NTA यू.जी.सी.नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 वाणिज्य (Shift – II)

Total Questions: 100

1. निम्नलिखित में से कौन-सी "प्रशुल्क मुक्त आयात प्राधिकार (डीएफआईए)" स्कीम की उचित व्याख्या ?

Correct Answer: (b) निर्यात हेतु उपयोग किए जाने वाले सामानों को सीमा शुल्क, अतिरिक्त शुल्क, शिक्षा उपकर तथा प्रतिपाटन व अन्य प्रशुल्कों से छूट प्रदान करना।
Solution:

निर्यात हेतु उपयोग किए जाने वाले सामानों को सीमा- शुल्क, अतिरिक्त शुल्क, शिक्षा उपकर तथा प्रतिपाटन व अन्य प्रशुल्कों से छूट प्रदान करना "प्रशुल्कों मुक्त आयात प्राधिकार (डी.एफ.आई.ए.)” स्कीम की उचित व्याख्या है। शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार को केवल बुनियादी सीमा शुल्क के भुगतान से छूट दी गई है। अतिरिक्त सीमा शुल्क में छूट नहीं है। और इसे राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार सेन ट क्रेडिट के रूप में समायोजित किया जायेगा। शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार प्राप्त करने के लिए पात्रता :-
(i) किसी भी व्यापारी निर्यातक को निर्यात दस्तावेज़ पर निर्यात उत्पाद के सहायक निर्माता के नाम और पते का उल्लेख करना आवश्यक होगा। शिपिंग बिल/ निर्यात बिल एयरवे बिल।
(ii) उन उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त आयात प्राधिकरण जारी किया जायेगा जिनके लिए मानक इनपुट, आउटपुट मानदंड अधिसूचना किए गए हैं।
(iii) शुल्क मुक्त आयात प्राधिकार के तहत निर्यात को प्रभावित करने से पहले संबंधित क्षेत्रीय प्राधिकरण के पास एक आवेदन दायर किया जाना है।

2. कोई भारतीय कंपनी जिसमें एफडीआई स्कीम के अन्तर्गत शेयर परिवर्तनीय डिबेंचर पूर्वाधिकार शेयर जारी करने के लिए भारत के बाहर से निवेश किया गया हो, उसे निवेश प्रवाह का विवरण आर.बी.आई. को प्रस्तुत करना चाहिए। इन विवरणों को आर.बी.आई. को प्रस्तुत करने की समय-सीमा क्या है?

Correct Answer: (c) प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर
Solution:

सामान्यतः कोई भारतीय कंपनी जिसमें एफ.डी.आई. स्कीम के अन्तर्गत शेयर परिवर्तनीय डिबेंचर पूर्वाधिकार शेयर जारी करने के लिए भारत के बाहर से निवेश किया गया हो, उसे निवेश प्रवाह का विवरण आर.बी.आई. को प्रस्तुत करना चाहिए। इन विवरणों को आर.बी.आई.को प्रस्तुत करने की समय-सीमा प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर है।

3. अभिवृत्ति परिवर्तन के निम्नलिखित में से किस सिद्धान्त में यह कहा गया है कि विचार के परिवर्तन से अभिवृत्ति की परिणति होती है?

Correct Answer: (c) पुनर्बलन का सिद्धान्त
Solution:

W.F. Hill के अनुसार, “पुनर्बलन अनुक्रिया का वह परिणाम है, जिससे भविष्य में उस अनुक्रिया के होने की संभावना में वृद्धि होती है। यह सिद्धान्त व्यक्ति के व्यवहार के लिए नियंत्रण तंत्र का विश्लेषण करने के लिए एक मजबूत उपकरण है। हालांकि, यह व्यक्ति के व्यवहार के कारणों पर ध्यान केन्द्रित नहीं करता है।

4. पोर्टर के हीरक के अनुसार, निम्नलिखित में से कौनसा राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक लाभ का कारक नहीं है?

Correct Answer: (c) क्रेताओं की सौदेकारी शक्ति
Solution:

माइकल पोर्टर ने 1990 में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी लाभ (National Competitive Advantage) की व्याख्या करने के लिए एक नया मॉडल विकसित किया। पोर्टर ने सिद्धान्त में कहा कि एक उद्योग में राष्ट्र की प्रतिस्पर्धात्मकता उद्योग की नवाचार और उन्नयन की क्षमता पर निर्भर करती है। उनका सिद्धान्त यह समझाने पर केन्द्रित था कि क्यों कुछ देश कुछ उद्योगों में अधिक प्रतिस्पर्धी हैं। अपने सिद्धान्त की व्याख्या करने के लिए, पोर्टर ने चार निर्धारकों की पहचान की। वे चार निर्धारक हैं :-
(i) स्थानीय बाजार संसाधन और क्षमताएँ,
(ii) स्थानीय आपूर्तिकर्ता और पूरक उद्योग;
(iii) स्थानीय बाजार की माँग की स्थिति;
(iv) स्थानीय फर्म की विशेषताएँ
अतः पोर्टर के हीरक के अनुसार क्रेताओं की सौदेकारी शक्ति राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा लाभ का कारक नहीं है।

5. X और Y लाभ और हानि में 3: 2 के अनुपात में हिस्सेदार हैं। वे 2 को एक नए साझेदार के रूप में शामिल करते हैं जिसका लाभ में 1/5 हिस्सा है। साझेदारों के लाभ में हिस्सेदारी के नए अनुपात की गणना कीजिए।

Correct Answer: (a) 12 : 8 : 5
Solution:

मान लीजिए नया लाभ = 1
नई फर्म में Z का हिस्सा = 1/5
इसलिए, Z को देने के बाद बचा हुआ लाभ = 1 − 1/5 = 4/5
X और Y का नया लाभ
X का = 4/5 × 3/5 = 12/25
Y का = 4/5 × 2/5 = 8/25
और Z का हिस्सा
Z का = 1/5 × 5/5 = 5/25
इसलिए X, Y और Z का नया लाभ-हानि अनुपात है
= 12 : 8 : 5

6. सम-विच्छेद बिन्दु पर अंशदान निम्नलिखित में से किसके समान होता है?

Correct Answer: (c) स्थिर लागत
Solution:

समविच्छेद बिन्दु (Break-even Point) उत्पादन के उस स्तर पर होता है जहाँ TR = TC अथवा AR = AC हों। यह दोनों स्थितियाँ क्रमशः दोनों चित्र में व्यक्त की गई है।
अतः समविच्छेद बिन्दु पर अंशदान स्थिर लागत के समान होता है।समविच्छेद बिन्दु (इकाइयों में) =  कुल स्थायी लागत / बिक्री मूल्य - परिवर्तनशील लागत
जहाँ बिक्री बिन्दु मूल्य परिवर्तनशील मूल्य से प्रतिइकाई स्थायी
लागत निकलती है।
समविच्छेद मूल्य (रुपयों में) = कुल स्थायी लागत / अंशदान सीमांत अनुपात
जहाँ, अंशदान सीमान्त अनुपात (C.M.R.)
= बिक्री मूल्य - परिवर्तन लागत / बिक्री मूल्य

7. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही नहीं है?

Correct Answer: (d) बाजार में किसी नए उत्पाद का प्रवेश कराने के लिए विज्ञान अभियान पर भारी व्यय
Solution:

बाजार में किसी नए उत्पाद का प्रवेश कराने के लिए विज्ञापन अभियान पर भारी व्यय, एक आस्थगित राजस्व व्यय है। अतः विकल्प (d) गलत है। विज्ञापन व्यय आमतौर पर व्यवसाय के स्वामी के लिए अप्रत्याशित नहीं होते हैं, परन्तु किसी नए उत्पाद के प्रवेश पर विज्ञापन व्यय की एक निश्चित राशि का बजट बनाया जाता है।
छोटे व्यवसाय के मालिक प्रायः वार्षिक कमाई का केवल 1% ही विज्ञापन व्यय पर खर्च करते हैं। यदि थोक विक्रेताओं और उत्पादकों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तो यह आंकड़ा वार्षिक राजस्व के 0.7% के करीब है, जिसका श्रेय 2020 तक विज्ञापन को दिया जाता है।

8. नीचे दी गई सूचना से सही सामग्री उत्पाद (यिल्ड) विचलन क्या है?

मानक आगत = 100 किग्रा.
मानक उत्पाद प्राप्ति = 90 किग्रा.
उत्पाद की प्रति किया मानक लागत = 20
वास्तविक आगत = 200 किग्रा.
वास्तविक प्राप्ति = 182 किग्रा.
उत्पाद की प्रति किग्रा वास्तविक लागत = 19 रुपये

Correct Answer: (a) Rs. 40 (अनुकूल)
Solution:

सामग्री उपज विचलन = (मानक उपज − वास्तविक उपज) × मानक उत्पादन मूल्य
मानक उपज = वास्तविक सामग्री उपयोग / प्रति इकाई उत्पादन मानक उपयोग
सामग्री का वास्तविक उपयोग = 200 किग्रा
प्रति इकाई उत्पादन सामग्री का मानक उपयोग = 100 / 90
मानक उपज = 182 किग्रा
प्रति इकाई उत्पादन मानक लागत = 20
MYV = (180 − 182) × 20 = 40 रु
क्योंकि वास्तविक उपज मानक उपज से अधिक है,
इसलिए MYV = 40 रु (अनुकूल) होगा।

9. जब नकारात्मक आय प्रभाव, सकारात्मक प्रतिस्थापन प्रभाव पर इतना भारी पड़ता है कि माँग वक्ररेखा सकारात्मक रूप से ऊपर की ओर जाती है तो उपभोज्य वस्तु को किस तरह वर्णित किया जाता है?

Correct Answer: (c) गिफेन वस्तु
Solution:

जब नकारात्मक आय प्रभाव, सकारात्मक प्रतिस्थापन प्रभाव पर इतना भारी पड़ता है कि माँग वक्ररेखा सकारात्मक रूप में ऊपर की ओर जाती है तो उपभोज्य वस्तु को गिफेन वस्तु की तरह वर्णित किया जाता है। गि न एक विशेष प्रकार की निकृष्ट (घटिया अथवा निम्न कोटि) वस्तुओं (Special type of Inferior goods), जिन्हें गिफेन वस्तु भी कहा जाता है, के सम्बन्ध में लागू होता है।
गिफेन वस्तुएँ वे निकृष्ट कोटि की वस्तुएँ हैं जिन पर सामान्यतया निर्धन लोग अपनी आय का अधिकांश भाग व्यय करते हैं। जैसे- मक्का, गेहूँ की अपेक्षा व आलू, मांस की अपेक्षा एक निकृष्ट वस्तु है।

10. पूर्ण मूल्य विभेदीकरण के दूरस्थ मामले में बाजार में सम्पूर्ण उपभोक्ता अतिरेक निम्नलिखित में से किसे प्राप्त होता है?

Correct Answer: (b) एकाधिपत्य उत्पादक को
Solution:

पूर्ण मूल्य विभेदीकरण के दूरस्थ मामले में सम्पूर्ण उपभोक्ता अतिरेक एकाधिपत्य उत्पादक को प्राप्त होता है। एकाधिकारी एक एकल विक्रेता या निर्माता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो प्रतिस्पर्धा को समान उत्पाद प्रदान करने से रोकता है।