NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 दर्शनशास्त्र (PHILOSOPHY)Total Questions: 10051. काण्ट के अनुसार नैतिक नियम हैं:(a) तर्कबुद्धि पर आधारित प्रागनुभविक(b) संवेग आधारित प्रागनुभविक(c) तर्क बुद्धि पर आधारित अनुभवाश्रित(d) संवेग पर आधारित अनुभवाश्रितCorrect Answer: (a) तर्कबुद्धि पर आधारित प्रागनुभविकSolution:काण्ट के अनुसार नैतिक नियम तर्कबृद्धि पर आधारित प्रागनुभाविक होते हैं। काण्ट यह मानते है कि मनुष्य मात्र में तर्क बुद्धि एक सामान्य तत्व है। यही मनुध्य के कर्मों का प्रेरक तत्व है। बुद्धि का नियम ही नैतिक नियम है। तर्क बुद्धि के आदेश का पालन करना ही मनुध्य के लिए उचित है। अतः नैतिकता के लिए बुद्धि तत्व को प्रधानता देने के कारण काण्ट का सिद्धान्त बुद्धि परकतावाद कहा जाता है।52. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए: सूची–I सूची–IIA.सिड्जविकI. मानव स्वयं के लिए नियम है।B. बटलरII. यदि सुखानुभूति का आवेग अत्यधिक प्रबल हो जाता है तो यह अपने स्वयं के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता है।C. जैकोबीIII. कर्तव्य और स्व-हित ही केवल कर्म के दो प्रेरक हैं।D. कान्टIV. कानून का निर्माण मनुष्य के लिए होता है न कि नियम मनुष्य का निर्माण करता है।नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः(a) A-II, B-I, C-IV, D-III(b) A-1, B-II, C-IV, D-III(c) A-IV, B-I, C-III, D-II(d) A-III, B-IV, C-II, D-ICorrect Answer: (a) A-II, B-I, C-IV, D-IIISolution:सही सुमेल निम्नलिखित है-सूची–Iसूची–IIA.सिड्जविकII. यदि सुखानुभूति का आवेग अत्यधिक प्रबल हो जाता है तो यह अपने स्वयं के लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता है।B. बटलरI. मानव स्वयं के लिए नियम है।C. जैकोबीIV. नियम का निर्माण मनुष्य के निमित्त होता है न कि नियम मनुष्य का निर्माणD. कान्टIII. कर्तव्य और स्व-हित केवल कर्म के दो प्रेरक हैं।53. "जो सुंदर है वह समरस और समानुपाती होता है; जो समरस और समानुपाती है वह सत्य है; और जो सुंदर और सत्य है, वह स्वीकार्य और शुभ है"। यह निम्नांकित में से किसका मत है:(a) शैफ्ट्सबरी(b) मार्टन्यू(c) कुडवर्थ(d) ब्रेडलेCorrect Answer: (a) शैफ्ट्सबरीSolution:"जो सुन्दर है वह समरस और समानुपाती होता है; जो समरस और समानुपाती है वह सत्य है; और जो सुंदर और सत्य है, वह स्वीकार्य और शुभ है। यह मत शैफ्ट्सबरी का है।54. निम्नांकित में से किसका मत है कि "सुख और दुःख की अनुभूति ही कर्म के प्रेरक हैं?(a) काण्ट(b) मार्टिन्यू(c) बेन(d) बैडलेCorrect Answer: (c) बेनSolution:"सुख और दुःख की अनुभूति ही कर्म के प्रेरक हैं।" यह मत बेन का है।55. नैतिकता के संदर्भ में काण्ट के तीन आधार तत्वों से सम्बन्धित सही कूट का चयन कीजिए:(a) स्वतंत्रता, संकल्प, अंतःप्रज्ञा(b) स्वतंत्रता, ईश्वर, अमरत्व(c) ज्ञान, कर्म और संवेग(d) आवश्यकता, कोटि, संवेदन ग्राहिताCorrect Answer: (b) स्वतंत्रता, ईश्वर, अमरत्वSolution:काण्ट ने नैतिकता के संदर्भ में निम्नलिखित तीन तत्वों को आधार स्तंभ के रूप में माना- 1. स्वतंत्रता 2. ईश्वर 3. अमरत्व56. बौद्ध धर्म के निम्नांकित में से क्या 'निर्वाण' के साधन के साथ संगत नहीं है:(a) रागमयी प्रज्ञा(b) भावनामयी प्रज्ञा(c) चिंतामयी प्रज्ञा(d) श्रुतमयी प्रज्ञाCorrect Answer: (a) रागमयी प्रज्ञाSolution:बौद्धधर्म में निर्वाण के साधन के साथ भावनामयी प्रज्ञा चिंतामयी प्रज्ञा तथा श्रुतमयी प्रज्ञा का संगत तो है परन्तु रागमयी प्रज्ञा निर्वाण के साधन के साथ असंगत है।57. भगवदगीता के अनुसार 'अनासक्त कर्म' से अभिप्रेत है:(a) कर्म का परित्याग(b) अकर्म का परित्याग(c) विकर्म का परित्याग(d) कर्म के भीतर परित्यागCorrect Answer: (d) कर्म के भीतर परित्यागSolution:भगवद गीता के अनुसार, 'अनासक्त कर्म' का अभिप्राय है "कर्म के भीतर परित्याग” अर्थात कर्म तो करना है, परन्तु फल के प्रति आशक्ति का भाव नहीं होना चाहिए। इसी भाव को कृष्ण ने गीता में इस प्रकार व्यक्त किया है 'कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' अर्थात हमारा अधिकार केवल कर्म करना होना चाहिए फल की चिंता हमें नहीं करनी चाहिए।58. निम्नांकित में से किसका मत है कि "अशुभ शुभ नहीं है, किन्तु यह शुभ है कि अशुभ है।"(a) ऑगस्टाइन(b) एक्यूनास(c) एंसेल्स(d) जेनोCorrect Answer: (a) ऑगस्टाइनSolution:"अशुभ शुभ नहीं है, किन्तु यह शुभ है कि अशुभ है।" यह मत संत आगस्टाइन का है। दर्शन में संत आगस्टाइन ने जगत को हटाकर आत्मा को केन्द्र बनाया और आत्मा के अमरत्व, स्वतः सिद्धत्व, ज्ञानस्वरूपत्व और संकल्पस्वायत्व का समर्थन किया।59. 'अद्रष्ट' के संबंध में निम्नांकित में से क्या सही नहीं है :(a) यह कर्म के गुण दोष का संचय है।(b) यह चेतना रहित है।(c) यह अदृश्य शक्ति है।(d) यह प्रबुद्ध है और इसे ईश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं पड़ती है।Correct Answer: (d) यह प्रबुद्ध है और इसे ईश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं पड़ती है।Solution:अद्रष्ट के विषय में निम्नलिखित सही है- 1. यह कर्म के गुण दोष का संचय है। 2. यह चेतना रहित है। 3. यह अदृश्य शक्ति है।60. निम्नांकित में से क्या गाँधी की न्यासिता का लक्ष्य नहीं है?(a) पूंजी और श्रम के मध्य विभेद का विलोपन(b) व्यक्ति को प्रगति का अवसर उपलब्ध कराना(c) लोगों में प्रेम और त्याग का संवर्धन(d) सुविधा संपन्न वर्ग को उनके धन से वंचित रखनाCorrect Answer: (d) सुविधा संपन्न वर्ग को उनके धन से वंचित रखनाSolution:गाँधीजी का ट्रस्टीशिप का सिद्धान्त आर्थिक समता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इन्होंने यह कहा कि पूँजीपतियों या मालिकों को यह समझना चाहिए कि उनकी पूँजी श्रमिकों की कमाई है। मालिक केवल उसका संरक्षक (ट्रस्टी) है। गाँधी जी की न्यासिता के निम्नलिखित लक्ष्य हैं- 1. पूंजी और श्रम के मध्य विभेद का विलोपन । 2. व्यक्ति को प्रगति का अवसर उपलब्ध कराना । 3. लोगों में प्रेम और त्या्याग का संवर्धन ।Submit Quiz« Previous12345678910Next »