NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

81. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (Asseriton A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में:

अभिकथन A: भ्रामक संकेत एक अनौपचारिक दोष है जिसमें ध्यान को विचार-विमर्श वाले मुद्दे से जान बूझकर विक्षेपित कर दिया जाता है
कथन R: प्रतिपक्षी की स्थिति के मिथ्या निरूपण में भ्रामक संकेत की प्रभावशीलता विद्यमान होती है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A is correct but R is not correct A सही है लेकिन R सही नहीं है
Solution:

एक भ्रामक संकेत एक असंगत बिष्कर्ष दोष है। जिसमें प्रतिपक्षी की स्थिति को अस्पष्ट करने के लिए तर्क में एक विकर्षण तत्व पेश किया जाता है।
* भ्रामक संकेत का उपयोग अक्सर दर्शकों को हेरफेर करने या भ्रामक धोखा देने के लिए किया जाता है। जिससे उत्पादक, केंद्रित बातचीत करना मुश्किल हो जाता है।
* भ्रामक संकेत एक अनौपचारिक दोष है। जिसमें ध्यान को विचार विमर्श वाले मुद्दे से जान बूझकर विक्षेपित कर दिया जाता है।
* अनौपचारिक भ्रम प्राकृतिक भाषा में गलत तर्क को दर्शाती है।
* A सही है, लेकिन R सही नहीं है।

82. निम्नलिखित पर विचार कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही कूट का पता लगाइएः जब कोई कर्म आचरण के नैतिक नियम अथवा विधि की पुष्टी करता है तो इसे कहा जाता है :

Correct Answer: (b) सही
Solution:

जब कोई कर्म आचरण के नैतिक नियम अथवा विधि की पृष्टी करता है, तो इसे 'सही' कहा जाता है।
नैतिकता - किसी व्यक्ति या व्यवहार को नैतिक अर्थ में सही-सच्चा, निष्पक्ष और ईमानदार बताती है। नैतिकता मनुष्य का वह गुण है, जो उसे मानव बनाता है।
* नैतिक शिक्षा छात्रों के चरित्र निर्माण का एक माध्यम है, क्योंकि चरित्र ही मनुष्य के जीवन का मूल आधार है। इसलिए चरित्र की रक्षा करना नैतिक शिक्षा का मूल उद्देश्य हैं।
* इसके नियम में सूचित सहमति, सत्य कथन और गोपनीयता स्वायत्तता के सिद्धांत उत्पन्न होते है।
* इसके 4 मुख्य सिद्धांत उपकार, अहित, स्वायत्तता और न्याय है।

83. "अस्थाई परिभाषाओं के उत्पादन में आगमन की प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।" यह मत किसका है?

Correct Answer: (b) सुकरात
Solution:

"अस्थाई परिभाषाओं के उत्पादन में आगमन की प्रक्रिया समाप्त हो जाती है।" यह मत सुकरात है।
* सुकरात के विचार- अगर आप मजबूत बनना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी कमजोरीयों को दूर करें।
* सुकरात कहते है मनुष्यों में सबसे बुद्धिमान वह व्यक्ति है, जो अपनी अज्ञानता से अवगत है। सुकरात की नैतिक बौद्धिकता का चरित्र यूडेमोलॉजिकल है। सुकरात का मानना है कि अच्छे जीवन के लिए तर्क आवश्यक है।

(1) प्रोटैगोरस : प्रोटैगोरस एक और यूनानी दार्शनिक हैं, जिन्होंने मानव और संस्कृति के बारे में ज्ञान में योगदान दिया है। उसकी राय में "मनुष्य सभी चीजों का मापक है। वह सापेक्षवाद सिद्धांत को प्रस्तावित करने वाले पहले व्यक्ति थे।
(3) थेसीमैच्यूस : एक नैतिकवादी अहंकारी बन जाता है। जो इस बातपर जोर देता है कि न्याय दूसरे की भलाई है और इस प्रकार किसी के स्वार्थ की पूर्ति के साथ असंगत है।
(4) जॉर्जिअस: ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए बनाया गया एक ग्राहक सहायता मंच (गोर्गियास) है।

84. निम्नलिखित में से कौन सा स्पिनोजा को अस्वीकार्य है?

Correct Answer: (b) ईश्वर में व्यक्तित्व और चेतना है।
Solution:

स्पिनोजा : सम्पूर्ण सृष्टि ईश्वर से ही व्याप्त है। स्पिनोजा का मानना है कि ईश्वर ब्रम्हाण्ड के प्राकृतिक और भौतिक नियमों का योग है और निश्चित रूप से कोई व्यक्ति इकाई या निर्माता नहीं है।
* स्पिनोजा अंतर्ज्ञान द्वारा प्राप्त ज्ञान को सबसे शक्तिशाली और वांछनीय प्रकार का मानते है। * स्पिनोजा ने समझा, ईश्वर एक अनन्त पदार्थ है, जिसके पास अनंत संख्या में गुण हैं। जिनमें से प्रत्येक उसकी प्रकृति के शाश्वत पहलू को व्यक्त करता है।
* स्मिनोजा ने स्वीकार किया है-
* प्रत्येक वस्तु ईश्वर से अनुप्राणित है।
* ब्रम्हाण्ड के साथ ईश्वर का तादाम्य ।
* ईश्वर के बौद्धिक प्रेम में हमारा सर्वोच्च शुभ सम्मिलित है।

85. हेराक्लिटस निम्नलिखित में से किस एक के साथ संबद्ध था?

Correct Answer: (b) परिवर्तन की समस्या
Solution:

हेराक्लिटस का सिद्धांत : हेराक्लिटस ने माना कि दुनिया एक सुसंगत प्रणाली के रूप में मौजूद है। जिसमें एक दिशा में परिर्वतन अंततः दूसरे में संबंधित परिवर्तन से संतुलित होता है। हेराक्लिटस का विचार, जीवन में एक मात्र स्थिरांक परिवर्तन है। इसकी प्रसिद्ध कहावत है कि "कोई भी एक ही नदी में दो बार कदम नहीं रखता"।
* हेराक्लिटस परिवर्तन समस्या से सम्बन्ध था।

86. नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में :

अभिकथन A: न्याय दर्शन के अनुसार हम एक ही समय में दो वस्तुओं का अनुभव नहीं कर सकते।
कारण R: न्याय दर्शन के अनुसार परिणाम में मनस आण्विक होता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही हैं और R,A की सही व्याख्या है
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार ज्ञान का अधिकरण होने पर भी जीवात्मा स्वभाव से ज्ञान रहित है। अर्थात् स्वभावतः वह जड़ है। इसमें स्वभाव से चैतन्य नहीं है। मन के विशेष संयोग से उसमें ज्ञान उप्तन्न होता है। ज्ञान आत्मा का आगन्तुक धर्म है। न्याय दर्शन में चार प्रमाण है- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द ।
* न्यायदर्शन के अनुसार हम एक ही समय में दो वस्तुओं का अनुभव नहीं कर सकते।
* A और R दोनों सही हैं और R.A की सही व्याख्या है।

87. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित में तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में:

अभिकथन A: प्रभाकर की ज्ञानमीमांसा में अख्याति को कोई स्थान नहीं है
कारण R: प्रभाकर की ज्ञानमीमांसा में असत्य संज्ञान के लिए कोई स्थान नहीं है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
Solution:

प्रभाकर दर्शन ज्ञान के सबसे विश्वासनीय स्त्रोत के रूप में धारणा को पहचानते है और ज्ञान के 5 स्रोत पर विचार किये हैं।
(1) धारणा (2) अनुमान (3) तुलना और सादृश्यता (4) साक्ष्य (5) प्रकल्पन/अभिधारणा
* प्रभाकर के अनुसार धारणा हमेशा प्रत्यक्ष और तत्काल अनुभूति होती है। दूसरी ओर अनुमान और स्मृति हमेशा अप्रत्यक्ष संज्ञान होते है। धारणा में वस्तु, ज्ञान, स्वयं ज्ञाता ज्ञान सभी एक साथ प्रकट होते है।
* प्रभारक की ज्ञान मीमांसा में असत्य संज्ञान के लिए कोई स्थान नहीं है।
* चित्त को किसी एक विचार में बांध लेने कि क्रिया को धारणा कहा जाता है।
* A सही नहीं है, लेकिन R सही है।

88. किसके अनुसार अलक्षित और अलक्ष्य सत्व अस्तित्ववान नहीं हो सकते?

Correct Answer: (c) बर्कले मात्र
Solution:

बर्कले के अनुसार अलक्षित और अलक्ष्य सत्व अस्तित्ववान नहीं हो सकते है। बर्कले के अनुसार चीजें केवल दो प्रकार की होती हैं: आत्माएँ और विचार। आत्माएँ सरल सक्रिय प्राणी हैं, जो विचारों का उत्पादान और अनुभव करती है। विचार निष्क्रिय प्राणी हैं, जो उत्पन्न होते हैं और समझे जाते हैं। बर्कल के ज्ञानमीमांसा सिद्धांत को अभौतिकवाद कहा जाता हैं। इस सिद्धांत में नकारात्मक थीसिस शामिल है, कि भौतिक पदार्थ या सब्सट्रेट नहीं है। और हो भी नहीं सकते है और सकारात्मक थीसिस है, कि निकायों का अस्तित्व उनके बोध में निहित है।

89. न्याय दर्शन के अनुसार निम्नलिखित का परीक्षण कीजिए और सही ढंग से अनुमान के बारे में इंगित करने वाले कूट का चयन कीजिए: अनुमानः मणिमयः पर्वतो वह्निमान धूमात्

Correct Answer: (b) आश्रयासिद्ध हेत्वाभास
Solution:

न्यायदर्शन के प्रवर्तक ऋषि अक्षपाद गौतम है। जिनका न्याय सूत्र इस दर्शन का सबसे प्राचीन एवं प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसमें चार मुख्य प्रमाण है- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान एवं शब्द ।
* अनुमानः मणिमयःपर्वतो वहिमान धूमात, आश्रयासिद्ध हेत्वाभास को इंगित करता है।
* अनुमान प्रमाण से उन सभी पदार्थों का ज्ञान किया जाता है, जो इंद्रिय द्वारा ज्ञात होने की योग्यता रखते हुए भी दूरस्थ या अविद्यमान होने के कारण इंद्रिय से ज्ञात नहीं होते।
न्याय दर्शन के पाँच अवयव माने गये है- प्रतिज्ञा, हेतु, उदाहरण, उपनय और निगमन ।

(1) पर्वतो वहिमान् ⇒ प्रतिज्ञा (2) धूमात् ⇒ हेतु (3) तथा चायम् ⇒ उपनय (4) यो यो धूमवान स स वहिमानं ⇒ उदाहरण (5)तस्माद् वहिमान् ⇒ निगमन ।
* इसी पंचवयवात्मक वाक्य को वात्स्यायन ने परम न्याय कहा है।
* हेत्वाभास- जिसके ज्ञान से अनुमिति उसके कारण भूत व्याप्तिज्ञान या पक्षधर्मताज्ञान का प्रतिबंध होता है। उसे हेतुगदोष के अर्थ में हेत्वाभास कहा जाता है।

90. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में:

अभिकथ I : रूढ़धारणाओं की रचना में सदोष आगमन का दोष निहित होता है।
कारण R : रूढ़धारणाएँ अविचारित सामान्यीकरण होती हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही हैं और R,A की सही व्याख्या है।
Solution:

* रूढ़धाराओं की रचना में सदोष आगमन का दोष निहित होता है।
* रूढ़धारणाएँ अविचारित सामान्यीकरण हेती हैं।
* तथ्यों का संकलन करने के माध्यम को सामान्यीकरण कहते है। अनुसंधानकर्ता तथ्यों को सही दीशा में प्रक्षेपित करने का प्रयास करता है।
* A और R दोनों सही हैं और R, Aकी सही व्याख्या है।