"भारत की अर्थव्यवस्था मिश्रित, मध्य-आय, विकासशील सामाजिक बाजार अर्थव्यवस्था है। नामिनल सकल घरेलू उत्पाद के अनुसार यह विश्व की पांचवी सबसे बड़ी और क्रयशक्ति समतुल्यता (पी.पी.पी) के अनुसार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइ.एम.एफ) के अनुसार (नामिनल) सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) के आधार पर प्रतिव्यक्ति आय में भारत का स्थान 142 वां और (पी.पी.पी.) (स.घ.उ.) के आधार पर 125वां है।
1942 में मिली स्वतंत्रता से 1991 तक, क्रमशः सारी सरकारों ने संरक्षणवादी आर्थिक नीतियों को बढ़ावा दिया जिसमें राज्य का हस्तक्षेप ओर आर्थिक नियमन अत्यधिक था लाइसेंस राज के रूप में नियंत्रण ही इसकी विशेषता थी। शीत युद्ध की समाप्ति और 1991 के प्रचंड भुगतान संतुलन संकट ने भारत में व्यापक आर्थिक उदारीकरण को स्वीकार्य बना दिया।
21वीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही सकल घरेलू उत्पाद की औसत वार्षिक वृद्धि दर 6% से 7% रही है। सन् 2013 से 2018 तक, भारत चीन को पछाड़ते हुए विश्व की सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था थी। भारतीय उपमहाद्वीप की अर्थव्यवस्था, अभिलेखबद्ध इतिहास के अधिकांश काल में विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रही जब तक कि 19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में उपनिवेशवाद का प्रादुर्भाव नहीं हो गया। पी.पी.पी के आधार पर विश्व अर्थव्यवस्था में भारत अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी 7.5% थी।
युवा-जनसंख्या, निम्न निर्भरता अनुपात, पर्याप्त बचत, निवेश दरें, भारत में उत्तरोत्तर बढ़ते वैश्वीकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक वृद्धि परिप्रेक्ष्य को सकारात्मक रखा है।
भारत का लगभग 70% सकल घरेलू उत्पाद देशी निजी उपभोग से संचालित है। भारत विश्व का छठवां सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। निजी उपभोग के अलावा, भारतीय सकल घरेलू उत्पाद सरकारी व्यय, निवेशों और निर्यातों से भी ऊर्जा ग्रहण करता है।
एक जनवरी, 1995, से ही भारत विश्व व्यापार संगठन का एक सदस्य है। कारोबार करने में सुविधा के सूचकांक के मामले में भारत का स्थान 37वां और वैश्विक प्रतियोगितात्मकता रिपोर्ट के अनुसार 37वां है। रूपये प्रति डालर की दरों में अत्याधिक उतार-चढ़ाव के कारण भारत के नामिनल सकल घरेलू उत्पाद में भी महत्त्वपूर्ण घटाव बढ़ाव देखने को मिलता है।
50 करोड (500 मिलियन) श्रमिकों के साथ भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी श्रम शक्ति है। भारत विश्व के उन देशों में एक है जहाँ अरबपतियों की संख्या सर्वाधिक और अत्याधिक आर्थिक असमानता है। बहुत सारी छूटों को कारण केवल 2% भारतीय ही आयकर देते हैं।
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: भारत विश्व के अरबपतियों की सर्वाधिक संख्या वाले और अत्यधिक आर्थिक असमानता वाले देशों में एक है। बहुत सारी छूटों के कारण केवल 5% भारतीय ही आयकर देते हैं।
कथन II: भारतीय श्रम शक्ति, 50 करोड़ (500 मिलियन) श्रमिकों के साथ विश्व की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:
Correct Answer: (d) कथन I गलत है, लेकिन कथन II सही है
Solution:भारत विश्व के अरबपतियों की सर्वाधिक संख्या वाले और अत्यधिक आर्थिक असमानता वाले देशों में एक है। बहुत सारी छूटों के कारण केवल 5% भारतीय ही आयकर देते है। यह कथन (I) गलत है, लेकिन भारतीय श्रम शक्ति, 50 करोड़ (500 मिलियन) श्रमिकों के साथ विश्व की दूसरी सबसे बड़ी श्रम शक्ति है। यह कथन (II) सही है। अतः कथन (I) गलत है, लेकिन कथन (II) सही है।