NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा (निरस्त) जून, 2024 (लोक प्रशासन)

Total Questions: 100

91. निम्न गद्यांश को पढ़िए और उसके बाद पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

लोकनीति का एक अकादमिक विषय है जो सरकारी कार्रवाही और सार्वजनिक मामलों से संबंधित प्रक्रियायों, निर्णयों व निष्कर्षों का अध्ययन करता यह सामाजिक मुद्दों से जुड़ी नीतियों के विश्लेषण, विकास व मूल्यांकन हेतु, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र, सामाजिक शास्त्र... जैसे विभिन्न क्षेत्रों से सहायता लेता है। लोकनीति अंतर्निहित रूय से अंतर्विषयी है और जटिल सामाजिक समस्याओं को समझने व प्रभावी समाधान सूत्रबद्ध करने के लिए विभिन्न क्षेत्र अंतर्दृष्टि व प्रणाली विज्ञान प्राप्त करती है। इस क्षेत्र विद्धान नीति मामलों के विश्लेषण हेतु गुणात्मक व परिमाणात्मक शोध विधियों का ...... कर सकते हैं।

यह विश्लेषण नीतियों के अभिप्रेत निष्कर्ष और अनभिप्रेत परिणामों को देखते हुए नीतियों की प्रभाविता, कार्यकुशलता व सामान्य आकलन करता है। लोकनीति अध्ययनों को यह अनिवार्य रूप से समझना होगा कि नीतियों का प्रतिपादन, कार्यान्वयन व मूल्यांकन कैसे होता है। इसमें नीति .........निर्णयों को आकार देने में सरकारी एजेंसियों, हितबद्ध समूहों और जनता और विभिन्न अभिनेताओं की भूमिकाओं का अध्ययन करना शामिल इसमें नीति लक्ष्यों की पहचान, समुचित नीति उपकरणों का चयन और उस राजनीतिक व आर्थिक संदर्भ पर विचार करना अंतर्निहित है जिस नीतियों प्रचालित होता है। लोकनीति विषय चर्चाओं में बहुधा वितरणात्मक न्याय, व्यक्तिगत अधिकार व सांविधिक नियंत्रण के प्रश्नों जैसे व विधिक विषय भी विचारणीय होते हैं।

लोकनीति को सामाजिक मूल्यों में परिवर्तन, प्रौद्योगिकीय उन्नति, आर्थिक स्थितियां, राजनीतिक गतिशीलता और बाह्य घटनाओं जैसे विविध .......प्रभावित करते है। लोकनीतिक में बहुधा विभिन्न हितों व परिप्रेक्ष्य वाले बहु-हितधारक अंतर्निहित होते है जिनके चलते जटिल वार्ताएं व समझौते हैं। समय के साथ बदलती परिस्थितियों व प्राथमिकताओं की अनुक्रिया में लोकनीति में क्रमिक विकास होता है। नई समस्याएं उभर कर ......आती है और पुरानी समस्याओं का समाधान होता है अथवा नई समस्याएं उन्हें प्रतिस्थापित कर देती है।
लोकनीति विद्वान निम्न में से किसके विश्लेषण हेतु गुणात्मक व परिमाणात्मक शोध विधियों का नियोजन करते हैं?

Correct Answer: (a) कार्यकुशलता व साम्यता
Solution:

लोकनीति विद्वान कार्यकुशलता व साम्यता हेतु गुणात्मक व परिणात्मक शोध विधियों का नियोजन करते हैं।

92. लोकनीति अध्ययनों को अनिवार्य रूप में निम्न में से किस-किस का बोध होना चाहिए।

(A)  जटिल सामाजिक समस्याएँ
(B) अलग-अलग कारकों की भूमिका
(C) उचित नीति उपकरणों का चयन
(D) राजनीतिक व आर्थिक संदर्भ पर विचार
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A, B, C और D
Solution:

लोकनीति अध्ययनों को अनिवार्य रूप में निम्न तथ्यों का बोध होना चाहियेः -
1. जटिल सामाजिक समस्याएँ
2. अलग-अलग कारकों की भूमिका
3. उचित नीति उपकरणों का चयन
4. राजनीतिक व आर्थिक संदर्भ पर विचार

93. निम्न में से कौन सा कारक लोकनीति को प्रभावित नहीं करता है?

Correct Answer: (d) पारंपरिक सिद्धांत
Solution:पारंपरिक सिद्धांत लोकनीति को प्रभावित नहीं करता है।

94. एक अकादमिक विषय के रूप में, लोकनीति निम्न में से किन-किन क अध्ययन करती है?

(A) प्रक्रियाएँ
(B) निर्णय
(C) निष्कर्ष
(D) परिणाम
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B और C
Solution:एक अकादमिक विषय के रूप में लोकनीति निम्न विषयों का अध्ययन करता है -
  • प्रक्रियाएँ
  • निर्णय
  • निष्कर्ष

95. लोकनीति चर्चाओं में निम्न में से क्या सम्मिलित होता है?

Correct Answer: (d) Priorities of group members /समूह के सदस्यों की प्राथमिकताएँ
Solution:वितरणात्मक न्याय लोकनीति चर्चाओं में सम्मिलित होता है।

96. निम्न गद्यांश को पढ़िए व उसके बाद पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

समाज कल्याण विधियाँ लंबे समय से चले आ रहे पहचाने के संकट से ग्रस्ट हैं। इसके अर्थ व विषय क्षेत्र का एक स्थायी 'पारिभाषित कठिनाई', 'यथेष्ट असहमति' के स्रोत और 'एक सुस्पष्ट और एकीकृत विधिक विशेषज्ञता के रूप में मुख्यतः अमान्य' क्षेत्र के रूप में वर्णन किया गया है। कुछ विद्वानां का तर्क है कि कल्याणकारी विधि जाँच के एक सुस्पष्ट क्षेत्र के रूप में मान्य होने योग्य नहीं है क्योंकि यह एक नया क्षेत्र है और अतः काफी हद तक सीमांत विषय है; यह विद्यमान ज्ञान पर परजीवी है क्योंकि इसकी बौद्धिक पहचान एक मृगतृष्णा है।

यद्यपि समाज कल्याण विधियों के 1960 और 1970 के दशकों के निर्माण काल से ही इस विषय में अविश्वास अपने चरम पर रहा है कि क्या ये विधियाँ स्वयं में एक वैध 'क्षेत्र' का गठन कर सकती हैं, इनकी तथाकथित 'परिभाषा की समस्या' अभी भी नहीं सुलझ पाई है। 1969में, फ्रेडमैन ने पूछा था, 'क्या समाज कल्याण विधियाँ अन्य विधियों से वर्गीय रूप में भिन्न हैं?' उनके अनुसार 'अनके लोगों को अंतर का एक सहज बोध होता है' परन्तु इस क्षेत्र के अग्रणी विद्वान भी 'यह नहीं बता पाते हैं कि वह अंतर कहाँ है।' मार्टिन ने भी इसी भावना को दोहराते हुए कहा कि 'पारिभाषित शब्दावली की विफता' से वैध प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा कुछ है जो विधि के एक सुस्पष्ट क्षेत्र के रूप में मान्यता दिए जाने योग्य है।

समाज कल्याण विधियों हेतु, 'परिभाषा की समस्या' के संबंध में आप जांजच के क्षेत्र को परिभाषित करने में' उपागमों के वर्गीकरण से आरंभ कर सकते हैं। समाज कल्याण विधियों पर पहले के लेखन में अनेक उपागम दिखाई देते हैं। संविधियों में स्पष्ट कया गया है, 'निर्धनों की विधि', 'कूड़ेदान', 'प्रकरण (केस) अध्ययन' और 'समानता को जोखिम' ।

समाज कल्याण विधि विद्वत्ता की एक वैश्विक संकल्पना की भी आवश्यकता है जिसमें वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साऊथ) में बहुधा विद्वत्ता को अभिलक्षित करने वाली समाज कल्याण विधियों का विस्तृत विषय क्षेत्र सम्मिलित हो और वैश्विक संदर्भ में पश्चिमी विद्वता के 'स्वदेशीकरण' से बचा जा सके। अंत में, समाज कल्याण प्रावधान के विकास में निजी व परोपकारी प्रदाताओं का बढ़ता महत्व समाज कल्याण प्रावधान के विकास में निजी व परोकारी प्रदाताओं का बढ़ता महत्व समाज कल्याण विधियों की 'एकमात्र राज्य' की संकल्पना के विरुद्ध जाता है।
निमन में से कौन-कौन समाज कल्याण विधियों के लिए पहचान के संकट का वर्णन करते हैं:
(A)  परिभाषा का अभाव
(B) असहमतियाँ
(C) बौद्धिक पहचान एक मृगतृष्णा है
(D) एक विधिक विशेषज्ञता के रूप में मान्यता नहीं
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B और D
Solution:निम्न बिन्द समाज कल्याण विधियों के लिए पहचान के संकट का वर्णन करते हैं-
• परिभाषा का अभाव
• असहमतियाँ
• एक विधिक, विशेषज्ञता के रूप में मान्यता नहीं

97. निम्न में से कौन सामाजिक कल्याण विधि की "एकमात्र राज्य" संकल्पना की ओर संकेत करता है?

Correct Answer: (d) सामाजिक कल्याण विधि की वैश्विसक संकल्पना
Solution:

सामाजिक कल्याण विधि की वैश्विक संकल्पना एकमात्र राज्य' की संकल्पना की ओर संकेत करता है।

98. समाज कल्याण विधि को एक पृथक क्षेत्र के रूप में मान्यता योग्य न होने के तर्क निम्न में से किस-किस कारण से हैं?

(A) विषय का नवीन क्षेत्र
(B)  विद्यमान ज्ञान पर परजीवी
(C) बौद्धिक पहचान एक मृगतृष्णा है।
(D) एकीकृत विधिका विशेषज्ञता मान्य नहीं है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल A, B और C
Solution:

समाज कल्याण विधि को एक पृथक क्षेत्र के रूप में मान्यता योग्य न होने के निम्न तर्क है:-
• विषय का नवीन क्षेत्र
• विद्यमान ज्ञान का परजीवी होना
• बौद्धिक पहचान एक मृग तृष्णा है।

99. निम्न में से कौन-सा कथन समाज कल्याण विधियों के विध का एक सुस्पष्ट भाग ने होने की प्रकृति ....

Correct Answer: (d) गौण विषयों से संबंधित है।
Solution:

गौण विषयों से संबंधित विषय समाज कल्याण विधियों के विधि का एक सुस्पष्ट भाग न होने की प्रकृति का वर्णन करता है।

100. पश्चिमी विद्वत्ता के वैश्विक संदर्भ में 'स्वदेशीकरण' का अर्थ है:

Correct Answer: (b) पश्चिमी विचारों का अन्य देशों पर अनुप्रयोग
Solution:

पश्चिमी विद्वता के वैश्विक संदर्भ में स्वदेशीकरण का अर्थ है पश्चिमी विचारों का अन्य देशों पर अनुप्रयोग।