ऐतिहासिक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में जिला किसी एक अथवा दूसरे रूप में प्रशासन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई रहा है। आधुनिक समय में भारत के संबंध में ब्रिटिश संसद, प्रथम विधानमण्डल था जिसने अधिनियम बनाए तथा प्रशासन में जिला प्रशासन के प्रमुख को महत्त्व प्रदान किया जिसे सामान्यतः कलेक्टर डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या डिप्टी कमिश्नर के रूप में जाना जाता है।
स्वतंत्रता पश्चात् के काल में, जब अर्थव्यवस्था विविधीकृत हुई तथा औद्योगीकरण की गति एवं तृतीयक गतिविधियाँ तीव्र हुईं तब अन्य कर्मचारी वृन्दों को भी महत्त्व प्राप्त हुआ। परन्तु अभी भी महानगरों मेगा शहरों के अतिरिक्त देश के अधिकतर भागों में कलेक्टर प्रशासन सर्वाधिक पहचाना हुआ पद है जिसे जिला स्तर पर सरकार का प्रमुख प्रतिनिधि माना जाता है तथा जिसे भूमि विवाद.......सभी समस्याओं तथा यहाँ तक कि पारिवारिक व्यतिक्रमों (विवादों) के मामलों को सुलझाने के लिए भी सम्पर्क किया जा सकता है।
यद्यपि, नवीन प्रशासनिक एवं विकास परिवेश के अनुसार पंचायती राज संस्थाएं नगरीय स्थानीय निकाय आदि शासन का तीसरा सोपान हैं फिर भी स्थानीय विकास के मामलों में कलेक्टर को सभी दायित्वों पूर्णतः मुक्त नहीं किया जा सकता है। जिला स्तर पर कलेक्टर, मानवीय क्षमताओं में संवर्धन करने, भौतिक अवसंरचना के सृजन, समाज के उपांतिक वर्गों को आर्थिक अवसर प्रदान करने तथा आपदाओं के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों का सामना करने जैसे बहुविध कार्योंके लिए अभी भी उत्तरदायी है।
निम्नलिखित कौन से कार्यों को ब्रिटिश शासन के दौरान उपायुक्त की प्राथमिक भूमिका माना गया था?
Correct Answer: (c) सामान्य प्रशासन तथा विशिष्ट कार्यों से संबंधित कार्य
Solution:उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित होगा। 'सामान्य प्रशासन तथा विशिष्ट कार्यों से संबंधित कार्य' को ब्रिटिश शासन के दौरान उपायुक्त की प्राथमिक भूमिका माना गया है।