NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

31. 'दैविय प्रदीप्ति के सिद्धांत के विचारक थेः'

Correct Answer: (c) सेंट ऑगस्टाइन
Solution:

दैविय प्रदीप्ति के सिद्धांत के विचारक सेंट ऑगस्टाइन थे।
दैविय सिद्धांत : राज्य की उत्पत्ति के संबंध में प्रचलित यह सिद्धांत सबसे अधिक प्राचीन है। इस सिद्धांत के अनुसार राज्य मानवीय नहीं बल्कि ईश्वर द्वारा स्थापित संस्था है।
* इस सिद्धांत में ईश्वरीय शक्ति और धर्म पर बल दिया गया है। यह तो सर्वविदित है कि सम्पूर्ण ब्रम्हाण्ड पर ईश्वर का ही शासन रहता है।
* दैवीय रोशनी के अनुसार मानव विचार की प्रक्रिया को दैवीय कृपा से सहायता की आवश्यकता होती है। यह मन और ज्ञान मीमांसा के सिद्धांत में प्रकृतिवाद का सबसे पुराना और सबसे प्रभावशाली विकल्प है।

32. निरपेक्ष न्यायवाक्य के आकृति को चिह्नित कीजिए जिसमें मध्य पद मुख्य आधार वाक्य में उद्देश्य का तथा गौण आधार वाक्य में विधेय का स्थान ग्रहण कर लेता है।

Correct Answer: (a) आकृति I
Solution:

किसी भी निरपेक्ष तर्क वाक्य में उद्देश्य पद के बारे में या तो कुछ स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है। अर्थात् कुछ निश्चित बात बताई जाती है। इस निरपेक्ष तर्क वाक्य में सभी मनुष्य मरणशील हैं।
* निरपेक्ष न्यायवाक्य के आकृति 1 जिसमें मध्य पद मुख्य आधार वाक्य में उद्देश्य का तथा गौण आधार वाक्य में विधेय का स्थान ग्रहण कर लेता है।

33. पार्येनाइडीज़ के साथ क्या असंगत है?

Correct Answer: (d) सत् आस्था का विषय है, तर्क का नहीं
Solution:

पारमेनाइड्स दर्शन का मानना है कि मौजूद चीजों की बहुलता, उनके बदलते रूप और गति, एक ही शाश्वत वास्तविकता (अस्तित्व) की उपस्थिति हैं। इस प्रकार पारमेनिडियन सिद्धांत को जन्म मिलता है कि "सभी एक है।"
* पारमेनाइड्स का दर्शन ठहराव की अवधारणा पर आधारित है। जिसका अर्थ है कि ब्रम्हाण्ड निरंतर संतुलन में है, चीजें या तो मौजूद हैं या नहीं हैं, और वे बदल नहीं सकता है।
पारमेनाइड्स के साथ संगत है-
* सत् मूल, स्थायी और अविनाशी है।
* निरपेक्ष पविर्तन असंभव है।
* सत् असत् से नहीं आ सकता है।

34. निम्नलिखि में से कौन-सा एक वस्त्र के रंग का समवायिकरण है?

Correct Answer: (d) वस्त्र स्वयं में
Solution:

किसी विशेष रंग योजना से सम्बन्धित, मिश्रित या मेल खाने वाले सभी भागों या तत्वों के साथ रंग का समन्वय है।
* एक वस्त्र के रंग का समवायिकरण वस्त्र स्वयं में है।
* कपड़ा रंग वे पदार्थ हैं, जिसका उपयोग कपड़ों को रंगने के लिए किया जाता है। रंग कपड़े में समा जाते हैं और उसे रासायनिक रूप से बदल देते है। जिसके परिणाम स्वरूप रंग बार-बार उपयोग के बाद भी स्थायी रूप से बना रहता है। यही वस्त्र के रंग का वस्त्र स्वयं में समवायिकरण है।

35. न्याय दर्शन के अनुसार हम स्पर्श इन्द्रियों के माध्यम से निम्नलिखित के अतिरिक्त उन सभी वस्तुओं का अवबोध कर सकते है जिसे हम अपने चाक्षुष इन्द्रिय अंग द्वारा अवबोध करते हैं, वह है:

Correct Answer: (c) रूप और रूपत्व मात्र
Solution:

स्पर्श इन्द्रियों के माध्यम से शरीर की पांच पारंपरिक इंन्द्रियों में से एक है।इसे स्पर्श के अंगो द्वारा पहचाना जाता है। जो मुख्य रूप से त्वचा में पाये जाते हैं। स्पर्श संवेदना मुख्य रूप से तापमान और दर्द को छोड़कर दबाव, कर्षण और स्पर्श की भावना पर केंद्रित है।
* न्याय दर्शन- भारत के छः वैदिक दर्शनो में से एक दर्शन है। इसके प्रवर्तक ऋषि अक्षपाद गौतम हैं। जिनका न्यायसूत्र इस दर्शन का सबसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध ग्रन्थ है।
* भारत दर्शन में प्रमाण उसे कहते हैं, जो सत्य ज्ञान करने में सहायता करे। * न्यायदर्शन में चार प्रमाण है- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द ।
* प्रत्यक्ष प्रमाण के दो भेद हैं बाह्य और आभ्यंतर
(1) बाह्य प्रत्यक्ष प्रमाण - प्राण, रसना, चक्षु त्वक, और श्रोत्र, इन इंन्द्रियों को, शरीर के बाहर ऊपरी भाग में रहने के कारण बाह्य प्रत्यक्ष प्रमाण कहते है।
(2) आंतर प्रत्यक्ष प्रमाण - मन को शरीर के भीतर आत्मा के साथ रहने तथा भीतरी पदार्थ आत्मा एवं आत्मीय गुणों का ग्राहक होने के कारण आंतर प्रत्यक्ष प्रमाण कहते है।
* प्रत्यक्ष शब्द से इन्द्रिय, तज्जन्य ज्ञान और उनके विषय इन तीनों को बोध होता है। (1) इंद्रियम (2) इंद्रियजन्य ज्ञान (3) इंद्रिय सत्रिकृष्ट विषय
* न्याय दर्शन के अनुसार हम स्पर्श इंद्रियों के माध्यम से रूप और रूपत्व मात्र उन सभी वस्तुओं का अवबोध कर सकते है। जिसे हम अपने चाक्षुष इन्द्रिय अंग द्वारा अवबोध करते हैं।

36. निम्नलिखित पर विचार करें और अष्टांग योग के अंतः अंग को इंगित करने वाले कूट का चयन कीजिए:

A. प्राणायाम, ध्यान
B. धारणा, ध्यान
C. प्रत्याहार, धारणा
D. समधि
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D
Solution:

अष्टांग योग के अंतर्गत प्रथम 5 अंग (यम, नियम, आसन, प्रणायाम तथा प्रत्याहार) 'बहिरंग' और शेष तीन अंग (धारण, ध्यान, समाधि) 'अंतः रंग' नाम से प्रसिद्ध है।
* बहिरंग साधना यथार्थ रूप से अनुष्ठित होने पर ही साधक को अंतःरंग साधन का अधिकार प्राप्त होता हैं।
* 'यम' और 'नियम' वस्तुतः शील और तपस्या के द्योतक है।
* अष्टांग योग का अन्तिम अंग समाधि है।

37. जैनियों के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा प्रत्यक्ष ज्ञान (अपरोक्ष ज्ञान) नहीं है?

Correct Answer: (a) प्रत्यक्ष
Solution:

जैन दर्शन के अनुसार केवल विशुद्धतम ज्ञान को कहते है।
* राज प्रश्नीय सूत्र के अनुसार निग्रंथ 5 प्रकार के ज्ञान मानते है- अभिनिबोधिक ज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनः पर्याय ज्ञान, केवल ज्ञान।
* अवधिज्ञान, मनः पर्यायज्ञान और केवलज्ञान ही प्रत्यक्ष ज्ञान के भेद है।
* प्रत्यक्ष ज्ञान जो इंन्द्रियों और मन की सहायता के बिना ज्ञान होता हैं, वह प्रत्यक्ष ज्ञान कहलाता है।
* प्रत्यक्ष ज्ञान के दो प्रकार है- सकल प्रत्यक्ष और देश प्रत्यक्ष
* इसमें देश प्रत्यक्ष के दो भेद हैं- अवधिज्ञान एवं मनः पर्याय
* सकलप्रत्यक्ष केवलज्ञान को कहते हैं।

38. किसके अनुसार भौतिक द्रव्य का अस्तित्व नहीं होता है?

Correct Answer: (c) वर्कले
Solution:

भौतिकद्रव्य एक प्रकार का पदार्थ है, जिसे भौतिक विधियों द्वारा किसी दूसरे प्रकार के पदार्थों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। अर्थात् पदार्थ द्रव्य का शुद्ध रूप हैं पदार्थ का संघटन सूक्ष्मतम स्तर पर एक समान होता है।
* बर्कल के अनुसार भौतिक द्रव्य का अस्तित्व नहीं होता है।
* देकार्त- देकार्त का आत्मा विषयक सिद्धांत किसी प्रकार के पवित्र ग्रन्थों पर आधारित नहीं हैं। वह परम् तत्व द्रव्य है। जिसको अस्तित्व के लिए किसी अन्य वस्तु के अस्तित्व की आवश्यकता नहीं पड़ती। इस प्रकार परम् तत्व दो हैं- जड़ तत्व अथवा शरीर और मानस तत्व अथवा आत्मा।
* बर्कले- बर्कले के अनुसार आत्मा और उसके प्रत्ययों के अतिरिक्त कोई सत्ता नहीं। हमारे प्रत्यय ही सत्य वस्तुएँ है। वर्कले की प्रसिद्ध उक्ति है- "मैं वस्तुओं को प्रत्यय नहीं बनाता, मैं प्रत्ययों को वस्तु बना रहा हूँ।” प्रत्यय ही सत्य विषय हैं और उसकी सत्ता आत्मा के बाहर नहीं है।

39. न्याय ज्ञानमीमांसा में किस प्रकार का ज्ञान इंद्रियों से परे है?

Correct Answer: (c) निर्विकल्पक प्रत्यक्ष
Solution:

न्याय ज्ञानमीमांसा में निर्विकल्पक प्रत्यक्ष ज्ञान इंद्रियों से परे है।
* वास्तविक ज्ञान, इंद्रियों द्वारा माना जाता है। मूल रूप से पांच इंद्रियाँ दृष्टि, गंध, स्पर्श, सुनना, और स्वाद हैं। पांच ज्ञानइंद्रियाँ → आँख, कान, नाक, जीभ, और त्वचा।
* न्याय दर्शन का अधिकांश ज्ञानमीमांसा से सम्बन्धित हैं लॉक का अनुभववाद दर्शन ज्ञान को इंद्रिय अनुभव से रहित धरातल पर अधिष्ठित करता है। वह अनुभव से परे या अनुभव से रहित ज्ञान की धारणा का निषेध करते हैं
तथा किन्हीं सहज प्रत्ययों या अनुभव निरपेक्ष स्वयंसिद्धों का खण्डन करते है।
* शाब्द, अनुमिति, प्रत्याभिज्ञा ज्ञान इंद्रिय ज्ञान से सम्बन्धित हैं।

40. निम्नलिखित में से पुस्तकों के कौन से युग्म प्लेटो द्वारा लिखे गये हैं?

Correct Answer: (b) क्राइटो और द लॉज
Solution:

प्लेटो की सबसे प्रसिद्ध कृति, द रिपब्लिक, को व्यापक रूप से पश्चिमी दर्शन की आधारशिला के रूप में स्वीकार किया जाता है। उनकी अन्य व्यापक रूप से पढ़ी जाने वाली कृतियों में सिम्पोजियम, क्रिटो क्राइटो, एपोलॉजी, फेडो और द लॉज शामिल है।