Solution:द क्राई ऑफ इंडियन वुमन (1883) मराठी भाषा में एक हिंदू विधवा द्वारा प्रकाशित हुआ था। इस पुस्तक में रमाबाई ने विशेष रूप से भारतीय महिलाओं की विनाशकारी स्थितियों के बारे में लिखी थी जिसमें बहुत कम उम्र में विवाह, वैवाहिक उत्पीड़न के बाद और जघन्य प्रथाओं का पालन करने के लिए मजबूर किया गया था।
द हाई कास्ट हिन्दू चुमेन 1887 इस पुस्तक को प्रथम भारतीय नारीवादी मैनीफेस्टो कह सकते हैं। इसमें हिन्दू महिलाओं की दीन हीन स्थिति का वर्णन है। रमाबाई को समाज सुधार गतिविधियों के लिए ब्रिटिश सरकार ने 1919 में केसर-ए-हिन्द की उपाधि से सम्मानित किया। मुक्ति प्रेयर बिल 1903 में रमाबाई द्वारा शुरू की गयी इंग्लिश तीन थी।