NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

61. "ऐसी इच्छा जिसे कोई भी इच्छा नहीं होती" कांट की सदिच्छा के अनुसार निम्नलिखित में से कौन उपरोक्त विचार को धारण करते हैं?

Correct Answer: (b) जेकोवी
Solution:

ऐसी इच्छा जिसे कोई भी इच्छा नहीं होती" कांट की सदिच्छा के अनुसार जेकोबी भी इस विचार को धारण करते हैं।
* जेकोबी गणितीय प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। ये कांट के विचारों को मानते थे।
* कांट का मानना है कि बुद्धि मानव स्वभाव का आवश्यक तत्व है। तथा इंद्रियपरता मनुष्य के अन्दर पाशविकता का अवशोषण है। वह उसकी वास्तविक प्रकृति के लिए विजातीय है।
* कांट का सिद्धांत नैतिकता न तो मनुष्य की इच्छाओं या भावनाओं से सम्बन्धित होती है। और न ही कार्यों के परिणामों से, नैतिकता का एक मात्र संबंध कर्त्तव्य की चेतना से होता है।
* जैकोबी सिद्धांत की एक उल्लेखनीय विशेषता, विहित परिवर्तन पूरी तरह से एक एकल उत्पन्न करने वाले फंक्शन, S. द्वारा विशेषता है।

62. मीमांसा दर्शन में आनन्द का दुख से अविरत होना, इस रूप में समझा जाता है :

Correct Answer: (c) स्वर्ग
Solution:

मीमांसा दर्शन में आनन्द का दुख से अविरत होना है। स्वर्ग समझा जाता है।
* किसी विषय पर गहराई से किये गये विचार-विमर्श को मीमांसा दर्शन कहते है।
* आनन्द मीमांसा सुख की परिभाषा और जो विषयातीत होकर आत्मा पर आधारित है। इसलिए जीवन की समग्रता एवं गम्भीरता को महसूस करने वालों के लिए ही यह मीमांसा की गई है। स्वर्ग: हिन्दू मान्यताओं के अनुसार ब्रम्हाण्ड के उस स्थान को कहते हैं। जहाँ हिन्दू देवी-देवताओं का वास है।

63. उपरोक्ता कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

नीचे दो कथन दिए गए हैं :
अंतःप्रज्ञा पर इकबाल के संदर्भ में निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
कथना : अंतः प्रज्ञा एक अविश्लेषणीय कार्यान्विति है।
कथन ॥ :अंतः प्रज्ञा में जाता का ज्ञान के साथ एकाकार हो जाता है और उस प्रकार उसकी अनुभूति करता है।

Correct Answer: (a) कथन । और II दोनों सत्य हैं
Solution:

अन्तः प्रज्ञा : बिना तर्क किये और बिना अनुमान के ही ज्ञान प्राप्त करने की क्षमता अन्तः प्रज्ञा कहलाती है। ज्ञान का वह स्रोत जिसके बारे में कुछ कह नहीं सकते।
* इकबाल के विचार के अनुसार, व्यक्ति एक व्यक्ति समाज से अपृथकरणीय है। उसके वास्तविक अहं को समाज में पूर्णता प्राप्त होती है। व्यक्ति का सर्वोच्च उद्देश्य समाज से संयोजन स्थापित करना है।
* अंतः प्रज्ञा एक अविश्लेषणीय कार्यान्विति है।
* अंतः प्रज्ञा में ज्ञाता का ज्ञान के साथ एकाकार हो जाता है और इस प्रकार उसकी अनुभूति करता है।
* कथन I और II दोनों सत्य है।

64. भारतीय दर्शन के किस संप्रदाय में ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए अदृष्ट की घटना का सहारा लिया गया है?

A. साँख्य
B. योग
C. न्याय
D. वैशेषिक
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल C, D
Solution:

भारतीय दर्शन के वैशेषिक और न्याय सम्प्रदाय में ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करने के लिए अदृष्ट की घटना का सहारा लिया गया है।
* कणाद के वैशेषिक सूत्र का पाँचवाँ अध्याय क्रिया की धारणा और प्रयास की जुड़ी अवधारणा से सम्बन्धित है, और प्रकृति की विभिन्न विशेष घटनाओं से लेकर अति संवेदनशील शक्ति, जिसे अदृिष्ट कहा जाता है। अदृष्ट का शाब्दिक अर्थ 'न देखा हुआ।
* वैशेषिक दर्शन में प्रमेयों का विशेष विचार है। इस शास्त्र के अनुसार तत्वों का विचार करने में लौकिक दृष्टि से दूर भी शास्त्रकार जाते है। वैशषिक मत में 7 पदार्थ और 9 द्रव्य हैं।
* न्याय के अर्थ में, यह विचार, अवधारणा या संप्रत्यय है कि लोगों को वह मिले जिसके वे योग्य या पात्र हों।

65. अनेक्ज़ीमेंडर के अनुसार सही क्या है?

Correct Answer: (c) एपीरॉन ब्रह्माण्ड का मौलिक उपादान है।
Solution:

अनेग्जीमेण्डर के अनुसार एपीरॉन ब्रम्हाण्ड का मौलिक उपादान है।
* अनेग्जीमेण्डर- यह थेल्स का शिष्य था। उसने सर्वप्रथम एक बेबीलोनियन यन्त्र नोमोन बनाया जो सूर्य घड़ी का कार्य करता था। इसने ब्रम्हाण्ड विज्ञान को विकसित किया। इसने ब्रम्हाण्ड उत्पत्ति का सिद्धांत और नक्षत्रों का उल्लेख किया। इन्होने बताया की पृथ्वी ब्रम्हाण्ड के मध्य ठोस रूप में है तथा चपटी ना होकर गोलाकार है। इन्होंने पृथ्वी के लम्बाई को चौड़ाई से तीन गुणा अधिक बताया है। और एक मानचित्र भी बनाया।
* विश्व का मानचित्र बनाने वाला पहला भूगोल वेत्ता एनाक्जीमेंडर था।

66. निम्नलिखित में से कौन-सा एक कूट प्लेटो के अनुसार मुख्य सद्‌गुणों को इंगित करता है?

A. प्रज्ञान
B. साहस
C. संयताचार
D. न्याय
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (d) केवल A, B, C, D
Solution:

प्लेटो ने 'चार' प्रमुख सदगुणों की पहचान की है। जो एक खुशहाल व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं और जो एक अच्छे समाज के लिए आवश्यक हैं। उनका यह भी मानना था कि आदर्श राज्य ऐसे ही सद्गुणों वाले लोगों वाला होना चाहिए। चार प्रमुख सद्गुण हैं विवेक, न्याय, संयम और धर्म (साहस)
* प्लेटों के लिए बुद्धिमान व्यक्ति नैतिक वास्तविकता को समझने के लिए दिमाग का उपयोग करता है और फिर अपने दैनिक जीवन में लागू करता है।
(A) विवेक (प्रज्ञान) (B) साहस (धर्म) (C) संयताचार (संयम) (D) न्याय

67. मध्य निम्नलिखित में से किस एक के समर्थन को पूर्णतया अस्वीकार करते हैं?

Correct Answer: (a) संदेह मुक्ति
Solution:

माधव एक प्रसिद्ध केरल गणितज्ञ खगोलज्ञ थे। द्वैतवाद, वेदान्त की तीन प्रमुख दर्शनों में एक है। माध्वाचार्य को वायु का तृतीय अवतार माना जाता है। माध्वाचार्य कई अर्थों में अपने समय के अग्रदूत थे।
* माधवाचार्य की शिक्षाएँ इस आधार पर बनी हैं कि आत्मा और ब्रम्ह के बीच बुनियादी अंतर है। व्यक्तिगत आत्मा ब्रम्ह पर निर्भर है।
* माधवाचार्य विदेह मुक्ति ब्रम्ह जीव भेद मुक्ति, सारूप्य मुक्ति के समर्थन को पूर्णतया स्वीकार किये हैं।
* विदेह मुक्ति मृत्यु के बाद मुक्ति या वस्तुतः शरीर से मुक्ति मोक्ष को संदर्भित करता है।
* सारूप्य मुक्ति परमात्मा के अस्तित्व में विलीन हो जाना। सारूप्य मुक्ति का अर्थ है।

68. कौन सा एम्पेडोक्लस से असंगत है?

Correct Answer: (c) तात्विक कणों की अनगिनत संख्या होती है।
Solution:

एम्पेडोक्लस ने तर्कसंगत दर्शन के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
* ये तत्व कभी भी जगह को बदलने के लिए कभी नहीं रूकते हैं। अब वे सभी एक दूसरे से प्यार से एकजुट होते हैं। अब हर एक संघर्ष में घिरे घृणा से अलग होता है। जब तक वे एकता में एक साथ नहीं आते है।
* मात्र चार तात्विक कण होते है।
* उनके निश्चित गुण होते हैं।
* प्रेम और घृणा की मिथकीय शक्तियाँ चार तात्विक कणों को जोड़ती और अलग करती है।
* वास्तविकता की प्रकृति के मुद्दे पर एम्पेडोक्लस का दृष्टिकोण मानता है। जो स्थिर एम्पेडोक्लस वास्तविक स्थित और स्थायी है, क्योंकि मूल तत्व, या भौतिक कण जो वास्तविकता की वस्तुओं को बनाते हैं जैसे कि पानी, अग्नि, वायु और पृथ्वी अपरिवर्तनीय है।
* एम्पेडोक्लस एक यूनानी दार्शनिक थे। जो अपने इस विश्वास के लिए जाने जाते हैं कि सभी पदार्थ चार तत्वों से बने हैं। अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी ।

69. न्याय दर्शन की ज्ञान मीमांसा में अनुमान की कुछ अवस्थाएँ नीचे दी गई हैं। उन पर विचार करें -

A. साध्य के ज्ञान के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का अभाव
B. साध्य के अभाव के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का अभाव
C. साध्य के ज्ञान के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का भाव
D. साध्य के ज्ञान के अभाव के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का भाव
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल B, C, D
Solution:

अनुमान प्रमाण की वह विधि जो केवल अनुमान पर आधारित हो अनुमान कहलाती है। अनुमान दर्शन और तर्कशास्त्र का पारिभाषिक शब्द है। भारतीय दर्शन में ज्ञानप्राप्ति के साधनों का नाम प्रमाण है।
* अनुमान भी एक प्रमाण है। चार्वाक दर्शन को छोड़कर प्रायः सभी दर्शन अनुमान को ज्ञानप्राप्ति का एक साधन मानते है। अनुमान के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त होता है, उसका नाम अनुमिति है।
* प्रमाणों के आधार पर किसी निर्णय पर पहुँचना ही न्याय है। यह मुख्य रूप से तर्कशास्त्र और ज्ञान मीमांसा है।
* अनुमान प्रमाण के दो भेद है- स्वार्थानुमान और परानुमान जिस अनुमान से अपने संशय का निराकरण या अपने आप को साध्य का निश्चय होता है, उसे स्वार्थानुमान कहते हैं।
जिस अनुमान से अन्य व्यक्ति जिज्ञासु, प्रतिवादी या मध्यस्थ के संशय का निराकरण या साध्य का निश्वर होता है, उसे 'पगर्थानुमान' कहा जाता है।
* न्याय दर्शन की ज्ञान मीमांसा में अनुमान अवस्था को इंगित करता है-
* साध्य के अभाव के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का अभाव ।
* साध्य के ज्ञान के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का भाव
* साध्य के ज्ञान के अभाव के साथ अनुमान करने के लिए इच्छा का भाव।

70. माध्यमिक दार्शनिकों के अनुसार शून्यता है:

Correct Answer: (d) चतुष्कोटिमुक्त
Solution:

शून्यवाद या शून्यता बौद्धों की महायान शाखा माध्यमिक नामक विभाग का मत या सिद्धांत है। जिसमें संसार को शून्य और उसके सब पदार्थों को सत्ताहीन माना जाता है। माध्यमिक न्याय' ने शून्यवाद को दार्शनिक सिद्धांत के रूप में अंगीकृत किया है। इसके अनुसार ज्ञेय और ज्ञान दोनों ही कल्पित हैं।
* माध्यमिक दार्शनिकों के अनुसार शून्यता चतुष्कोटिमुक्त है।