NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

41. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

(सूची–I)(सूची–II)
A(धर्म)I. (सौंदर्यमूलक वांछनीय)
B(अर्थ)II. (भौतिक दृष्टि से संपन्न)
C(काम)III. (नैतिक रूप से गंभीर)
D(मोक्ष)IV. (आध्यात्मिक रूप से मुक्त)
Correct Answer: (a) A-III, B-II, C-I, D-IV
Solution:

धर्म: एक परम्परा को मानने वालों का समूह है। धर्म मानव को मानव बनाता है। धर्म का अर्थ है- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्‌गुण आदि।
* धर्म नैतिक रूप से गंभीर होता है।
(B) अर्थ: मनुष्याणां वृत्तिः अर्थः । अर्थात् जो विचार और क्रियाएँ भौतिक जीवन से संबंधित है, उन्हें 'अर्थ' की संज्ञा दी गयी हैं।
* अर्थ भौतिक दृष्टि से सम्पन्न है।
(C) काम : काम आत्मा से संयुक्त मन से अधिष्ठित तत्व, चक्षु, जिव्हा, प्राण तथा इंद्रियों के साथ अपने विषय शब्द, स्पर्श, रूप, रस तथा गंध में अनुकूल रूप से प्रवृत्ति काम है।
* काम सौंदर्यमूलक वांक्षनीय है।
(D) मोक्ष : आत्मा को अमर कहा गया है। यह एक नित्य अनादि तत्व है। जो बंधन अथवा मुक्ति (मोक्ष) की अवस्था में रहती हैं।
* मोक्ष अध्यात्मिक रूप से मुक्त है।
* यह हिन्दू धर्म में मानव जीवन के चार लक्ष्य हैं। जिसे पुरूषार्थ कहते है। विवेकशील मनुष्यों के लक्ष्यों की प्राप्ति ही पुरूषार्थ है।
* मनुष्य के लिए वेदों में चार पुरुषार्थों का नाम लिया गया है। धर्म, अर्थ,काम, और मोक्ष। महर्षि मनु पुरूषार्थ चतुष्टय के प्रतिपादक है।

42. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए और उस कूट को चुनिये जो कहता है जो ऋत् की वैदिक धारणा के साथ संगत नहीं है :

A. ईश्वर ऋत् के नियमों का पालन करते हैं।
B. ऋत् ईश्वर के आदेशों का पालन करता है।
C. खगोलीय पिंड ऋतु के आदेशों का पालन करते हैं।
D. नैसर्गिक परिघटना ऋत के आदेशों का पालन करते हैं।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B
Solution:

ऋतु की वैदिक धारणा : ऋतु एक ब्रम्हाण्डीय शक्ति है। इसके नियमों के अधीन देवता भी हैं। ऋतु और यज्ञ दो अवधारणाएँ है,जो प्रारम्भिक हिंदु सामाजिक और नैतिक विचारों के पूरे ताने-बाने में ताना बाना की तरह चलती हैं। ऋतु का अर्थ उतना ही है जितना ब्रम्हाण्ड की भौतिक व्यवस्था, साथ ही बलिदान का उचित क्रम और दुनिया में नैतिक कानून।
* ईश्वर ऋतु के नियमों का पालन करते हैं।
* खगोलीय पिंड ऋतु के आदेशों का पालन करते हैं।
* नैसर्गिक परिघटना ऋतु के आदेशों का पालन करते हैं।

43. निम्नलिखित में से कौन-सा एक लाइबनित्ज के ब्रह्मांड विचार के साथ असंगत है:

Correct Answer: (c) ब्रह्मांड निप्राण और अक्रिय है।
Solution:

लाइबनित्ज के बम्हाण्ड विचार- इनके अनुसार लीबनिज का मानना था कि अंतरिक्ष पूर्णतः सापेक्ष वस्तु है। अंतरिक्ष सह-अस्तित्व का क्रम है।
* लीबनिज की परिभाषाएँ जर्मन दार्शनिक और गणितज्ञ जिन्होने ब्रम्हाण्ड को स्वतंत्र भिक्षुओं से युक्त माना और जिन्होनें न्यूटन से स्वतंत्र कैलकुलस की एक प्रणाली तैयार की।
* ब्रम्हाण्ड स्वयं में सामंजस्य पूर्ण व्यवस्था है।
* ब्रम्हाण्ड गणितीय और तर्किक सिद्धांतों से संचालित होता है।
* निदर्शनात्मक पद्धति दर्शन शास्त्र की सही पद्धति है।

44. यदि A और B सत्य कथन हैं और X तथा Y असत्य कथन हैं, सुनिश्चित कीजिए कि निम्नलिखित में से कौन सा सत्य है।

Correct Answer: (a) [(A v X) ⊃ Y] ⊃ [(A ⊃ X) . (A ⊃ Y)]
Solution:

A और B सत्य है। X और Y असत्य है।
तो [(A v X) ⊃ Y] ⊃ [(A ⊃ X) . (A ⊃ Y)]

45. निम्नलिखित में से कौन सा इस तर्क वाक्य "कुछ धातुएँ संवाहक होती हैं" का सही प्रतिवर्तन है?

Correct Answer: (d) कुछ धातुएँ गैर-संवाहक नहीं होती हैं
Solution:

इस तर्क वाक्य "कुछ धातुएँ संवाहक होती हैं" का सही प्रतिवर्तन "कुछ धातुएँ गैर-संवाहक नहीं होती हैं।" है।
तर्कवाक्य : एक ऐसा वाक्य होता है,जिसके बारे में सत्यता और असत्यता के प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं। सभी तर्कवाक्य किसी वस्तु द्वारा दूसरे वस्तु का या तो दृढ़ता से दावा करते हैं या उनका खण्डन करते हैं। जिसके बारे में एक अभिकथन होता है। उसे कर्ता कहा जाता है। और वह जो कर्ता के बारे में कहा जाता है। उसे विधेयक कहा जाता है।
* तर्क वाक्य वह वाक्यात्मक उद्घोषणा है, जो यातो सत्य होती है या फिर असत्य परन्तु सत्य असत्य दोनों नहीं।

46. दर्शनशास्त्र की कौन सी पद्धति शब्द नित्यत्व की धारणा का समर्थन करती है?

Correct Answer: (c) पूर्व मीमांसा
Solution:

दर्शनशास्त्र की पूर्व मीमांसा शब्द नित्यत्व की धारणा का समर्थन करती है।
* यह मीमांसा दार्शनिक प्रणाली का एक सिद्धांत है कि वेद अपौरुषेय अमानवीय मूल का है। यह नित्य शाश्वत सार्वभौमिक भी है। नित्यत्व शाश्वतता सार्वभौमिकता है। इसके अलावा, जैसा कि अकसर देखा गया हैं। वेद को एस आब्दा कहा जाता था।
पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा दोनों शब्द ध्वनि तो एक साधारण विस्तार से अपौरुषेयत्व और नित्यत्व भी एस आब्दा से सम्बन्धित है।
पूर्व मीमांसा - इसके संस्थापक जैमिनी थे। इसके अनुसार धर्म सदाचार, नैतिकता या कर्तव्य के रूप में किया जा सकता है। पूर्व मीमांसा स्कूल धर्म के ज्ञान के स्त्रोत को न तो इंद्रिय अनुभव या अनुमान में, बल्कि वेदों के अनुसार मौखिक अनुभूति में खोजता है।

47. वैदिक परंपरा में यज्ञ किया जाता है :

A. जगत के लाभ हेतु
B. ऋत्विक के लाभ हेतु
C. यजमान के लाभ हेतु
D. देवऋण के प्रतिदान हेतु
नीचे दिग गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल C, D
Solution:

हिन्दु धर्म में यज्ञ की परम्परा वैदिक काल से चली आ रही है। हिन्दु धर्म में ग्रंथों में मनोकामना पूर्ति तथा अनिष्ट को टालने के लिए यज्ञ करने के कई प्रसंग मिलते हैं। रामायण व महाभारत में भी अनेक राजाओं ने यज्ञ किये हैं। देवताओं को प्रसन्न करने वे लिए भी यज्ञ किये जाने की परंपरा है।
वैदिक परम्परा में यज्ञ - * यजमान के लाभ हेतु ।
* देवऋण के प्रतिपादन हेतु ।
* यज्ञ मानव जीवन के लिए प्रेरणा दी गई है। यज्ञ ही संसार श्रेष्ठतम कर्म है और संसार का श्रेष्ठतम कर्म यज्ञ है।

48. "ईश्वर अपशुद्ध रूप में चिंतन पर चिंतन है"

Correct Answer: (c) अरस्तू
Solution:

"ईश्वर अपशुद्ध रूप में चिंतन पर चिंतन है" यह आरस्तू का मत है।
* आरस्तू ने ईश्वर को शुद्ध रूप माना, अंतिम कारण के रूप में और प्रमुख प्रस्तावक के रूप में माना है।
* आरस्तू अपने सबसे मुख्य दर्शन तत्वमीमांसा में कहा कि एक अलग और अपरिवर्तनीय अस्तित्व होना चाहिए। जो अन्य सभी प्राणीयों का स्रोत है।

49. न्याय दर्शन की ज्ञानमीमांसा में निम्नलिखित में कौन सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष विषय हो सकता है:

Correct Answer: (d) धूम्र की सभी अवस्थाएँ
Solution:

जिस साधन के द्वारा हम अपने विवक्षित (ज्ञेय) तत्व के पास पहुँच जाते हैं। उसे जान पाते हैं, वही साधन न्याय है। दूसरे शब्दों में, जिसकी सहायता से किसी सिद्धांत पर पहुँचा जा सके, उसे न्याय कहते हैं। प्रमाणों के आधार पर किसी निर्णय पर पहुँचना ही न्याय है। यह मुख्य रूप से तर्कशास्त्र और ज्ञानमीमांसा है।
* न्याय दर्शन में प्रत्यक्ष पहला प्रमाण है। प्रत्यक्ष स्वयं निर्विवाद है। अतः कहा भी गया है कि "प्रत्यक्षे किं प्रमाणम्।
* महर्षि गौतम के अनुसार, प्रत्यक्ष इन्द्रिय और विषय के सन्निकर्ष से उत्पन्न होने वाला वह ज्ञान है। जो अव्यपदेश्य, अन्यभिचार और व्यवसायात्मक होता है।
सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष विषय : सामान्यलक्षण प्रत्यक्ष से सामान्य का ज्ञान होता है। जैसे गोत्व का ज्ञान, धूम्र की सभी अवस्थाएँ सामान्य लक्षण प्रत्यक्ष से होता है।

50. के.सी. भट्टाचार्य के दर्शन को उपयुक्त तरीके से कौन सा युग्म प्रस्तुत करता है?

Correct Answer: (c) वास्तुनिष्ठ चेतना, आध्यात्मिक चेतना और अनुभवातीत चेतना
Solution:

K.C. भट्टाचार्य के अनुसार सैद्धान्तिक चेतना के चार स्तर हैं।
जैसे- अनुभवजन्य विचार, वस्तुनिष्ठ विचार, व्यक्तिपरक या आध्यात्मिक विचार और पारलौकिक विचार ।
* केसी भट्टाचार्य का मानना है कि दर्शन करना, सख्ती से कहें तो, विल्कुल भी सोचना नहीं हैं। बल्कि केवल बोलना है।
* केसी भट्टाचार्य के दर्शन को वस्तुनिष्ठ चेतना, आध्यात्मिक चेतना और अनुभवातीत चेतना के युग्म को प्रस्तुत करता है।