NTA यू.जी.सी. नेट /जेआरएफ परीक्षा दिसम्बर, 2022 (लोक प्रशासन)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को पहिये और उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

नीति-निर्माण हेतु इष्टतम मॉडल के आधार है
(1) लक्ष्यों के अधिक स्पष्टीकरण द्वारा तर्कसंगत-विषय-वस्तु में वृद्धि करना तथा नये विकल्पों की तलाश करना। (2) अतिरिक्त तर्कसंगत प्रक्रिया इष्टतम नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह पूर्ण तार्किकता के लिए संसाधनों और क्षमता के अभाव के कारण होती है। अंत त सहजानुभूत निर्णय, समग्र अभिव्यक्तियाँ किसी दशा से व्युत्पन्न हुई हैं और नये विकल्पों के सर्जनात्मक आविष्कार अतिरिक्त तर्कसंगत प्रक्रियाओं के दृष्टांत हैं। (3) ये अवस्थाएँ प्रकरण-विमर्शी, अतिसंवेदनशीलता सत्रों और 'विचार-मंथन' द्वारा उन्नत की जा सकती हैं। इसी तरह तर्कसंगत नीति निर्माण प्रक्रिया को नीति क्रियान्वित करने वाले लोगों के निवेश (समय), ज्ञान एवं योग्यता में वृद्धि तथा 'विचार' इकाइयों की स्थापना द्वारा उन्नत किया जा सकता है।
(4) आधुनिक राज्यों में नीति निर्माण में पूर्व दृष्टांत, 'अभिवर्धी परिवर्तन' (इंक्रीमेंटल चेंज), 'मडलिंग थ्रो', जड़ता और नैत्यिक (रुटीन) का अनुपालन किया जाता है। नीति द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं में परिवर्तन दर की तुलना में, नीति निर्माण प्रक्रिया संबंधी ज्ञान अपने आप में पिछड़ा हुआ है। दोनों मॉडलों, 'व्यापक तार्किकता' और 'उत्तरवर्ती सीमित तुलना', का पुनर्प्रक्रमण नीति निर्माण के मानकीय इष्टतम मॉडल के रूप में परिणत हो सकता है, जिसमें मूल्यों, उद्देश्यों और निर्णय के मानदंडों से संबंधित स्पष्टीकरण सम्मिलित होता है।

• नये विकल्पों पर विचार करने के लिए विकल्पों एवं एक सचेतन प्रयास की पहचान करना सर्जनात्मक वैकल्पिक नवाचार को उद्दीपित करने में सहायता करता है।
• न्यूनतम जोखिम या नवाचार की रणनीति के प्रारंभिक आकलन को वरीयता दी जाती है। यदि सर्वप्रथम 'उत्तरवर्ती सीमित तुलना' मॉडल का अनुपालन किया जाना चाहिए, तो वैकल्पिक नीतियों एवं अपेक्षित परिणामों की पहचान के रूप में अगले तत्व पर विचार किया जाता है, जो उपलब्ध ज्ञान एवं अंतः प्रज्ञा पर निर्भर करता है।
• सिद्धांत एवं अनुभव, तार्किकता और अतिरिक्त तार्किकता आश्रित होती है, जो उनकी उपलब्धता एवं समस्या की प्रकृति पर निर्भर करती हैं।
• अनुभव द्वारा सुव्यवस्थित अधिगम के माध्यम से नीति-निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए सुस्पष्ट व्यवस्थाएँ बनाई गई है।
निम्नलिखित में से कौन-सा नीति-निर्माण हेतु इष्टतम मॉडल का पूर्वानुमान नहीं है?

Correct Answer: (c) 'मडलिंग थ्रो' का अंगीकार करना।
Solution:

नीति-निर्माण हेतु इष्टतम मॉडल का पूर्वानुमान नीति क्रियान्वित करने वाले लोगों के निवेश (समय) तर्कसंगत विषयवस्तू में वृद्धि करना, अतिरिक्त तार्किक विषयवस्तु के रूप में अंत त सहजानुभूत निर्णय एवं अति संवेदनशीलता सत्र एवं 'विचार' मंथन करके ज्ञान एवं योग्यता में वृद्धि स्थापित करना। जबकि इष्टतम मॉडल का पूर्वानुमान में 'मडलिंग थ्रो' का अंगीकार करना नहीं सम्मिलित है।

92. निर्णय मानदंड की विशेषताएँ निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?

A. विकल्पों की पहचान
B. न्यूनतम जोखिम का मूल्यांकन
C. नवाचार का परिहार
D. व्यापक विश्लेषण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) केवल A, B, D
Solution:

निर्णय मानदंड की विशेषताएँ कुछ इस प्रकार है-
• विकल्पों की पहचान
• न्यूनतम जोखिम का मूल्यांकन
• व्यापक विश्लेषण
• सृजनात्मक वैकल्पिक नवाचार।

93. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में।

अभिकथन A: नीति निर्माण की गुणवत्ता को अनुभव द्वारा अधिगम के माध्यम से उन्नत किया जा सकता है।
कारण R : सिद्धांत और अनुभव आश्रित होते हैं, जो उनकी उपलब्धता और समस्या की प्रकृति पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, Aकी सही व्याख्या नहीं है।
Solution:

'उत्तरवर्ती सीमित तुलना मॉडल' जो कि वैकल्पिक नीतियों एवं अपेक्षित परिणामों की पहचान के रूप में अगले तत्व पर विचार करता है, जो उपलब्ध ज्ञान एवं अंतःप्रज्ञा पर निर्भर करता है। अनुभव द्वारा सुव्यवस्थित अधिगम के माध्यम से नीति-निर्माण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए सुस्पष्ट व्यवस्थाएँ बनाई गई है।

सिद्धांत एवं अनुभव, तार्किकता और अतिरिक्त तार्किकता आश्रित होती है, जो उनकी उपलब्धता एवं समस्या की प्रकृति पर निर्भर करती है। अतः Aऔर R दोनों सही है, लेकिन R. Aकी सही व्याख्या नहीं है।

94. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसा उसके कारण के रूप में।

अभिकथन A: वास्तविक नीति निर्माण, 'अभिवर्धी परिवर्तन' और नैत्यिक (रुटीन) के अनुपालन करने के लिए प्रवृत्त होता है।
कारण R: नीति द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं में परिवर्तन दर की तुलना में नीति निर्माण के तौर तरीके पिछड़े हुए हैं।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (b) A और R दोनों सही हैं, लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
Solution:

आधुनिक राज्यों में नीति-निर्माण में पूर्व दृष्टांत, 'अभिवर्धी परिवर्तन', मडलिंग थ्रो, जड़ता और नैत्यिक (रुटिन) का अनुपालन किया जाता है। नीति द्वारा सामना की जाने वाली समस्याओं में परिवर्तन दर की तुलना में नीति निर्माण प्रक्रिया संबंधी ज्ञान अपने आप में पिछड़ा हुआ है। अतः अभिकथन और कारण दोनों सही है, लेकिन कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।

95. नीति-निर्माण हेतु 'व्यापक तार्किकता' और 'उत्तरवर्ती सीमित तुलना' मॉडलों का पुनर्संसाधन निम्नलिखित में से किसमें परिणत होता है?

Correct Answer: (d) मूल्यपरक इष्टतम मॉडल
Solution:

नीति निर्माण हेतु 'व्यापक तार्किकता और उत्तरवर्ती सीमित तुलना' मॉडलों का पुनर्संसाधन मानकीय इष्टतम मॉडल के रूप में परिणत हो सकता है, जिसमें मूल्यों, उद्देश्यों और निर्णय के मानदंडों से संबंधित स्पष्टीकरण सम्मिलित होता है।

96. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और इसके बाद दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

युद्धोत्तर तुलनात्मक लोक प्रशासन के अनेक आलोचकों ने तर्क दिया है कि थोपे गए पश्चिमी प्रशासनिक मॉडल्स (निदर्श) अधिकांशतया पश्चिम केंद्रित और अनेक गैर-पश्चिमी देशों के लिए प्रायः अनुपयुक्त थे। लोक प्रशासन में अनुप्रस्थ क्षेत्रीय और अनुप्रस्थराष्ट्रीय तुलनात्मक अध्ययनों ने 1990 के दशक के आरंभ में वृहत्तर बौद्धिक ध्यान प्राप्त करना शुरू किया था।

लोक प्रशासन में अनुप्रस्थ-राष्ट्रीय तुलनाओं के समक्ष पहली एक प्रमुख चुनौती अनेक गैर-पश्चिमी परिवेशों में आरंभ की गई पश्चिमी परंपराओं में रची बसी विचारात्मक रूपरेखा है। औपनिवेशिक काल के दौरान व्यापक रूप से ज्ञात विभिन्न पूर्व औपनिवेशिक प्रशासनिक परंपराओं (जैसे कंफ्यूशियायी, भारतीय, फारसी और ऑटोमन) को प्रतिस्थापित या पुनर्सरित किया गया। भारत में औपनिवेशिक शासन ने पूर्व औपनिवेशिक शासन प्रणालियों के प्रतिस्थापन और ब्रिटिश, अमेरिकी एवं फ्रांसीसी प्रशासनिक प्रणालियों को थोपने का मार्ग प्रशस्त किया। नौकरशाही के सिद्धांतों को नियम, अवैयक्तिक क्रम जैसी प्राथमिकताएँ प्रदान की गई, जिनकी जड़ें प्रायः चीन की नौकरशाही में पाई गई थीं। इसके अतिरिक्त, ब्रिटिश, फ्रांसीसी और प्रशियाणी सुधारकों ने चीन की प्रणालियों से प्रेरणा प्राप्त की थी।

यह तुलनात्मक प्रशासनिक अध्ययनों के लिए जो एक चुनौती बनाता है, वह यह है कि इस प्रकार की पश्चिमी केंद्रित संवल्पनात्मक श्रेणियों की गैर-पश्चिमी समाजों में प्रायः अनुरूपी संकल्नात्मक जड़ें निहित नहीं होती, जो संदर्भित रूप से समृद्ध अनुप्रस्थ तुलनाओं के अध्येताओं के कार्य को सीमित बना देता है। बिना परीक्षित और प्रमाणित संदर्भीकरण, गृहीत संकल्पनाओं के तुलनात्मक अध्ययन संकीर्ण बनने की ओर प्रवृत्त होते हैं।

तुलनात्मक लोक प्रशासन के समक्ष दूसरी चुनौती यह है कि इसका प्रत्यक्षवादी ज्ञानमीमांसीय आधार और विधि-तंत्रीय अभिकल्प वैज्ञानिक वैधता और आनुभविक शोध उपकरणों पर आधारित सार्वभौमिक ज्ञान के निर्माण के उद्देश्यों की प्राथमिकताएँ बनाना है। इस प्रकार के सार्वभौमिक ज्ञान की स्थापना के लिए संदर्भ आधारित विशिष्ट प्रशासनिक अनुभवों को लेने की एक प्रबल प्रवृत्ति होती है। इस बारे में सुझाव दिया गया है कि "अमेरिकी प्रशासनिक विज्ञानों में ज्ञान के एक विशिष्ट, प्रत्यक्षवादी और प्रकार को आदर्श बनाने का एक सुस्पष्ट पूर्वाग्रह है।"
युद्धोत्तर तुलनात्मक प्रशासन की क्यों आलोचना की जाती है? 

Correct Answer: (b) पश्चिमी मॉडल्स थोपे गए थे।
Solution:

युद्धोत्तर तुलनात्मक लोक प्रशासन की आलोचना की जाती है, क्योंकि इनका मानना है कि थोपे गए पश्चिमी प्रशासनिक मॉडल्स (निदर्श) अधिकांशतया पश्चिम केंद्रित और अनेक गैरपश्चिमी देशों के लिए प्रायः अनुपयुक्त है।

97. तुलनात्मक लोक प्रशासन ने किसको प्राथमिकता दी?

Correct Answer: (c) नौकरशाही संबंधी सिद्धांत
Solution:

तुलनात्मक लोक प्रशासन ने नौकरशाही के सिद्धांतों को नियम, अवैयक्तिक क्रम जैसी प्राथमिकताएँ प्रदान की, जिसकी जड़ें प्रायः चीन की नौकरशाही में पाई जाती है।

98. तुलनात्मक लोक प्रशासन में अध्ययनों के समक्ष निम्नलिखित में से कौन-सी चुनौतियाँ हैं?

A. सार्वभौमिक ज्ञान का निर्माण
B. अमेरिकी प्रशासन के प्रति पूर्वाग्रह
C. विशिष्ट स्थितियों में संकल्पनाओं का संदर्भीकरण
D. आनुभविक साक्ष्य की अनुपस्थिति
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) केवल A, B, C
Solution:

तुलनात्मक लोक प्रशासन में अध्ययनों के समझ चुनौतियाँ-
• सार्वजनिक ज्ञान का निर्माण।
• अमेरिका प्रशासान के प्रति पूर्वाग्रह ।
विशिष्ट स्थितियों में संकल्पनाओं का संदर्भीकरण।

99. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथन A : विशिष्ट राष्ट्रीय स्थितियों में सुधार की पहलों का सार्थक संदर्भीकरण निर्णायक रूप से महत्वपूर्ण है।
कारण R : तुलनात्मक अध्ययनों में संदर्भीकरण के बिना गृहीत संकल्पनाएँ संकीर्ण बनने की ओर प्रवृत्त होती है।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A और R दोनों सत्य हैं और R, Aकी सही व्याख्या है।
Solution:

विशिष्ट राष्ट्रीय स्थितियों में सुधार की पहलों का सार्थक संदर्भीकरण निर्णायक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि तुलनात्मक अध्ययनों में संदर्भीकरण के बिना गृहीत संकल्पनाएँ संकीर्ण बनने की ओर प्रवृत्त होती है। अतः A और R दोनों सत्य है और R, A की सही व्याख्या है।

100. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में।

अभिकथन A: उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश और प्रशियायी प्रशासन सुधारकों ने चीन की प्रणालियों की तार्किकता और कार्यदक्षता से प्रेरणा प्राप्त की थी।
कारण R : औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत पश्चिमी प्रशासनिक संकल्पनाओं ने शासन की पूर्वऔपनिवेशिक प्रणालियों को मजबूत बनाने का मार्ग प्रशस्त किया।
उपर्युक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (c) A सत्य है लेकिन R असत्य है।
Solution:

उन्नीसवीं शताब्दी के ब्रिटिश और प्रशियासी प्रशासन सुधारकों ने चीन की प्रणालियों की तार्किकता और कार्यदक्षता से प्रेरणा प्राप्त की थी। जबकि औपनिवेशिक शासन के अंतर्गत पश्चिमी प्रशासनिक संकल्पनाओं ने शासन की पूर्व औपनिवेशिक प्रणालियों को थोपने का मार्ग प्रशस्त किया। अतः अभिकथन सत्य है, लेकिन कारण असत्य है।