Solution:चार्वाक दर्शन के अनुसार पृथ्वी, जल, तेज तथा वायु ये चार ही तत्व सृष्टि के मूल कारण हैं। इनके विपरित चार्वाक दर्शन केवल चार तत्वों को मानता है। चावक पृथ्वी, जल, वायु, और अग्नि इन चार महाभूतों को स्वीकार करते हैं। आकाश का प्रत्यक्ष नहीं होता।
* चार्याक जो कुछ बाहरी इंद्रियों से दिखाई देता है, अनुभूत होता है। उसी की सत्ता को स्वीकार करते है।
* चार्वाक दर्शन के अनुसार मृत्यु ही मोक्ष है। मृत्यु के पश्चात कुछ भी नहीं है, ऐसा वे कहते हैं। वे परलोक और पूनर्जन्म को स्वीकार नहीं करते हैं।
चार्वाक मानते हैं- * पृथ्वी, तेज, वायु, जल तत्व हैं।
* उनके कारण चैतन्य है।
* चैतन्यविशिष्ट शरीर ही पुरूष है।
* काम अर्थ पूरुषार्थ है।
* मृत्यु मोक्ष है।
* चार्वाक दर्शन सुख को ही जीवन का परम् उद्देश्य मानता हैं। चार्वाक का मूल मंत्र है- खाओं, पियो और मौज करो।
* भूत चैतन्यवाद पृथ्वी, जल, तेज, वायु के सहयोग से ही शरीर में चैतन्य प्राप्त करता है।