NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

71. ए.जे. अय्यर के अनुसार नैतिक कथन अप्रमाणनीय हैं। और बिना अर्थ के हैं। क्योंकि-

Correct Answer: (c) वे मनोवृत्ति को प्रदर्शित करने और सत्य को न कहने के लिए होते हैं।
Solution:

A.J.अय्यर के अनुसार ज्ञान यह है कि जो ज्ञात है। वह सत्य होना चाहिए। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, तबभी नहीं, जब हम इसमें यह शर्त भी जोड़ दें कि व्यक्ति जो जानता है। उसके बारे में उसे पूरी तरह से अश्वस्त होना चाहिए।
* इनका आध्यात्मिक कथन है कि पारलौकिक वास्तविकता के बारे में कथन की वस्तुनिष्ठ वैधता नहीं है। इसलिए वे अर्थहीन होते हैं।
* A.J. अय्यर के अनुसार नैतिक कथन अप्रमाणनीय है और बिना अर्थ के हैं। क्योंकि वे मनोवृत्ति को प्रदर्शित करने और सत्य को न कहने के लिए होते हैं।

72. किसकी दर्शनशास्त्रीय अवधारणा तर्काभास में परिणामित होती है?

Correct Answer: (c) कांट
Solution:

(1) हयूम: ये एक ब्रिटिश राजनीतिक सुधारक, पक्षी विज्ञानी, सिविल सेवक और वनस्पतिशास्त्री थे। जिन्होंने ब्रिटिश भारत में काम किया था। उन्होंने भारतीयों के द्वार स्वशासन के विचारों का समर्थन किया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेश की स्थापना की।
(2) देकार्त : देका स्पष्ट कहते हैं कि हम ये नहीं कहते कि हमारे मन में ईश्वर की भावना है। इसलिए ईश्वर की सत्ता है, बल्कि ईश्वर है, इसलिए हमारे अन्दर ईश्वर की भावना है।
* देकार्त ने प्रत्येक बात को बुद्धि एवं तर्क से निश्चित करने का प्रयास किया। जिसकी झलक अन्य बुद्धिवादी दार्शनिकों में ही नहीं बल्कि अनुभववादी दार्शनिकों में भी देखने को मिलती है।
(3) कांट : नैतिकता न तो मनुष्य की इच्छाओं या भावनाओं से सम्बन्धित होती है और न ही कार्यों के परिणामों से, नैतिकता का एकमात्र संबंध कर्तव्य की चेतना से होता है।
(4) हेगेल : किसी को भी बाह्य ज्ञान तभी होता है,
जब पहले ज्ञेय पदार्थ का विषय द्वारा ज्ञात या विषयी का विरोध होता है।
* जिन्होंने मौलिक रूप से प्रभावशाली विचार प्रणाली का निर्माण किया।

73. द्वेत वेदान्त में मोत्र की अवस्था के संदर्भ में सही अनुक्रम बताइए:

A. सामीप्य
B. सालोक्य
C. सारुप्य
D. सापुज्य
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) B, A, C, D
Solution:

द्वैत वेदान्त माध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित तथा उनके अनुयायियों द्वारा उपबृंहित द्वैतवाद रामानुज के विशिष्ट द्वैतवाद से काफी मिलता-जुलता है।
* ईश्वर के पास वायु के ही माध्यम से पहुँचा जा सकता है। ईश्वर का अनुग्रह सबको नहीं मिलता वह कुछ लोगों को मुक्ति के लिए चुनता है। जिनको वह उनकी भक्ति के अनुसार मोक्ष देता है, वे ईश्वर में लीन नहीं होते। उनको ईश्वर की सन्निधि मिलती है। मुक्त जीव ईश्वर की समानता भी नहीं प्राप्त कर सकते। भक्ति की तीव्रता के अनुसार मुक्ति चार प्रकार की मानी गई है।
(1) सालोक्य (2) सामीप्य (3) मारूप्य (4) सायुज्य ।
* यही द्वैत वेदांत में मोक्ष की अवस्था का सही क्रम है।

74. सेंट थॉमस एक्विनॉस के साथ क्या असंगत है?

Correct Answer: (d) अध्यात्म विद्या और दर्शनशास्त्र का एकात्मीकरण
Solution:

सेंट थॉमस एक्विनास ने ग्रीक दर्शन और ईसाई सिद्धांत को मिश्रित करते हुए सुझाव दिया कि तर्कसंगत सोच और प्रकृति का अध्ययन रहस्योद्घाटन की तरह, ईश्वर से सम्बन्धित सत्य को समझने के वैध तरीके थे। इनके अनुसार ईश्वर स्वयं को प्रकृति के माध्यम से प्रकट करता है। इसलिए प्रकृति के अध्ययन करना ईश्वर का अध्ययन करना है।
* सेंट थॉमस एक्विनास के साथ संगत हैं-
* आत्मा की अमरता के लिए तर्क
* तर्क और आस्था के मध्य सम्बन्ध का विश्लेषण
* आरस्तूवादी प्रत्ययों का ईसाई समापन ।

75. "ज्ञान जैसी इस प्रकार की कोई वस्तु नही है जो व्यवहार्य न हो, क्योंकि इस प्रकार ज्ञान जैसा कोई ज्ञान नहीं होता है"

उपरोक्त युक्ति में निम्नलिखित कौन-सा एक दोष पाया जाता है?

Correct Answer: (a) आत्माश्रय दोष
Solution:

(1) आत्माश्रय दोष : एक तर्कदोष, जो तब उत्पन्न होता है। जब निश्कर्ष आधारवाक्यों में पहले से ही निहित होता है। J.S.मिल ने एरिस्टॉटल के न्यायवाक्य में उपर्युक्त दोष का निरूपण किया। * ज्ञान जैसी इस प्रकार की प्रकार की कोई वस्तु नहीं है,जो व्यवहार्य न हो, क्योंकि इस प्रकार ज्ञान जैसा कोई ज्ञान नहीं होता है"। इसमें आत्माश्रय दोष है।
(2) अनेकार्थक दोष: शब्द के अर्थ में दोष हों।
(3) वाक्य छल: किसी वाक्य का वक्ता के अभिप्राय से भिन्न अर्थ कल्पित किया जाता है, वह वाक छल कहलाता है।
(4) अज्ञानयुक्त युक्ति दोष : यह दोष तब होता है, जब कोई किसी के तर्क करने वाले व्यक्ति के किसी पहलू पर अप्रासंगिक रूप से हमला करता है।

76. डिजाइन की समग्रता एवं एकता का निर्धारण निम्न के द्वारा नहीं होता है :'

Correct Answer: (a) केवल अंतर्निहित कर्ता द्वारा
Solution:

समग्र डिजाइन: जब डिजाइन टीमें उपयोगकर्ता अनुभव डिजाइन में समग्र डिजाइन करती है।
* एकता की भावना पैदा करने के लिए एक रचना में अलग-अलग हिस्सा के एक साथ काम करने में है।
* योजना के अनुसार बनाना, फैशन करना, क्रियान्वित करना या निर्माण करना।
* डिजाइन की समग्रता का निर्धारण → * केवल अंतर्निहित कर्ता द्वारा होता है।
* अंतनिर्हित कर्ता और वस्तु दोनों के द्वारा
* न तो अन्तर्निहित कर्तों द्वारा न ही अतर्निहित वस्तु द्वारा होता है।

77. देश और काल इंद्रियानुभविक रूप से सत् है। लेकिन प्रागनुभविक रूप से आदर्श परक होते हैं?

Correct Answer: (b) कांट
Solution:

कांट समय और स्थान का वर्णन न केवल आनुभाविक रूप से वास्तविक बल्कि पारलौकिक रूप से आदर्श कांट का तर्क है। कि सचेत विषय अनुभव की वस्तुओं को उस रूप में नहीं पहचानता है। जैसे वे अपने आप में नहीं हैं, बल्कि केवल उसी तरह से वे हमें हमारी संवेदनशीलता की शर्तों के तहत दिखाई देते है।
* देश और काल इंद्रियानुभविक रूप से सत है, लेकिन प्रागनुभविक रूप से आदर्श परक होते हैं। यह कांट का दृष्टिकोण है।

78. ज्यां पॉल सार्त्र के अनुसार:

Correct Answer: (c) चेतना में अहं होता है
Solution:

ज्यां पॉल मात्र के अनुसार चेतना में अहं होता है।
* सार्व ने अस्तित्ववाद को मानव की स्वतंत्रता के साथ जोड़ा है। सार्व के अनुसार मानव को अपने आप पर, दूसरों के साथ और दुनिया के साथ एक पूर्ण जिम्मेदारी होने की शर्त के साथ, बिल्कुल स्वतंत्र होना चाहिए।
* व्यक्तिगत संतुष्टि की खोज ही जीवन जीने का एक मात्र सार्थक तरीका हैं।
* इनका यह मानना था कि स्वतंत्र प्राणी के रूप में, लोग स्वयं के सभी तत्वों, अपनी चेतना और अपने कार्यों के लिए जिम्मेदार है।

79. निम्नलिखित पर विचार कीजिए और उस कूट को चुनिए जो केवल चार्वाक मत को स्वीकार्य तथ्यों को इंगित करते हैं :

A. पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु
B. सुखवाद
C. स्यादवाद
D. भूतचैतन्यवाद
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल B, D
Solution:

चार्वाक दर्शन के अनुसार पृथ्वी, जल, तेज तथा वायु ये चार ही तत्व सृष्टि के मूल कारण हैं। इनके विपरित चार्वाक दर्शन केवल चार तत्वों को मानता है। चावक पृथ्वी, जल, वायु, और अग्नि इन चार महाभूतों को स्वीकार करते हैं। आकाश का प्रत्यक्ष नहीं होता।
* चार्याक जो कुछ बाहरी इंद्रियों से दिखाई देता है, अनुभूत होता है। उसी की सत्ता को स्वीकार करते है।
* चार्वाक दर्शन के अनुसार मृत्यु ही मोक्ष है। मृत्यु के पश्चात कुछ भी नहीं है, ऐसा वे कहते हैं। वे परलोक और पूनर्जन्म को स्वीकार नहीं करते हैं।
चार्वाक मानते हैं-  * पृथ्वी, तेज, वायु, जल तत्व हैं।
* उनके कारण चैतन्य है।
* चैतन्यविशिष्ट शरीर ही पुरूष है।
* काम अर्थ पूरुषार्थ है।
* मृत्यु मोक्ष है।
* चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम् उद्देश्य मानता हैं। चार्वाक का मूल मंत्र है- खाओं, पियो और मौज करो।
* भूत चैतन्यवाद पृथ्वी, जल, तेज, वायु के सहयोग से ही शरीर में चैतन्य प्राप्त करता है।

80. सूची- I का सूची - II से मिलान कीजिए

(सूची–I)(सूची–II)
A(सोफिस्ट)(अणुवाद)
B(ल्यूसिप्पस एवं डेमोक्रिटस)(ज्ञान असंभव है)
C(प्लेटो)(विशुद्ध कर्म)
D(सेंट थॉमस एक्विनास)(गणराज्य का आदर्श)

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) A-II, B-I, C-IV, D-III
Solution:

(A) सोफिस्ट वह व्यक्ति होता है,जो चतुर, लेकिन भ्राकम और आमक तक से तर्क करता है। प्राचीन यूनानी दर्शन काल में ज्ञानाश्रयी दार्शनिक ही सोफिस्ट थे। इनका मानना था कि ज्ञान असम्भव है।
(B) ल्यूसिपस के और डेमोक्रिट्स सबसे पहले यूनानी परमाणु विज्ञानी थे। परमाणु सिद्धांत को प्रवर्तक, ल्यूसिपस को पहले क्रम का एक काल्पनिक विचार माना जाता है। लेकिन डेमोक्रिट्स के इसके विस्तृत अनुप्रयोग पर काम करने का श्रेय दिया जाता है। ये दोनों अणुवाद के समर्थक हैं।
(C) प्लेटो का मानना था कि वास्तविकता एक पूर्ण आदर्श का अपूर्ण प्रतिबिंब है। जिसे रूप कहा जाता है। कोई राज्य उस समय आदर्श राज्य का रूप लेता है, जब उसका शासन सर्वाधिक ज्ञानी और बुद्धिमान व्यक्तियों के द्वारा किया जाता है। तभी गणराज्य का आदर्श होगा।
(D) सेंट थॉमस एक्विनास स्कोलास्टिक दार्शनिकों में सबसे महान थे। इन्होनों कई दार्शनिक और धार्मिक सवालों के जबाब दिये और आस्था और ज्ञान के बीच कई विरोधाभासों को दूर किया। इन्होने कई विशुद्ध कर्मों को दूर करने का विचार दिया है।