समाजशास्त्रीय अध्ययन दो प्रकार के गावों पर केंद्रित था- पहला एक बड़ा गाँव, जिसमें लगभग 5142 लोग रहते थे बड़ा और दूसरा एक छोटा गांव जिसमें, केवल 757 लोग रहते हैं आकार में अंतर होने के बावजूद दोनों ही गांव तौर पर समान जातीय और धार्मिक संरचना दर्शात हैं प्रत्येक गांव में हिंदू तथा मुस्लिम परिवार शामिल है जो आंतरिक स्तर पर जाति अथवा जाति थे प्रत्येक समूह में कुछ प्रभुत्व लोग थे जो उस गांव के आर्थिक एवं राजनीतिक संसाधनों के अधिकांश भाग पर नियंत्रण करते है। ग्रामीण जनसंख्या तीन सामाजिक-आर्थिक समूहों में विभक्त थी-
1. कृषकों का एक समूह जिनका सामाजिक स्तर ऊंचा है और उनकी आय अधिक है जिससे वे कुछ अन्य जातियां प्रभुत्वसंपन्न जाति बन जाते है और अन्य जातियों के कुछ लोगों के साथ जिन्होंने अपने अनुचरों की तुलना में बेहतर आर्थिक स्थिति प्राप्त की है।
2. कम सम्पन्न कृषकों, कारीगरों तथा व्यावसायिक जातियों के सदस्यों वाला एक मध्यम समूह तथा
3. कम प्रभाव एवं आय की स्थिति वाले लोगों का एक समूह है जिनमें अस्पृश्य तथा गरीब कृषि मजदूर शामिल है। दोनों ही गांवों में एक छोटा किंतु प्रभावशाली वर्ग है जो अभिजात्य वर्ग बनाते है इसमें अधिकांश ऐसे लोग शामिल है जो अधिक शिक्षित है तथा जिनके शहरी संपर्क भी है जो ग्रामीण तथा अंत ग्रामीण राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते है
गांव के कृषक वर्ग के निम्नलिखित लक्षण है
A. उच्च सामाजिक स्थिति
B. प्रभुत्वसंपन्न जाति का संवर्ग बनाते है
C. उच्च आय
D.भूमिहीनता
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
Correct Answer: (a) केवल A, B और C
Solution:गांव के कृषक वर्ग के लक्षण है- उच्च सामाजिक स्थिति, प्रभुत्व सम्पन्न जाति का संवर्ग बनाते है और उच्च आय।