Solution:धर्म: एक परम्परा को मानने वालों का समूह है। धर्म मानव को मानव बनाता है। धर्म का अर्थ है- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्गुण आदि।
* धर्म नैतिक रूप से गंभीर होता है।
(B) अर्थ: मनुष्याणां वृत्तिः अर्थः । अर्थात् जो विचार और क्रियाएँ भौतिक जीवन से संबंधित है, उन्हें 'अर्थ' की संज्ञा दी गयी हैं।
* अर्थ भौतिक दृष्टि से सम्पन्न है।
(C) काम : काम आत्मा से संयुक्त मन से अधिष्ठित तत्व, चक्षु, जिव्हा, प्राण तथा इंद्रियों के साथ अपने विषय शब्द, स्पर्श, रूप, रस तथा गंध में अनुकूल रूप से प्रवृत्ति काम है।
* काम सौंदर्यमूलक वांक्षनीय है।
(D) मोक्ष : आत्मा को अमर कहा गया है। यह एक नित्य अनादि तत्व है। जो बंधन अथवा मुक्ति (मोक्ष) की अवस्था में रहती हैं।
* मोक्ष अध्यात्मिक रूप से मुक्त है।
* यह हिन्दू धर्म में मानव जीवन के चार लक्ष्य हैं। जिसे पुरूषार्थ कहते है। विवेकशील मनुष्यों के लक्ष्यों की प्राप्ति ही पुरूषार्थ है।
* मनुष्य के लिए वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है। धर्म, अर्थ,काम, और मोक्ष। महर्षि मनु पुरूषार्थ चतुष्टय के प्रतिपादक है।