NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा दिसम्बर 2021/जून-2022 (लोक प्रशासन)

Total Questions: 100

1. किसने कहा कि लोक प्रशासनिक के विज्ञान को विकसित करने में तीन मूल समस्याएँ हैं नियामक मूल्य मानव व्यवहार की समस्या और लोक प्रशासन तथा उसके सामाजिक परिवेश में संबंध है।

Correct Answer: (a) राबर्ट डहल
Solution:

राबर्ट डहल ने कहा कि लोक प्रशासन के विज्ञान को विकसित करने में तीन मूल समस्याएँ है, नियामक मूल्य मानव व्यवहार की समस्या और लोक प्रशासन तथा उसके सामाजिक परिवेश में संबंध है। राबर्ट डहल के अनुसार लोक प्रशासन विज्ञान नही है। इसके विज्ञान बनने के मार्ग में तीन बाधाएँ है-

• विज्ञान तथ्यात्मक व मूल्य निरपेक्ष है जबकि प्रशासन में मूल्य होते है।

• मानव व्यवहार की जटिलताएँ व विभिन्नताएँ बाधक है।

• सामाजिक ढाँचा व परिवेश भी लोक प्रशासन को प्रभावित करता है।

2. निम्नलिखित में से किसने लोक प्रशासन को सामाजिक रूप में स्थापित की संबंध प्रक्रिया संवाद और कार्यवाही को सभी मानवीय उन्नयन को प्रोत्साहन देने के बारे में विचार किया?

Correct Answer: (d) III मिन्त्रोब्रुक सम्मेलन (कान्फ्रेन्स)
Solution:

मिन्नोबुक सम्मेलन III में कहा गया कि लोक प्रशासन को सामाजिक रूप में स्थापित की संबंध प्रक्रिया संवाद और कार्यवाही को सभी मानवीय उन्नयन को प्रोत्साहन देने के बारे में विचार किया जाए। यह सम्मेलन सितंबर, 2008 में हुआ, इसकी अध्यक्षता प्रो. रोजमैरी ओ' लीरी ने की।

इसका आयोजन तब किया गया था जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था गिर रही थी और वैश्विक आतंकवाद ने अपना पहला प्रभाव दिखाया था। इस सम्मेलन का फोकस संरचनात्मक और कार्यात्मक सुधारों या दूसरी पीढ़ी के सुधारों पर था। इसका शैक्षणिक दायरा भी विस्तृत और यह सूचना क्रान्ति व मोबाइल क्रांति के दौरान इसमें बहुसंगठनात्मकता साक्षा प्रयासों व नेटवर्किंग पर बल दिया गया। इसकी थीम थी - "लोक प्रशासन, लोक प्रबंधन तथा लोक सेवा का समकालीन विश्व में भविष्य ।"

3. अनेक भागों के एकीकरण से एक सुव्यवस्थित संपूर्ण को संपादित करने के प्रयोजन के उपक्रम को कहा जाता है

Correct Answer: (c) समन्वय
Solution:

अनेक भागों के एकीकरण से एक सुव्यवस्थित संपूर्ण को संपादित करने के प्रयोजन के उपक्रम को समन्वय कहा जाता है। साधारण शब्दों में समन्वय से तात्पर्यं है, किसी भी संगठन की विभिन्न गतिविधियों में तालमेल बिठाना।

हेनरी फेयोल - “समन्वय किसी संगठन की सभी क्रियाओं में समरसता स्थापित करता है, ताकि उसका कार्य सुविधाजनक ढंग से सफलतापूर्वक चलता रहे।"
सेकलर हडसन- "समन्वय किसी संगठन की सभी क्रियाओं में समरसता स्थापित करता है, ताकि उसका कार्य सुविधाजनक ढंग से सफलतापूर्वक चलता रहे।"

4. निम्नलिखित में से कौन वैयक्तिक क्षमताओं के बल के कारण अनुयायियों पर अगाध और असाधारण प्रभाव डालने में सक्षम हैं

Correct Answer: (b) करिश्माई नेता
Solution:

करिश्माई नेता अपने वैयक्तिक क्षमताओं के बल के कारण अनुयायियों पर अगाध और असाधारण प्रभाव डालने में सक्षम है।

5. निम्नलिखित में से किसने विचार किया कि अच्छा संगठन यांत्रिक और जैविक दोनों ही प्रणालियों को सम्मिलित करता है।

Correct Answer: (b) टॉम बर्नस और जी.एम. स्टाकर
Solution:

टॉम बर्नेस और जी. एम.स्टाकर का विचार था कि अच्छा संगठन यांत्रिक और जैविक दोनों ही प्रणालियों को सम्मिलित करता है।

6. फ्रेंच में लिखी हेनरी फायल की उत्कृष्ट पुस्तक 'एडमिनिस्ट्रेशन और इन्डस्ट्रियल एट जेनरल' का अनुवाद स्टोरस द्वारा इस नाम से किया गया था।

Correct Answer: (a) सामान्य एवं औद्योगिक प्रबंधन
Solution:

फ्रेंच में लिखी हेनरी फेयोल की उत्कृष्ट पुस्तक 'एडमिनिस्ट्रेशन और इन्डस्ट्रियल एट जेनरल (Administration and Industrielle et Generale) 1916 का अनुवाद स्टोरस द्वारा General and Industrial Management' के रूप में किया इसमें अपनों सिद्धांतों के वैज्ञानिक प्रबंधन को प्रकाशित किया।

इस कार्य में फेयोल ने प्रबंधन का अपना सिद्धान्त प्रस्तुत किया, जिसे फेयोलिज्म के नाम से जाना जाता है। इससे पहले फेयोल ने 1870 के दशक में खनन इंजीनियरिंग पर कई लेख लिखे थे और प्रशासन पर कुछ प्रारंभिक पत्र लिखे थे।

7. निर्णय निर्माण में 'सीमित युक्तिसंगतता' (तर्कता) निम्नलिखित में से किस वैयक्तिक क्षमता पर आधारित है?

Correct Answer: (c) सीमित तर्क क्षमता
Solution:

निर्णय निर्माण में 'सीमित युक्तिसंगतता' (तर्कता) सीमित तर्क क्षमता पर आधारित है। ये तर्कसंगत गणना के अनुसार कार्य करने का प्रयास करते है, लेकिन सीमित समय, संसाधनों, विकल्पों और प्राथमिकताओं के बारे में जागरूकता और सूचना प्रसंस्करण क्षमता के कारण उन्हे रोका जाता है।

8. निम्नलिखित में किसने सचिवालय कार्यकारी परिषद को प्रतिस्थापित किया।

Correct Answer: (c) मंत्रीमंडल (कैबिनेट) सचिवालय
Solution:

भारत में मंत्रिमण्डल सचिवालय का प्रारम्भ उस समय से होता है जब ब्रिटिश सरकार द्वारा गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में 'विभागीय व्यवस्था' की नींव रखी गयी। यह व्यवस्था पहले से चली आ रही थी, किन्तु इसे कानूनी रूप लॉर्ड केनिंग के शासनकाल (1861) में दिया गया।

प्रारंभ में गवर्नर जनरल की परिषद ही परामर्शदाता मण्डल का कार्य करती थी किन्तु जैसे-जैसे कार्य का भार और कार्य की जटिलता बढ़ती गयी वैसे-वैसे विभिन्न विभागों का कार्य परिषद् के सदस्यों को सौंपा जाने लगा। केवल महत्त्वपूर्ण विषय गवर्नर जनरल या परिषद द्वारा संयुक्त रूप से सम्पादित किये जाते थे।

कार्यकारिणी परिषद् के सचिवालय का अध्यक्ष गवर्नरजनरल का निजी सचिव होता था, किन्तु वह परिषदों की बैठकों में उपस्थित नही होता था। लार्ड विलिगडन (1931-36) ने परिषद् की बैठकों में अपने निजी सचिव को सम्मिलित करने की परम्परा डाली जो बाद के वर्षों में चालू रही। भारत में मंत्रिमंडल सचिवालय अक्टूबर 1945 में प्रारम्भ हुआ था। आगे चलकर सितम्बर 1946 में अंतरिम सरकार के आदेश द्वारा इस सचिवालय का नाम बदलकर 'मंत्रिमण्डल सचिवालय' कर दिया गया।

9. निम्नलिखित में से क्या भारतीय संविधान की XI अनुसूची का भाग नहीं है?

Correct Answer: (d) स्वच्छ भारत कार्यक्रम
Solution:

आजादी के बाद संविधान की सातवीं अनुसूची में केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का बंटवारा केन्द्र, समवर्ती और राज्य सूची के आधार पर किया गया। लेकिन पंचायतों को अधिकार नही दिया गया। अंततः पंचायती राज अधिनियम-1992 के तहत पंचायतों को भी स्थानीय विषयों पर काम करने का अधिकार मिल गया।

जिसमें प्रमुख विषय-कृषि, ग्रामोद्योन, शिक्षा, स्वास्थ्य : ग्राम्य विकास, सामाजिक गतिविधियों एवं समाज कल्याण इत्यादि सम्मिलित है। उपयुक्त प्रश्नानुसार भारतीय संविधान की अनुसूची XI में शामिल विषय-

• सुरक्षित पीने का पानी

• लोक वितरण प्रणाली

•  पशुपालन डेरी उद्योग और मुर्गीपालन

नोट (*) : 'स्वच्छ भारत कार्यक्रम' पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों के 29 स्थानीय विषयों में नही शामिल है।

10. भारत में पहली बार _ वर्ष में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंदर समय बद्ध वितरण सेवा प्रारंभ की गई।

Correct Answer: (b) 2010
Solution:

भारत में पहली बार 2010 वर्ष में लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंदर समय बद्ध वितरण सेवा प्रारंभ की गई। 'मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010' देश में पहली बार, अपनी खास तरह का अधिनियम है, जो निर्धारित समय सीमा में नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है।

इस अधिनियम में नागरिकों को निर्धारित समय के भीतर बुनियादी सार्वजनिक सेवाओं के प्रदान की गारंटी देता है और ऐसा करने में विफलता के लिए जवाबदेही तंत्र की योजना करता है। इस अधिनियम के तहत, जाति, जन्म, विवाह और अधिवास प्रमाण पत्र जारी करना, पीने के पानी के कनेक्शन, राशन कार्ड, भू-अभिलेखों की प्रतियां जैसी 52 महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं को अधिसूचित किया गया है।

हर सेवा की डिलीवरी के लिए एक समय अवधि तय किया गया है। जो अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है और इन सेवाओं को समय पर प्रदान नहीं करता है. उसे प्रतिदिन 250 रुपये से लेकर अधिकतम 5000 रुपये तक की रकम का भुगतान, जुर्माने के रूप में करना पड़ता है।