NTA यू.जी.सी. नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर-2022 (हिन्दी) Shift-I

Total Questions: 100

11. आचार्य क्षेमेन्द्र ने काव्य के सूक्ष्मातिसूक्ष्म अवयव से लेकर उसके विशालतम रूप को ध्यान में रखते हुए औचित्य के कितने भेद निर्धारित किए हैं?

Correct Answer: (d) 27
Solution:

आचार्य क्षेमेन्द्र ने काव्य के सूक्ष्माति सूक्ष्म अवयव से लेकर उसके विशालतम रूप को ध्यान में रखते हुए, औचित्य के 27 भेद निर्धारित किए है।
आचार्य क्षेमेन्द्र ने औचित्य मत का प्रतिपादन कर उसे काव्य के प्राण रूप में प्रतिष्ठित किया। उनका कथन है-
अलंकारास्त्वलंकारा गुणा एवं गुणाः सदा।
औचित्यं रससिद्धस्य स्थिरं काव्यस्य जीवितम् ।।
इससे स्पष्ट होता है कि अलंकार और गुण तो अलग तत्त्व है, पर रससिद्ध काव्य की स्थिरता औचित्य तत्व पर ही निर्भर करती है, अतः औचित्य प्राण है। जब शरीर में प्राण है, तभी अलकारों और गुणों की शोभा टिकती है तथा उसमें रस का संचार हो सकता है, पर प्राणों से रहित होकर उसमें उपर्युक्त कोई भी विशेषता नहीं रह जाती है। क्षेमेन्द्र के विचार से औचित्य के भेद हैं- पद वाक्य, प्रबन्ध, गुण, अलंकार, रस, क्रिया, कारक, लिंग, वचन, विशेषण, उपसर्ग, निपात, काल, देश, कुल, व्रत, तत्त्व, सत्त्व, अभिप्राय, स्वभाव, सारसंग्रह, प्रतिभा, अवस्था, विचार, नाम, आशीष के औचित्य संयोजन रूप।

12. मूल धातु से संबंधित वक्रता को कहा जाता है?

Correct Answer: (b) पद-पूर्वार्ध वक्रता
Solution:

मूल धातु से संबंधित वक्रता को पद-पूर्वार्धवक्रता कहा जाता है। आचार्य कुंतक ने वक्रोक्ति के जो छह भेद माने हैं, वे हैं- वर्ण - विन्यास वक्रता, पदपूर्वार्धवक्रता, वाक्यवक्रता, प्रकरण वक्रता और प्रबन्धवक्रता।
पदपूर्वार्धवक्रता - यह पदवक्रता का एक रूप है। पदवक्रता में व्याकरण - सम्बन्धी प्रयोगों में चमत्कार आता है। इस पूर्वार्धवक्रता के दस रूप माने गये हैं। क्रिया के प्रयोग में जहाँ पर चमत्कार हो वहाँ पर क्रियावक्रता होती है। यह वक्रता धातु रूप प्रयोगों पर आश्रित है, जैसे-
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय ।
सौंह करै भौंहन हँसै, देन कहें नटि जाय।।
वर्णविन्यासवक्रता- इसके अन्तर्गत वर्णों के इस प्रकार का संगठन आता है जिससे चमत्कार उत्पन्न हो सके। इसके अन्तर्गत शब्दालंकार, अनुप्रास, यमक, विभिन्न वृत्तियों एवं शब्दगुणों का समावेश है।
पद परार्ध वक्रता- इसके अन्तर्गत, पद के परार्ध में प्रकट विशेषताओं का संकेत है। यह वक्रोक्ति काल, कारक, संख्या, पुरुष, उपग्रह, प्रत्यय तथा पदवक्रता के रूप में अभिव्यक्त होती है।
वाक्य वक्रता- वाक्य वक्रता के अन्तर्गत उदार और सुन्दर वस्तु का सुन्दर और रमणीय वर्णन आता है। इसमें एक प्रकार का वर्णन तो स्वाभाविक होता है जिसे स्वभावोक्ति के रूप में कहा जाता है। और दूसरा कवि की सहज और आहार्य प्रतिभा द्वारा अलौकिक या विलक्षण वर्णन होता है।

13. लिरिकल बैलेड्स (1978) किन दो कवियों की कविताओं का संग्रह है?

Correct Answer: (b) वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज
Solution:

लिरिकल बैलेड्स (1798) में वर्ड्सवर्थ एवं कॉलरिज की कविताओं का संग्रह है।
वर्डसवर्थ 1795 ई. में कोलरिज के मित्र बने तथा उनके ही सहलेखन में 'लिरिकल बैलेड्स' नामक कविताओं का प्रथम संस्करण सन् 1798 ई. में प्रकाशित करवाया। 'लिरिकल बैलेड्स' को स्वच्छंदतावादी काव्यांदोलन का घोषणा-पत्र माना जाता है। 'लिरिकल बैलेड्स' के चार संस्करण प्रकाशित हुए और उसकी भूमिका को वर्डसवर्थ की आलोचना का मूल माना जाता है जो निम्नलिखित है-

संस्करणभूमिका के शीर्षक
प्रथम, 1798एडवरटिजमेंट
द्वितीय, 1800प्रिफेस
तृतीय, 1802प्रिफेस
चतुर्थ, 1815प्रिफेस

नोट - प्रश्न में लिरिकल बैलेड्स का रचना काल 1978 ई. दिया है। जो कि गलत है। क्योंकि इसका रचनाकाल 1798 ई. है।

14. "किसी भाषा का साहित्य में व्यवहार न होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उस भाषा का अस्तित्व ही नही था।" यह कथन किस लेखक का है?

Correct Answer: (b) रामचंद्र शुक्ल
Solution:"किसी भाषा का साहित्य में व्यवहार न होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि उस भाषा का अस्तित्व ही नहीं था" कथन रामचन्द्र शुक्ल जी का 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' से है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल अपने 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' ग्रंथ में आधुनिक काल के अन्तर्गत 'खड़ी बोली का गद्य' कहा है। आगे लिखते है कि “भोज के समय से लेकर हम्मीरदेव के समय तक अपभ्रंश काव्यों की जो परंपरा चलती रही उसके भीतर खड़ी बोली के प्राचीन रूप की भी झलक अनेक पद्यों में मिलती है। जैसे- “भल्ला हुआ जु मारिया, बहिणि ! म्हारा कंतु ।” डा० रामकुमार वर्मा का कथन है, " जिस देश के पास हिन्दी जैसी मधुर भाषा है वह देश अंग्रेजी के पीछे दीवाना क्यों है? स्वतन्त्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। हमारी भावभूमि भारतीय होनी चाहिए। हमें जूठन की ओर नहीं ताकना चाहिए।"

15. "एशिया के हरे-भरे धर्म, जैसे ही वे पश्चिमी विज्ञान की वास्तविकताओं के संपर्क में लाये जाते हैं, सूखी लकड़ियों का ढेर मात्र रह जाते हैं"

Correct Answer: (d) हंटर
Solution:

एशिया के हरे-भरे धर्म, जैसे ही वे पश्चिमी विज्ञान की वास्तविकताओं के संपर्क में लाये जाते है, सूखी लकड़ियों का देर मात्र रह जाते हैं। यह कथन अंग्रेज अधिकारी हंटर का है। लाई मैकाले को भारत में अंग्रेजी भाषा और भारतीय शिक्षा का जनक माना जाता है। लार्ड मैकाले एक सुयोग्य शिक्षा शास्त्री, राजनीतिज्ञ एवं कुशल प्रशासक थे।
मैकाले के विवरण पत्र का प्रमुख अंश- "सरकार स्कूल तथा कॉलेज स्तर पर शिक्षा का माध्यम अंग्रजी करे तथा इसके विकास के लिए कई प्राथमिक विद्यालयों के स्थान पर कुछ स्कूल तथा कॉलेज खोले जाए।" विलियम जोंस भारत के प्रति खास तरह का रवैया रखते थे। प्राचीन काल अपने वैभव के शिखर पर थी परन्तु बाद में उसका पतन होता चला गया।
कैनिंग ने अनुच्छेद 15 के द्वारा विधवा पुनर्विवाह लागू कर दिया। कैनिंग के समय में कलकत्ता विश्वविद्यालय, मुम्बई तथा मद्रास विश्वविद्यालय की 1857 ई. में स्थापना हुई।

16. वैज्ञानिक ज्ञान और आख्यान में विरोधी द्वंद्व संबंध पर किस चिंतक ने विचार किया है?

Correct Answer: (b) ल्योतार्द
Solution:

वैज्ञानिक ज्ञान और आख्यान में विरोध और द्वन्द्व संबंध पर ल्योतार्द ने विचार किया है। ल्योतार्द एक फ्रांसीसी दार्शनिक, समाजशास्त्री और साहित्यिक सिद्धान्तकार थे। जुरगेन हैबरमास जर्मन दार्शनिक और समाजशास्त्री हैं।

17. उदंत मार्तंड को प्रकाश में लाने का श्रेय, निम्नलिखित में से किस विद्वान को दिया जाता है?

Correct Answer: (b) ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय
Solution:

उदंत मार्तंड को प्रकाश में लाने का श्रेय ब्रजेंद्रनाथ बंधोपाध्याय को दिया जाता है। हिन्दी-पत्रकारिकता का जन्म हिन्दी- प्रदेश से दूर 'कलकत्ता' नगरी में हुआ। प्राप्त सामग्री के आधार पर हिन्दी का पहला पत्र 'उदंत्तमार्तण्ड' था। इसका प्रकाशन 30 मई 1826 को हुआ था। पं. जुगल किशोर इसके सम्पादक थे। 'उदंत मार्तंड' के प्रकाशन दिन को आधार मानकर 30 मई को राष्ट्रीय हिन्दी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।

18. चौसरिया के खेल में रे, जुग्ग मिलन की आस ।

नर्द अकेली रह गई रे, नहिं जीवन की आस हो।"
कबीर की इस पंक्ति में 'नर्द' शब्द का अर्थ है?

Correct Answer: (c) गोटी
Solution:

"चौसरिया के खेल में रे,.......
............नहिं जीवन की आस हो।।"
चौसर के खेल में जब दो गोटियाँ एक जगह इकट्ठी हो जाती है, उसकी आशा में ही भक्त भीतर भीतर उतरता जाता है। सब कुछ दाँव पर लगाता जाता है, बस एक ही आशा है कि कोई घड़ी तो आएगी जब दोनों गोटें एक जगह मिल जाएंगी, जहाँ मैं और तू का मिलन होगा। अगर गोटी अकेली रह गई तो फिर जीवन व्यर्थ है; जीवन का सारा अर्थ, परमात्मा में डुबकी लगाने में है।

19. 'अंधेरे में' कविता में काव्य-वाचक किसे 'पितः पितः ओ' कहकर संबोधित करता है?

Correct Answer: (d) तिलक
Solution:'अँधेरे में' कविता में काव्य वाचक 'तिलक' को पितः पितः ओ कहकर संबोधित करता है। 'अँधेरे में' कविता का प्रकाशन 1964 ई. को हुआ था। यह मुक्तिबोध की रचना है। इस कविता में 'अँधेरा' सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है। कविता में 'वह' और 'मैं' के बीच आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया परस्पर चलती है। व्यक्ति अपने आप को भूलकर 'वह' पाने के लिए भटकता फिर रहा है। 'मैं' अपनी सुविधा जीवी वृत्ति को छोड़ नहीं पाता है, क्योंकि उसे अपनी कमजोरियों से लगाव है।
'अँधेरे में' कविता का पहला प्रकाशन 'कल्पना' में 1964 में 'आशंका के द्वीपः अँधेरे में' नाम से हुआ। मुक्तिबोध ने 'अँधेरे में' कविता की रचना फैंटेसी में की है।

20. अन्याय जिधर है, उधर शक्ति' 'राम की शक्ति पूजा' का यह संवाद किसने किससे कहा ?

Correct Answer: (a) राम ने विभीषण से
Solution:

'अन्याय जिधर है उधर शक्ति' यह संवाद राम ने विभीषण से कहा। पंक्ति है-
"उतरी' पा महाशक्ति रावण से आमन्त्रण;
अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति!"
कहते छल छल हो गये नयन,
कुछ बूंद पुनः ढलके दृगजल,
रुक गया कण्ठ, चमका लक्ष्मण तेजः प्रचण्ड
धंस गया धरा में कपि गह युगपद मसक दण्ड,
कवि का कहना है कि रावणत्व एवं रामत्व के बीच होने वाला युद्ध कभी खत्म नहीं हुआ यह युद्ध अपराजेय और निरंतर है। इस युद्ध में राम की चिंता सबसे बड़ा कारण है। यहीं चिंता निराला के युग की भी चिंता थी और आज तो यह चिंता कुछ अधिक ही प्रासंगिक है।