NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)

Total Questions: 100

1. चार्याक दर्शन के अनुसार पानी अधोगामी (नीचे की ओर) बहता है :

Correct Answer: (d) पानी के स्वभाव (प्रकृति) के कारण
Solution:

चार्वाक दर्शन के अनुसार, पानी अपनी प्रकृति (स्वभाव) के कारण अधोगामी (नीचे की ओर) बहता है। भारतीय दार्शनिक परम्परा में चावक दर्शन को नास्तिक दर्शन की श्रेणी में रखा जाता है। चार्वाक दर्शन अनीश्वरवादी है। वह प्रत्यक्ष को एक मात्र प्रमाण मानता है, इसकी उक्ति है कि 'प्रत्यक्षमेव प्रमाणम' । प्रत्यक्ष के बाहर वह किसी भी वस्तु को प्रमाण नहीं मानता है चार्वाक के अनुसार प्रत्यक्ष द्वारा ज्ञेय विषय ही एकमात्र सत्य है।

2. किस संप्रदाय (मत) के अनुसार स्मृति एक प्रमाण के रूप में मान्य है?

Correct Answer: (c) जैन
Solution:

जैन मत के अनुसार स्मृति एक प्रमाण के रूप में मान्य है। जैन दर्शन ज्ञान के दो प्रकार मानता है- अपरोक्ष ज्ञान और परोक्ष ज्ञान । अपरोक्ष ज्ञान तीन प्रकार का होता है- अवधि ममः पर्याय तथा केवल ज्ञान। परोक्ष ज्ञान दो प्रकार का होता है- मति और श्रुत। मति ज्ञान उसे कहते है। जो इन्द्रिय और मन के द्वारा प्राप्त होता है तथा श्रुत ज्ञान उसे कहते है जो सुने हुए वचनों तथा प्रामाणिक ग्रंथों से प्राप्त होता है।

3. वैशेषिकों के अनुसार इस क्षण में भूमि पर घट का अभाव किस प्रकार का अभाव है?

Correct Answer: (a) अत्यन्तभाव
Solution:

वैशेषिक दर्शन के अनुसार, इस क्षण में भूमि पर घट का अभाव अत्यन्तभाव है। दो वस्तुओं के संबंध का अभाव जो भूत, वर्तमान और भविष्य में रहता है अत्यंतभाव कहलाता है जैसे- रूप का वायु में अभाव । अभाव वैशेषिक दर्शन में सातवाँ पदार्थ है अन्य छः पदार्थ जो भाव पदार्थ हैं क्रमशः द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष और सामान्य निरपेक्ष हैं।

4. निम्नंकित किस दर्शन संप्रदाय का यह मत है कि ज्ञान स्वतः प्रमाणित होता है किंतु इसकी अप्रमाण्यता बाह्य उपाधि (अवस्था) के कारण होती है?

Correct Answer: (c) मीमांसा
Solution:

मीमांसा दर्शन का मत है कि ज्ञान स्वतः प्रमाणित होता है किन्तु सभी अप्रमाणयता बाह्य उपाधि के कारण होती है। कुमारिल का मत है कि ज्ञान का प्रमाण उसके बोध स्वरूप होने से है और ज्ञान का अप्रमाण्य तब होता है जब उसके कारणों के दोषों का ज्ञान होता है।

5. निम्नांकित में से किसका यह मत है कि ज्ञाता, ज्ञेय एवं ज्ञान, संज्ञान के प्रत्येक व्यवहार (कार्य) में युगपद (सहकालिक रूप में) प्रकट होते हैं?

Correct Answer: (b) प्रभाकर
Solution:

प्रभाकर का मत है, कि ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान-संज्ञान के प्रत्येक व्यवहार में युगपद (सहकालिक) रूप से प्रकट होते हैं। प्रभाकर का ज्ञान सिद्धान्त त्रिपुटी प्रत्यक्षवाद के नाम से जाना जाता है। प्रभाकर कहते है कि ज्ञान स्वयं को प्रकाशित करता है तथा यह ज्ञाता और ज्ञेय को भी प्रकाशित करता है। प्रत्येक ज्ञान में तीन तत्वों का रहना अनिवार्य वे हैं ज्ञाता, ज्ञेय और ज्ञान ।

6. न्याय दर्शन के अनुसार किस सन्निकर्ष के माध्यम से हम किसी कलम एवं इसके रंग के मध्य संबंध का प्रत्यक्ष करते हैं?

Correct Answer: (d) विशेषणता
Solution:

न्याय दर्शन के अनुसार, विशेषणता नामक सन्निकर्ष के माध्यम से हम किसी कलम और इसके रंग के मध्य संबंध का प्रत्यक्ष करते है। सन्निकर्ष का अर्थ है इन्द्रियों का वस्तुओं के साथ संबंध ।

7. नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। उन पर विचार कीजिए और उस कूट को चुनिए जो केवल सही कथन को निरुपित करता है।

(A) असत् कार्यवाद सांख्य द्वारा मान्य है।
(B) अन्विताभिधानवाद प्रभाकर द्वारा मान्य है।
(C) असत् ख्यातिवाद वसबन्धु द्वारा मान्य है।
(D) शब्दनित्यत्ववाद मीमांसा द्वारा मान्य है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (b) केवल B और D
Solution:

अन्विताभिधानवाद प्रभाकर द्वारा मान्य है तथा शब्दनित्यत्ववाद मीमांसा द्वारा मान्य है। अन्वितामिधानवाद के अनुसार जब आज्ञार्थक वाक्य अन्य शब्दों से अचित (संबंधित) होता है तभी वह अर्थविशेष का अभिधान करता है।
प्रत्येक शब्द अर्थ का बोध कराने में अक्षम है किन्तु व्यवहार के कारण शब्द का अर्थ सीमित हो जाता है। शब्द का अर्थ वाक्य पर अवलंबित रहता है। इस सिद्धान्त के अनुसार वाक्य ही भाषा की इकाई है।

8. अनुमान में किस प्रकार का हेत्वाभास है: शब्दः नित्यः शब्दत्वात् ?

Correct Answer: (b) असाधारण सव्यभिचार
Solution:

अनुमान में असाधारण सव्यभिचार के हेत्वाभास है- शब्द, नित्य, शब्दत्वात। असाधारण सब्यभिचार में हेतु अव्याप्त होता है, जैसे-शब्द नित्य है। क्योंकि यह सुनाई पड़ता है। साधारणतः हेत्वाभास का अर्थ है हेतु का आभास ।

9. निम्नलिखित में से कौन एक पंतजलि के योग में 'क्लेश' का एक प्रकार नहीं है?

Correct Answer: (a) निद्रा
Solution:

निद्रा, पतंजलि के योग में क्लेश का एक प्रकार नहीं हैं पतंजलि योग के अनुसार, क्लेशों की कुल संख्या पाँच है यथा- अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनेवेश

10. न्याय, ज्ञानमीमांसा में निम्नलिखित में से किसके द्वारा हमें किसी रज्जु में सर्प का प्रत्यक्ष होता है?

Correct Answer: (c) ज्ञानलक्षण सत्रिकर्ष
Solution:

न्याय ज्ञान मीमांसा के अनुसार ज्ञान लक्षण सत्रिकर्ष के द्वारा हमें किसी रज्जु में सर्प का प्रत्यक्ष होता है। न्याय दर्शन में भ्रम की व्याख्या ज्ञान लक्षण प्रत्यक्ष के द्वारा की जाती है। जब हम रस्सी को सांप समझ लेते हैं तो नैयायिकों के अनुसार इसकी व्याख्या यह है कि हमारे पूर्व अनुभूत सॉप की स्मृति वर्तमान अनुभूत वस्तु रस्सी की अनुभूति से इस प्रकार मिल जाती है कि रस्सी को स्मृति की वस्तु साँप से हम पृथक नहीं कर पाते। भ्रम, ज्ञान लक्षण प्रत्यक्ष का भ्रामक रूप कहा गया है।