Solution:ग्रामीण शहरी अविच्छित्रक सातव्य की अवधारणा ग्रामीण एवं नगरीय समुदायों में बढ़ती अन्तक्रियाओं तथा इनमें किए जाने वाले अन्तर की कठिनाइयों को देखते हुए इस अवधारणा का विकास हुआ, इसका तात्पर्य है कि गांव और शहर अंतर संबंधित है, फिर भी एक-दूसरे से भिन्न है।
इस दोनों में विविध प्रकार से अन्तर किया जाता रहा है। औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व गाँव नगरों से पूरी तरह से भिन्न ही नही थे, अपितु इन दोनों में कोई विशेष सम्पर्क-सूत्र अथवा अन्तक्रियाएँ नही पाई जाती थी। परन्तु जैसे-जैसे नगरीकरण एवं औद्योगीकरण की प्रक्रियाएँ प्रारम्भ हुई, गाँव एवं नगर में पारस्परिक सम्पर्क में वृद्धि होती गई तथा दोनों में पाए जाने वाले अन्तर काफी कम होने लगे।
ग्रामीण नगर शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम गाल्फिन किया था। इस अवधारणा के विकास में प्रो. विर्थ का विशेष योगदान है। विर्थ ग्रामीण एवं नगरीय जीवन के दो भिन्न प्रकार की जीवन पद्धतियाँ मानते है। इसी प्रकार रेडफिल्ड, सोरोकिन, जिम्मेरमन, पीकर तथा वेबर ने भी ग्रामीण नगरीय भेदों का श्रेणीकरण किया है।