्तित्व उसकी पूर्णता में अंतर्निहित होता है।' यह किसका मत है?

Correct Answer: (d) सेंट ऐन्सेल्म
Solution:

"ईश्वर का अस्तित्व उसकी पूर्णता में अन्तर्निहित होता हैं।" यह सेंट ऐन्सेल्म का मत है।
* सेंट एंसलम ग्यारहवीं शताब्दी के महत्वपूर्ण विचार थे। वह तथाकथित "ऑन्टोलॉजिकल तर्क' की खोज और अभिव्यक्ति के लिए दर्शनशास्त्र में सबसे प्रसिद्ध हैं। धर्मशास्त्र में प्रायाश्चित के अपने सिद्धांत के लिए।
* ह्यूम: एलेन ओक्टेवियन ह्यूम ब्रिटिशकालीन भारत में सिविल सेवा के अधिकारी एवं राजनैतिक सुधारक थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक थे। ह्यूम प्रशासनिक अधिकारी और राजनैतिक सुधारक के अलावा माहिर पक्षी-विज्ञानी भी थे। भारतीय पक्षी विज्ञान का पितामह कहा जाता है।

12. हेंगल के अनुसार क्या स्वीकार्य नहीं है?

Correct Answer: (b) ब्रह्मांड मूलतः अव्यवस्थित है।
Solution:

हेंगल: इनके अनुसार किसी को ब्रम्ह ज्ञान तभी होता है। जब पहले ज्ञेय पदार्थ का विषय द्वारा ज्ञाता या विषय का विरोध होता है। तत्पश्चात वह विषय उस विषय से विशिष्ट होकर अपने आप में समाविष्ट होता है।
* हेंगल के अनुसार स्वीकार्य है-
*'सत् एक जीवित विकासशील प्रक्रिया है।
* जो भी सत् है वह बौद्धिक है और जो भी बौद्धिक है सत्है। 'सत् अविभेदित निरपेक्ष नहीं है। वह
* हेंगल एक कट्टर सत्कार्यवादी विचारक थे। उनके अनुसार कार्य अपने कारण में अपनी अभिव्यक्ति से पूर्व भी मौजूद रहता है।
* हेंगल मानवीय स्वतंत्रता को मानते हुए उसे ईश्वरीय स्वतंत्रता द्वारा सीमित स्वीकार करते हैं।

13. प्रथम आकृति में विन्यास (मूड्स) का सही संयोज्य निम्नलिखित में से कौन सा है?

Correct Answer: (e) *
Solution:

(*) : प्रथम कोटि की अभिक्रिया - वह अभिक्रिया जिसकी दर एक अभिकारक की संद्रता के अनुक्रमानुपाती होती है। कोटि की अभिक्रिया कहते है।
Moods : श्रेणीबद्ध प्रस्तावों की व्यवस्था को डिकोड करना ही मनोदशा (Moods) है।
आकृति - मध्य अवधि के प्लेसमेंट को समझना ही आकृति है।
* प्रत्येक मूड - आकृति संयोजन में विशिष्ट नियम होते हैं। जो यह निर्धारित करते हैं कि सिलोगिज्म वैध है या अमान्य है।
* वैध न्यायवाक्य के लिए पदों का सही वितरण आवश्यक है।
* पहला आंकड़ा - AAA, EAE, AII, EIO

14. बी. रसेल का मानना है कि गणित और विज्ञान सहित अधिकांश तर्कवाक्यों को जटिल हैं, क्योंकि :

Correct Answer: (a) वे सरल तर्कवाक्यों के समुच्चय हैं
Solution:

बी. रसेल का मानना है कि गणित और विज्ञान सहित अधिकांश तर्कवाक्य जटिल हैं, क्योंकि वे सरल तर्कवाक्यों के समुच्चय हैं।
* बी. रसेल के लिए तर्क एक सिंथेटिक प्राथमिक विज्ञान है जो सभी प्रकार की संरचनाओं का अध्ययन करता है।
* बट्रेंड रसेल ने लिखा है कि दर्शन “अंतिम प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास है- उन अवधारणाओं और पूर्वधारणाओं की स्पष्टता सुसंगतता या तर्कसंगतता के बारे में प्रश्न जिन्हें गैर-दार्शनिव समझदार या स्पष्ट रूप से सत्य मानते हैं।
* रसेल विशेष रूप से, औपचारिक तर्क और विज्ञान को दार्शनि के प्रमुख उपकरण के रूप में देखते थे।

15. नैयायिकों के अनुसार बर्फ की शीतलता का चार प्रत्यक्ष हम किस सन्निकर्ष द्वारा करते हैं?

Correct Answer: (b) ज्ञान लक्षण
Solution:

नैयायिकों के अनुसार बर्फ की शीतलता का चाक्षुप प्रत्यक्ष हम ज्ञान लक्षण सन्निकर्ष द्वारा करते है।
* नैयायिक कहते हैं कि शब्द और अर्थ में तीन प्रकार के संभावित संबंध बनाते हैं।
(1) शब्द के पास अर्थ की उपस्थिति
(2) अर्थ के पास शब्द की उपस्थिति
(3) दोनों की सापेक्ष भाव से उपस्थिति इंद्रियों के संबंध मात्र से जो पदार्थ का ज्ञान होता है। उसका संज्ञा शब्द से व्यवहार नहीं होता।
* ज्ञान लक्षण : अक्रोध, वैराग्य, जितेन्द्रिय, क्षमा, दया, सर्वजनप्रिय, निर्लोभ, मदभयशोकरहित ये दस ज्ञान के लक्षण हैं।

16. विवेकानंद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सही हैं?

A. उनकी यथार्थता की अवधारणा बहुवादी है
B. उनकी यथार्थता की अवधारणा एकतत्वपरक है।
C. उनकी यथार्थता की अवधारणा विषमजातीय है।
D. उनकी सार्वभौमिक धर्म की अवधारणा सभी धर्मों की विशेषताओं के स्वीकार से उपजी है। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D
Solution:

स्वामी विवेकानन्द का मानना था कि ब्रम्हाण्ड में केवल एक ही आत्मा है। अस्तित्व केवल एक ही है। उन्होंने सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड को पूर्ण एक ही अभिव्यक्ति के रूप में देखा।
* इनका शैक्षिक विचार- वे व्यवहारिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। वे कहते थे कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली में मनुष्य भीरू व कायर बनाती है। एवं अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं करती है।
* स्वामी विवेकानन्द की यथार्थता की अवधारणा एकतत्वपरक है।
* उनकी सार्वभौमिक धर्म की अवधारणा सभी धर्मों की विशेषताओं के स्वीकार से उपजी हैं। * जिस अभ्यास से मनुष्य की इच्छा शक्ति, और प्रकाश संयमित होकर फलदाई बने उसी का नाम है शिक्षा।

17. नोजिक न्याय के सिद्धांत का पक्ष इस रूप में रखते हैं:

Correct Answer: (c) पात्रता
Solution:

नोजिक न्याय के सिद्धांत का पक्ष पात्रता के रूप में रखते हैं।
नोजिक न्याय का सिद्धांत :- नोजिक के अनुसार, जिसने भी इन साधनों के माध्यम से जो कुछ भी हासिल किया है। वह नैतिक रूप से इसका हकदार है। इस प्रकार न्याय का 'हकदार' सिद्धांत कहलाता है। किसी समाज में जोत का वितरण तभी होता है, जब उस समाज में हर कोई उस चीज़ का हकदार होता है, जो उसके पास है।
* नोजिक पुनर्वितरण के विचार को पूरी तरह से खारिज विरोध करता है।
* रॉल्स के सिद्धांत के विकल्प के रूप में, नोजिक ने अपने 'पात्रता' सिद्धांत का सुझाव दिया।

18. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची -Iसूची -II
A. (नीत्शे)I. (ऑन्टोसेंट्रिक)
B. (सार्त्र)II. (वस्तुनिष्ठी सत्य है)
C. (हाइडेगर)III. (रिसेंटमेंट)
D. (कीर्केगार्ड)IV. (अहं का उत्कर्ष)

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A-III B-IV, C-I, D-II
Solution:

नीत्शे : जिस इच्छा को हम चाहते हैं वह है, जो हम चाहते हैं कि वह हमारे आस-पास क्या होता है, न केवल हमारे लूप में हमारे विचारों और भावनाओं सहित, अनन्त ।
A → (iii) रिसंटिमेन्ट (नाराजगी, रोष)
* सार्त्र :- दर्शन शास्त्र के महान व्यक्ति थे। जो चेतना और अहंकार या स्वयं के मुद्दों से जूझते थे। ये ऐसे मामले हैं, जो लम्बे समय से दार्शनिकों को चिंतित करते है और विभिन्न दार्शनिक परंपराओं की सीमाओं को पार करते है।
B →(iv) अहं का उत्कर्ष
हाइडेगर : हइडेगर की मुख्य रूचि ऑन्टोलाजी या अस्तित्व का अध्ययन था। अपने मौलिक ग्रंथ, बीइंग एण्ड टाइम में, उन्होंने मानव अस्तित्व के अस्थायी और ऐतिहासिक चरित्र के संबंध में घटनात्मक विश्लेषण के माध्यम से अस्तित्व तक पहुँचने का प्रयास किया।
C → (1)ऑन्टोसेंट्रिक
* कीर्केगार्ड: यह एक अस्तित्ववादी दार्शनिक के रूप में जाने जाते थे। दार्शनिक, धार्मिक लेखक, व्यंगकार, मनोवैज्ञानिक, पत्रकार, सहित्यिक आलोचक और आमतौर पर अस्तित्ववाद का पिता माना जाता है।
(D) → (II) वस्तुनिष्ठता सत्य 

19. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

निम्नलिखित पर राधाकृष्णन के संबंध में विचार कीजिए।
कथन :। उनका दर्शन अद्वैत वेदान्त का संश्लेषण और निरपेक्ष प्रत्ययवाद का दर्शन है
कथन ॥ : उनका प्रत्ययवाद अध्यात्मवादी और सप्रयोजनवादी है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सत्य हैं
Solution:

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचार
* पुस्तकें वह माध्यम हैं, जिसके द्वारा हम संस्कृतियों के बीच ब्रिज का निमार्ण करते है।
* ज्ञान और विज्ञान के आधार पर ही आनंदमय जीवन संभव है।
* राधाकृष्णन का दर्शन प्रत्ययवादी है और शंकर अद्वैतवाद से अत्यधिक प्रभावित है। अद्वैत वेदान्त की उनकी व्याख्या को नव वेदान्त की संख्या दी जाती है।
* उनका दर्शन अद्वैतवेदान्त का संश्लेषण और निरपेक्ष प्रत्ययवाद का दर्शन है।
* राधाकृष्णन जी का प्रत्ययवाद अध्यात्मवादी और सप्रयोजनवादी है।
* इनके दर्शन को प्रायः नत्य धर्म मीमांसा के रूप में स्वीकार किया जाता है तथा पश्चिम के धर्म मीमांसक राधाकृष्णन को अपना सजातीय मानते है।
* अध्यात्मिकता और वैज्ञानिक ज्ञान का समन्वय ही जीवन को सुख तथा संतोष प्रदान कर सकता है। पश्चिम को यदि आध्यात्मिक पुनर्जागरण की आवश्यकता है तो पूर्व को वैज्ञानिक पुनर्जागरण की।

20. कांट के दर्शन में किसका अर्थ सही नहीं है?

Correct Answer: (e) *
Solution:

(*) : कांट के "महत्वपूर्ण दर्शन" का मूल विचार मानव स्वायन्तता है। उनका तर्क है कि मानवीय समझ प्रकृति के समान्य नियमों का स्रोत है। जो हमारे सभी अनुभवों को संरचित करती है और वह मानवीय तर्क स्वयं को नैतिक कानून देता है। जो ईश्वर, स्वतंत्रता और अमरता में विश्वास का हमारा आधार है।
* कांट के अनुसार शिक्षा वह है जो मनुष्य को भौतिक जगत को समझने में सहायता करे और साथ ही उसमें धर्म के प्रति आस्था और ईश्वर के प्रति विश्वास उत्पन्न करे।
* इनके अनुसार जीवन का उद्देश्य सर्वोच्च अच्छाई की खोज है।