NTA यू.जी.सी. नेट /जेआरएफ परीक्षा दिसम्बर, 2022 (लोक प्रशासन)

Total Questions: 100

11. नीति आयोग मात्रापरक उद्देश्य के मापदंडों पर आधारित विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में राज्यों की रैंकिंग के आधार पर निम्नलिखित में से किस प्रकार के संघवाद को प्रोत्साहित करता है?

Correct Answer: (b) प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद
Solution:

नीति  आयोग राज्यों केंद्रशासित प्रदेशों के बेहतर प्रदर्शन को सुविधाजनक बनाकर प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शी रैंकिंग के साथ-साथ हैंड-होल्डिंग (Hand Holding) दृष्टिकोण के माध्यम से राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करता है।

नीति आयोग द्वारा लांच किए गए कुछ सूचकांक है, स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक, राज्य स्वास्थ्य सूचकांक, समग्र जल प्रबंधन सूचकांक, सतत विकास लक्ष्य सूचकांक, भारत नवाचार सूचकांक और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक । नीति आयोग हर महीने आकांक्षी जिलों के प्रदर्शन के लिए डेल्टा रैंकिंग भी जारी करता है।

मात्रात्मक वस्तुनिष्ठ मानदंडों के आधार पर विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में राज्यों की रैंकिंग उन्हें और यहाँ तक कि जिलों को भी अपने प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करती है। नीति आयोग संकेतक ढाँचे, समीक्षा तंत्र और क्षमता निर्माण के विकास में राज्य केंद्रशासित प्रदेश सरकारों, संबंधित मंत्रालयों विभागों सहित सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करता है, जो कि प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद को प्रोत्साहित करता है।

12. जिलाधीश का निम्नलिखित में किस रूप में एक कार्य नहीं है?

Correct Answer: (d) जिला परिषद का अध्यक्ष
Solution:जिलाधीश (जिला कलक्टर) जिला प्रशासन के प्रमुख के रूप में भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में अद्वितीय है। अंग्रेज शासन के दौरान सन् 1772 में गवर्नर जनरल लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग द्वारा बुनियादी रूप से नागरिक प्रशासन और 'भू-राजस्व की वसूली' के लिए गठित 'जिलाधिकारी' का पद, अब राज्य के लोक प्रशासन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पदों में प्रमुख स्थान 'जिलाधीश कलेक्टर' के रूप में जिले में राज्य सरकार का सर्वोच्च अधिकार संपन्न प्रतिनिधि या प्रथम लोक सेवक होता है।
जिलाधीश के कर्तव्य कार्य तथा उत्तरदायित्व -
  • जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।
  • तत्परता तथा निष्पक्षतापूर्वक भू-राजस्व तथा अन्य करों का संग्रह करना। विकास योजनाओं का निर्देशन और उन्हें पूर्ण कराना, जिन पर देश का भविष्य निर्भर है।
  • शासन के अनेक नियामक एवं कंट्रोल कार्य, जैसे-खाद्यान्न का राशनिंग, कृषि-उपज का क्रय करना, वस्तुओं को भेजने की व्यवस्था करना आदि।
  • प्राकृतिक प्रकोप, दुर्घटनाओं आदि में तत्काल कार्रवाई करना।
  • शासन के कार्यक्रमों एवं विकास कार्यों का क्रियान्वयन ।
  • प्रशासन तथा नागरिकों के मध्य प्रतिरोधी (Buffer) की भूमिका एक को दूसरे के द्वारा संभावित परेशान करने से बचना और शीघ्र न्याय दिलाना।
  • प्रशासनिक अधिकारी के रूप में संसद और राज्य विधानसभाओं चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी, जिला जनगणना अधिकारी मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी।
    नोट- जिला परिषद के प्रमुख को अध्यक्ष (चेयरमैन) कहते हैं। वह जिला पंचायत सदस्यों द्वारा चुना जाता है। जबकि जिला परिषद की प्रशासनिक इकाई का प्रमुख एक CEO होता है, जो कि एक IAS अधिकारी होता है।

13. निम्नलिखित में से कौन-सा भारतीय संविधान का अनुच्छेद 'महानगरीय नियोजन समिति' (मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी) का प्रावधान करता है?

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 243 जेड.ई.
Solution:भारतीय संविधान का अनुच्छेद 243 ZE मेंमहानगरीय नियोजन समिति (मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी) काप्रावधान करता है। संपूर्ण महानगर क्षेत्र के लिए एक मसौदा विकासमहानगर क्षेत्र में एक महानगर योजना समिति का गठन कियाजाएगा।
योजना समिति, विकास योजना का मसौदा तैयार करने में ध्यान रखे-
  • महानगरीय क्षेत्र में नगर पालिकाओं और पंचायतों द्वारा तैयारकी गई योजनाएँ।
  • नगर पालिकाओं और पंचायतों के बीच सामान्य हित के मामले,जिनमें क्षेत्र की समन्वित स्थानिक योजना, पानी और अन्यभौतिक और प्राकृतिक संसाधनों का बँटवारा, बुनियादी ढाँचे का एकीकृत विकास और पर्यावरण संरक्षण शामिल है।
  • भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित समग्र उद्देश्यऔर प्राथमिकताएँ।
  • भारत सरकार और राज्य सरकार की एजेंसियों द्वारा महानगरीयक्षेत्र में किए जाने वाले संभावित निवेश की सीमा और प्रकृतिऔर अन्य उपलब्ध संसाधन, चाहे वित्तीय हों।
    नगरपालिकाओं से संबंधित अनुच्छेद - 
    243P – परिभाषाएँ
    243Q – नगरपालिकाओं का गठन
    243R – नगरपालिकाओं की संरचना
    243S – वार्ड समितियों इत्यादि का गठन एवं संरचना
    243T – सीटों का आरक्षण
    243U – नगरपालिकाओं का कार्यकाल
    243V – सदस्यता से अयोग्यता
    243W – नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार एवं दायित्व
    243X – नगरपालिकाओं द्वारा करारोपण की शक्तियाँ तथा निहित इत्यादि
    243Y – वित्त आयोग
    243Z – नगरपालिकाओं के लेखा का अंकेक्षण
    243ZA – नगरपालिकाओं का चुनाव
    243ZB – संघशासित प्रदेशों में लागू
    243ZC – कतिपय क्षेत्रों में इस भाग का लागू नहीं होगा
    243ZD – जिला आयोजन के लिए समिति
    243ZE – महानगरीय आयोजना के लिए समिति
    243ZF – नगरपालिकाएँ तथा विद्यमान कानूनों का जारी रहना
    243ZG – चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक

14. निम्नलिखित में से किस राज्य मेंपंचायतीराज का अस्तित्व नहीं है?

Correct Answer: (a) मेघाल
Solution:

ग्रामीण विकास के लिए भारतीय प्रशासन की त्रिस्तरीय संरचना को पंचायतीराज कहा जाता है। पंचायतीराज का उद्देश्य जिलों, अंचलों प्रखंड और गाँवों में स्थानीय स्वशासन का विकास करना है। भारत के संविधान का भाग IX पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित है। इसमें पंचायत की विभिन्न शर्तों, संरचना, अवधि, आरक्षण, शक्तियों आदि की परिभाषाएँ शामिल हैं। इसमें कहा गया है कि यह हिस्सा नागालैंड, मेघालय और मिजोरम राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली पर लागू नहीं होता है।

  • भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की एक प्रणाली है, जिसे पंचायतीराज संस्थाओं के रूप में जाना जाता है। 1992 के 73वें संशोधन अधिनियम ने पंचायतीराज व्यवस्था को शामिल करने के लिए भारतीय संविधान में संशोधन किया गया। जिसमें ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), मंडल परिषद या ब्लॉक समिति या पंचायत समिति (ब्लॉक स्तर) और जिला परिषद (प्रशासनिक स्तर) प्रणाली के तीन स्तर है।
  • ग्राम सभा- ग्राम सभा पंचायतीराज व्यवस्था का प्राथमिक निकाय है।
  • त्रिस्तरीय प्रणाली - इनका काम गाँव, ब्लॉक (मध्यवर्ती स्तर) और जिला स्तर पर होता है।
  • सदस्यों और अध्यक्ष का चुनाव - पंचायतीराज के सभी स्तरों के सदस्यों को सीधे चुना जाता है और अध्यक्षों को मध्यवर्ती और जिला स्तर पर अप्रत्यक्ष रूप से चुना जाता है।

15. वर्ष 1989 में पी0के0 थंगन समिति का गठन निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया था?

Correct Answer: (a) पंचायती राज व्यवस्थ
Solution:1988 में, संसद की सलाहकार समिति की एक उपसमिति पी. के. थंगन की अध्यक्षता में राजनीतिक और प्रशासनिक ढाँचे की जाँच करने के उद्देश्य से गठित की गयी। इस समिति ने पंचायतीराज व्यवस्था को मजबूत करने तथा इसे संवैधानिक दर्जा देने का सुझाव दिया। इस समिति ने निम्न अनुशंसाएँ की थी-
  • पंचायतीराज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।
  • गाँव, प्रखंड तथा जिला स्तरों पर त्रि-स्तरीय पंचायतीराज ।
  • जिला परिषद को पंचायतीराज व्यवस्था की धुरी होना चाहिए। इसे जिले में योजना निर्माण एवं विकास की एजेंसी के रूप में कार्य करना चाहिए।
  • पंचायतीराज संस्थाओं का पाँच वर्ष का निश्चित कार्यकाल होनी चाहिए।
  • एक संस्था के सुपर सत्र की अधिकतम अवधि छह माह होनी चाहिए।
  • राज्य स्तर पर योजना मंत्री की अध्यक्षता में एक योजना निर्माण तथा समन्वय समिति गठित होनी चाहिए।
  • पंचायतीराज पर केंद्रित विषयों की एक विस्तृत सूची तैयार करना चाहिए तथा उसे संविधान में समाहित करना चाहिए।
  • हर राज्य में एक राज्य वित्त आयोग का गठन होना चाहिए। यह आयोग पंचायतीराज संस्थाओं को वित्त के वितरण के पास बिंदु तथा विधियाँ तय करेगा।
  • जिला परिषद का मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी जिले का कलेक्टर होगा।

16. भारत में फ्रांसीसी प्रिफेक्ट के निकटतम अनुरूप पद निम्न में से कौन-सा है?

Correct Answer: (b) जिला कलेक्टर
Solution:भारत में प्रशासन का आधार क्षेत्रीय इकाई जिला और जिला प्रशासन है। जिले में समस्त सार्वजनिक कार्यों का प्रबंध इसी में देखने को मिलता है। 'जिला' शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में किया जाता है, जैसे-पुलिस जिला, डाक जिला, रेलवे जिला आदि। इन जिलों के बीच पर्याप्त प्रादेशिक अतिराव रहता है। शब्द व्युत्पत्ति के अनुसार, यह शब्द एक फ्रांसीसी शब्द डिस्ट्रिक्ट (District)से लिया गया है, जो स्वयं मध्यकालीन लैटिन शब्द डिस्ट्रिक्ट्स से बना है। इसका अर्थ न्यायिक प्रशासन के उद्देश्य से बनाया गया प्रदेश है। अंग्रेजों ने यह सिद्धांत फ्रांसीसी प्रीफेक्ट व्यवस्था से ग्रहण किया तथा इसे ब्रिटिश भारतीय जिला प्रशासन पर लागू किया। सर्वप्रथम 1776 में कलकत्ता जिले के दीवान के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था।
  • पुर्ले और बर्नेल के शब्दों में, "जिला उन प्रशासनिक डिस्ट्रिक्ट्स का तकनीकी नाम था, जिनमें ब्रिटिश भारत विभाजित था।” अतः भारत में फ्रांसीसी प्रिफेक्ट के निकटतम अनुरूप जिला कलेक्टर का पद होता है।

17. फ्रेड रिग्स के अनुसार प्रशासनिक उपव्यवस्था 'चैम्बर' निम्नलिखित में से किस समाज में पायी जाती है?

Correct Answer: (b) समकित (फ्यूज्ड)
Solution:एफ.डब्ल्यू. रिंग्स के अनुसार, प्रशासनिक उपव्यवस्था 'चैम्बर' समकित (फ्यूज्ड) समाज में पायी जाती है। यह समाज अविकसित, विकसित और विकासशील समाजों का प्रतिनिधित्व करता है। परंपरागत रूप से कृषि, लोक समाज जुड़े हुए हैं, औद्योगिक समाज विवर्तित है और मध्यवर्ती समाज जुड़े हुए हैं। ये इस प्रकार से जुड़ा हुआ समाज है, जहाँ एक ही संरचना कई कार्य करती है और विवर्तित समाज वह है जहाँ एक ही संरचना सीमित कार्य करती है।
फ्रेड डब्ल्यू. रिंग्स की प्रमुख रचनाएँ-
  • Frontiers of development administration, (1970)
  • Administration in developing countries; the theory of prismatic society, (1964)
  • Prismatic society revisiting. (1973)
  • The ecology of public administration, (1961)

18. सरकारी कंपनी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही नहीं है?

Correct Answer: (c) सरकार अधिकतम 51% की अंश पूँजी धारित कर सकती है।
Solution:सरकारी कंपनी के संदर्भ -
  • यह कंपनी अधिनियम के अंतर्गत स्थापित होती है।
  • निदेशकों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है।
  • कंपनी अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा लेखों (एकाउंट्स) की संपरीक्षा की जाती है।
  • कंपनी के संगठनात्मक, वित्तीय, प्रबंधकीय और सभी संगत पहलुओं से संबंधित क्रियाविधियाँ हैं।
  • निदेशकों एवं प्रबंधकों की शक्तियों और जिम्मेदारियों, पूँजी जुटाने अपनी की बैठकों के आयोजन, कंपनी के खातों को रखने एवं उनकी लेखा परीक्षा, निरीक्षण की शक्तियाँ इत्यादि सम्मिलित है।
    * सरकार अधिकतम 51 प्रतिशत की अंश पूँजी धारित कर सकती है। यह कथन सरकारी कंपनी के संदर्भ में सही नहीं है।

19. अत्यावश्यक वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्यपालिका को प्रदत्त वित्तीय अनुदान, जिसकी सूचनाएँ सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, उसे कहते हैं-

Correct Answer: (c) प्रत्यनुदान
Solution:

यदि किसी राष्ट्रीय आपात के कारण सरकार की वित्तीय माँग में अचानक वृद्धि हो जाए तथा उस खर्च का विवरण भी देना सरकार के लिए संभव न हो, तो इसे लोक सभा के समक्ष प्रत्ययानुदान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जिसमें सरकार अत्यावश्यक वित्तीय आश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्यपालिका को प्रदत्त वित्तीय अनुदान को सार्वजनिक नहीं की जाती है।

20. 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाएँ किस तिथि से प्रभावी हैं?

Correct Answer: (b) 1 अप्रैल, 2020
Solution:

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22 नवंबर, 2017 को 15वें वित्त आयोग के गठन को मंजूरी प्रदान की। 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल 2020-25 तक होगा। अभी तक 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें वित्तीय वर्ष 2019-20 तक लिए वैध है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाएँ 01 अप्रैल, 2021 से प्रभावी होगी। ध्यातव्य है कि इस आयोग की अध्यक्षता श्री एन0के0 सिंह कर रहे हैं, जो कि भारत सरकार के पूर्व सचिव एवं वर्ष 2008-14 तक बिहार से राज्यसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। वित्त आयोग के संबंध में भारतीय संविधान 280 और 281 में उल्लेख किया गया है। वित्त आयोग एक अर्द्धन्यायिक एवं सलाहकारी निकाय है।