Solution:द्वितीय विश्व युद्ध के बाद प्रशासन और संगठन के अध्ययन हेतु पारिस्थितिकीय उपागम का प्रचलन हुआ। इस उपागम को संगठन के अध्ययन के तुलनात्मक उपागम के नाम से भी जाना जाता है। इस उपागम के प्रचलन के पीछे यह धारणा है कि पश्चिमी संगठन सिद्धांत तृतीय विश्व के देशों में प्रशासन की समस्याओं के अध्ययन के लिए अपर्याप्त है।
लोक प्रशासन अपने परिवेश में अलग रहकर कार्य नहीं करता है। पारिस्थितिकीय शब्द जीव विज्ञान से लिया गया है। यह प्राणियों तथा उनके भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण की अंतः क्रिया का अध्ययन है। जे.एम. गाँस, रॉबर्ट ए. डहल तथा राबर्ट ए. मर्टन ने फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स से वर्षों पहले लोक प्रशासन के अध्ययन के पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण की शुरुआत की थी।
परंतु रिंग्स ने ही इस दृष्टिकोण के प्रति महत्वपूर्ण योगदान दिया। विकासशील देशों की प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अपने अध्ययन में रिंग्स ने एक विस्तृत परिप्रेक्ष्य में प्रशासनिक तथा आर्थिक, तकनीकी, राजनीति तथा संचार कारकों के बीच संबंध का विश्लेषण किया है। थाईलैंड तथा फिलीपींस में अपने अध्ययनों के आधार पर उसने उदाहरण लेकर यह बतलाया कि किस प्रकार पर्यावरण प्रशासनिक व्यवस्थाओं को प्रभावित करता है।