शासन एक राज्यतंत्र की शासनीय क्षमता का उल्लेख करता है या दूसरे शब्दों में, एक राजनीतिक प्रणाली को कार्यकुशलता से संचालित करने की योग्यता प्रदान करना और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक राजनीतिक परिस्थितियों को उपलब्ध कराना है। शासन देश, या संगठन की प्रशासनिक निर्णयन प्रक्रिया कार्यान्वयन प्रक्रम का उलेख करता है। देश राज्य स्तर पर, बहुविधीय कार्यों के प्रबंधन हेतु शासन, राजनीतिक, आर्थिक और प्रशासनिक प्राधिकारों का प्रयोग करता है।
इसमें जटिल रचनाएँ, प्रक्रियाएँ और संस्थाएँ समाविष्ट हैं, जिसके द्वारा नागरिक और समूह अपनी रुचियाँ को सुस्पष्ट करते हैं, अपने मतभेदों की मध्यस्थता करते हैं और अपने कानूनी अधिकारों और दायित्वों का प्रयोग करते हैं। यह संसाधनों और कार्मिकों का उत्तम रूप से उपयोग करने के लिए प्रभावशाली है, और साम्यापूर्ण है। मूलतः यह न्याय को प्रोत्साहित और कानून के शासन को सुनिश्चित करता है।
शासन सरकार की पुनः अन्वेषण करने का प्रचलन है जो अच्छी प्रकार से प्रबंधित हो। शासकीय क्षमता शासन की योग्यता की ओर संकेत करता है, जिसे शासित करने की गुणवत्ता से परिभाषित किया जा सकता है, अर्थात् नियंत्रण और प्रबंधन करने की क्षमता पर शासकीय क्षमता ने धीरे-धीरे वैश्विक स्थान में नई-नीतियों को बनाने की युक्तियों को कार्यान्वित करने की ओर प्रोत्साहित किया है। शासकीय क्षमता को शासन के उद्देश्य के गुणों से संबंधित करने का विचार इसके विषयों और इन दोनों के बीच संबंध, हमें किसी सामाजिक प्रणाली का इसके अस्तित्व से सफल शासन की प्रवणता शासकों को समझाने में सहायता करता है।
शासकों तथा शासितों के बीच अंतक्रिया सभी शासन की क्षमता में ऐसे ही सहायक होते हैं, जैसे सभी प्रकार के बाह्यः प्रभाव होते हैं। बाहरी और आंतरिक घटकों के अधीन शासन की क्षमता लगातार बदलती रहती है। एक दिन दिए गए समय पर शासन की क्षमता उच्च हो सकती है, वह किसी दूसरे समय पर कम हो सकती है। परंतु कई बाहरी घटक शासकीय क्षमता को भी प्रभावित करते हैं, जिनमें से कुछ को शासन में जैसे-जैसे हल कर सकता है या बिल्कुल भी नहीं कर सकता है।
यह प्रायः एक सामाजिक प्रणाली या संस्था की शासकीय क्षमता के संबंध में अनिश्चितता का संवर्धन करता है। शासनकी क्षमता के तीन मुख्य घटक देखे गए हैं। एक प्रणाली जिसमें शासित किया जाना है। (SG), एक शासन प्रणाली (GS) और इन दोनों के बीच अंतक्रिया (GI)। SG और GS के बीच की अंतक्रिया मूल तत्व है। जोकि शासकीय क्षमता को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। जो शासित होते हैं, वे अपनी सहभागिता से शासन करने वालों को प्रभावित करने के प्रयास में लगे रहते हैं।
शासी संस्थाएँ शासितों को अपनी नीतियों और प्रबंधन प्रयासों से प्रभावित करने की कोशिश करती हैं। शक्तिशाली संबंध और सामाजिक-राजनीतिक परंपराएँ, शासन अंतर्कियाओं में अपनी अभिव्यक्ति प्राप्त करते हैं। अभिनेता के अनुबोधन से इनको कुछ मुख्य वर्गों, श्रेणी में रखा जा सकता है सहभागी, सहयोगी और नीति या प्रबंधन अंतक्रियाएँ। सहभागी अंतर्क्रिया को मूलतः शासन करने वाले और शासितों की प्रतिक्रियाशीलता से निर्धारित किया जाता है। इस प्रतिक्रियाशीलता को क्रियाकलापों का संग्रह कहा जाता है।
यह संग्रह विस्तृत है और हम शासन करने वाले तंत्र से शासित होने वाले तंत्र से निर्देशित सहभागी अंतक्रियाएँ अवधारणात्मक दृष्टि से देखते हैं। इस प्रकार के स्वैच्छिक, शासन अंतर्क्रिया से स्वच्छंदता से संघटित इस प्रकार की सामाजिक गतिविधियाँ इशका विशिष्ट उदाहरण है। सहयोगी प्रकार की शासन वाली अंतक्रियाओं के महत्व में वृद्धि हो रही है। लोक और निजी संस्थानों में भागीदारी इस प्रकार के सहयोग का एक लोकप्रिय रूप है, परंतु कंपनियों और NGO में भी सहयोगी अंतक्रिया होती है, यद्यपि इनके प्रयोजन/ उद्देश्य भिन्न हो सकते हैं।
नीति और प्रबंधन अंतक्रिया शासन प्रणाली के मध्यस्थ का अभिक्रम है जिनका लक्ष्य शासित होने वाली प्रणाली पर प्रभाव डालना है। लोक प्राधिकारियों के पास राजनीतिक से प्रेरित सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए बहुल विधियाँ हैं, जिनको नीतियों के सत्रों में प्रस्तुति किया जाता है।
नीति और प्रबंधन अंतक्रियाएँ किसका मार्ग प्रदर्शित करती हैं।