Solution:भाषा के रूप में 'अवधी' का प्रथम प्रयोग खालिक बारी में मिलता है। खालिकबारी अमीर खुसरो की रचना है। अवध क्षेत्र में व्यवहत बोली ही अवधी कहलाई।
अवधी की उत्पत्ति और उसके विकास पर चर्चा की जाय तो दो भाषा वैज्ञानिकों के मत हमारे सामने आते हैं। जहाँ जार्ज ग्रिर्यसन ने अवधी या पूर्वी हिन्दी को शौरसेनी एवं मागधी के बीच की अर्द्धमागधी से उत्पन्न माना था, वहीं बाबूराम सक्सेना इसे कोसली से उद्धृत मानते है।
मूलतः अवधी के विकास को तीन काल खण्डों में विभाजित किया जा सकता है-
1- प्रारम्भ से 1400 ई. तक
2- 1400 ई.से 1700 ई. तक
3- 1700 ई. से आज तक
प्रारम्भिक अवधी के उदाहरण पीपरहवाँ, सोहगौरा, सारनाथ, रुम्मिनदेई एवं खैरागढ़ के अभिलेख हैं।
अवधी का उदाहरण प्राकृत पैंगलम् 'राउलवेलि, उक्ति व्यक्ति प्रकरण एवं कीर्तिलता आदि ग्रंथो की भाषा में देखा जा सकता है। यहाँ तक कि हेमचन्द की अपभ्रंश भाषा में भी अवधी की ही प्रधानता है।
काव्य भाषा के रूप में अवधी को प्रतिष्ठित करने का श्रेय सूफी कवियों को दिया जाता है
'उक्ति व्यक्ति प्रकरण' हिन्दी का प्रथम गद्य ग्रन्थ है। इसकी रचना दामोदर शर्मा ने 12वीं शताब्दी के आसपास किया।यह एक व्याकरण ग्रन्थ है।
चंदायन, मुल्ला दाऊद कृत हिन्दी का प्रथम सूफी प्रेमकाव्य है। इसमें नायक लोर (लोरिक) तथा नायिका चंदा की प्रेमकथा वर्णित है। मृगावती कुतुबन की रचना है जो सन् 1501 ई. में लिखी गयी थी। इसमें चन्द्रनगर के राजा गणपतिदेव के राजकुमार और कंचनपुर के राजा रूप मुरारि की कन्या मृगावती की प्रेमकथा का वर्णन है।